चांदी 77 डॉलर पार, सोना प्लैटिनम रिकॉर्ड ऊंचाई पर – Gold Silver Platinum Price Today

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस सप्ताह मूल्यवान धातुओं की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। शुक्रवार के कारोबारी सत्र में चांदी का भाव 77 डॉलर प्रति औंस से ऊपर निकल गया, जो पिछले कई वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, सोना और प्लैटिनम दोनों ने रिकॉर्ड ऊंचाई छुई, जिससे इन धातुओं में निवेश करने वालों के चेहरे खिल उठे हैं।

वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर की कमजोरी, ब्याज दरों में कमी की संभावना, और ऊर्जा संक्रमण की बढ़ती मांग इन सभी कारकों ने सोना, चांदी और प्लैटिनम को मजबूती देने का काम किया है।
सोना नई ऊंचाई पर, निवेशकों का भरोसा लौटा
सोने के भाव में लगातार तेजी बनी हुई है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जब भी दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक पारंपरिक रूप से सोने की ओर रुख करते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। अमेरिका और यूरोप की धीमी अर्थव्यवस्था, ब्याज दरों की स्थिरता, और भू-राजनीतिक तनावों के कारण सोना एक बार फिर ‘सेफ हेवन’ एसेट बन गया है।
भारत के बाजार में भी असर दिखा है — दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना ₹70,000 प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। ज्वैलरी कारोबारियों का कहना है कि शादी-ब्याह सीजन में भी मांग बनी हुई है, जिससे घरेलू बाजार में तेजी और मजबूत हुई है।
औद्योगिक और हरित मांग ने चांदी को दिलाई नई चमक
चांदी के दाम में उछाल के पीछे केवल निवेश नहीं, बल्कि औद्योगिक कारक भी जिम्मेदार हैं। सौर पैनलों, इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में चांदी का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे दुनिया भर में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय धातु विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 तक चांदी की औद्योगिक खपत अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी। इससे कीमतों में दीर्घकालिक मजबूती की संभावना बनी हुई है।
भारतीय बाजार में भी असर देखने को मिला है। चांदी ₹95,000 प्रति किलो के स्तर के आसपास कारोबार कर रही है, जो घरेलू स्तर पर ऐतिहासिक भाव माना जा रहा है।
प्लैटिनम में आपूर्ति संकट से उछाल
प्लैटिनम की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का मुख्य कारण दक्षिण अफ्रीका में जारी खनन चुनौतियां और आपूर्ति में रुकावट है। दक्षिण अफ्रीका प्लैटिनम का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, और वहां की राजनीतिक अस्थिरता व ऊर्जा संकट ने उत्पादन पर असर डाला है।
दूसरी ओर, ऑटोमोबाइल सेक्टर में प्लैटिनम की मांग तेजी से बढ़ी है, क्योंकि इसे कैटेलिटिक कन्वर्टर में उपयोग किया जाता है ताकि वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में यदि आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।
वैश्विक निवेश रुझान और मुद्रा संकट का असर
वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने मूल्यवान धातुओं को नई दिशा दी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद के चलते निवेशक लंबे समय के लिए सोना और चांदी जैसी सुरक्षित एसेट में पैसा लगा रहे हैं।
इसके साथ ही, मध्य-पूर्व और यूरोप में भू-राजनीतिक तनाव, और एशिया के कुछ हिस्सों में महंगाई का दबाव भी बाजार में अस्थिरता बढ़ा रहा है, जिससे निवेशकों को सुरक्षित विकल्प के रूप में सोना और चांदी अधिक आकर्षक लग रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह रुझान
विश्लेषकों की राय में, यह समय कम अवधि के बजाय दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अनुकूल हो सकता है। Expert Metals Research की रिपोर्ट के अनुसार, यदि वर्तमान रुझान जारी रहा, तो 2026 की पहली तिमाही में सोना $2,700 प्रति औंस, जबकि चांदी $80 प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
हालांकि, निवेशकों को कीमतों की अस्थिरता और वैश्विक मौद्रिक नीतियों पर नजर रखनी चाहिए। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि पोर्टफोलियो में 10–15% हिस्सेदारी सोना, चांदी और प्लैटिनम जैसी धातुओं में रखना फिलहाल समझदारी भरा कदम हो सकता है।
घरेलू बाजार पर असर और भविष्य की संभावना
भारतीय बाजार में इन धातुओं की कीमतों पर डॉलर-रुपया विनिमय दर और आयात लागत का बड़ा प्रभाव पड़ता है। अगर रुपये में गिरावट जारी रही, तो घरेलू स्तर पर सोने-चांदी के दाम और बढ़ सकते हैं।
ज्वैलरी व्यापारियों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में शादी और उत्सव सीजन के कारण मांग स्थिर रहेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की पहली छमाही में इसका प्रभाव सोने-चांदी के खुदरा दामों पर साफ नजर आएगा।

