लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख प्रवक्ता मनोज यादव के अचानक लापता होने से राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैल गई है। मंगलवार रात काकोरी क्षेत्र के एक तिलक समारोह में शिरकत करने के बाद वे घर नहीं लौटे,

जिसके बाद परिजनों ने गोमती नगर विस्तार थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं लगा है ।

यह घटना उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई, जहां सपा का मजबूत आधार है। मनोज यादव, जो पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में विपक्षी दलों पर तीखे हमले बोलने के लिए जाने जाते हैं, सामाजिक और राजनीतिक आयोजनों में सक्रिय रहते हैं। परिजनों का कहना है कि वे हमेशा समय पर घर लौट आते थे, इसलिए यह लापता होना बेहद चिंताजनक है।

मनोज यादव का राजनीतिक सफर और सक्रियता

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं। वे सोशल मीडिया पर योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते रहते हैं, खासकर विकास, कानून-व्यवस्था और किसान मुद्दों पर। 2026 में UGC Act को लेकर उन्होंने कई बयान दिए, जहां सपा कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया ।​

उनकी मुखरता ने उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया। अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले मनोज यादव ने उन्नाव बलात्कार मामले जैसी संवेदनशील घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिप्पणियां कीं । जौनपुर की सियासत में भी उनकी चर्चा रही, जब वे अखिलेश से मिलने लखनऊ पहुंचे । हालांकि, 2025 में भाजपा नेता विनीत शुक्ला के साथ विवाद में उनकी FIR हुई, जहां धमकी और बदसलूकी के आरोप लगे ।

सपा के स्थानीय कार्यकर्ता उन्हें एक जुझारू नेता मानते हैं। वे मुजफ्फरनगर जैसे क्षेत्रों में बिगड़ती सड़कों और नहर पटरी टूटने की घटनाओं पर सरकार को घेरते रहे । लापता होने से पहले भी वे नियमित रूप से पार्टी कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे।

घटना का पूरा विवरण: तिलक समारोह से गायब

मंगलवार शाम को मनोज यादव अपने लखनऊ स्थित घर से काकोरी क्षेत्र के एक परिचित के तिलक समारोह के लिए निकले। समारोह में उनकी मौजूदगी की पुष्टि हुई, लेकिन कार्यक्रम समाप्ति के बाद वे गायब हो गए। परिजनों ने रात भर फोन करने की कोशिश की, मगर उनका मोबाइल स्विच ऑफ आया ।

परिवार ने बुधवार सुबह गोमती नगर विस्तार थाने में शिकायत दर्ज कराई। थाने के अधिकारियों ने तुरंत गुमशुदगी का केस दर्ज किया। काकोरी से लखनऊ तक के रास्ते पर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस को शक है कि तिलक समारोह के बाद वे किसी अन्य दिशा में मुड़ गए हों ।

परिजनों का मानना है कि मनोज यादव बिना बताए कहीं नहीं जाते। उनके करीबी बताते हैं कि हाल ही में कोई विवाद नहीं था। फिर भी, राजनीतिक दुश्मनी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे भाजपा सरकार के खिलाफ मुखर थे।

पुलिस जांच: मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स पर फोकस

लखनऊ पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है। एसएसपी कार्यालय से निर्देश जारी हुए हैं। मोबाइल टावर लोकेशन ट्रैक की जा रही है, जिसमें अंतिम सिग्नल काकोरी के आसपास मिला। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से पता लगाया जा रहा है कि लापता होने से पहले वे किससे बात कर रहे थे ।

समारोह स्थल पर मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू हो गई है। आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चल रहा है, जिसमें डॉग स्क्वायड और ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल हो सकता है। पुलिस ने संभावित अपहरण या दुर्घटना की सभी कोणों से जांच के आदेश दिए हैं। गोमती नगर विस्तार थाना प्रभारी ने कहा कि जल्द ही सुराग मिलने की उम्मीद है।

यूपी पुलिस की सतर्कता को देखते हुए, लखनऊ के अन्य थानों को भी अलर्ट किया गया है। अगर मनोज यादव कहीं बाहर निकले हों, तो बॉर्डर चेकपोस्ट्स पर नजर रखी जा रही है।

सपा में हड़कंप: अखिलेश यादव को सूचना

समाजवादी पार्टी के कार्यालय में खलबली मच गई है। स्थानीय नेता प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव को सूचित कर चुके हैं। सपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर दबाव बनाने का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि मनोज यादव जैसे नेता की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए थी ।

पिछले विवादों के चलते सपा ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर #FindManojYadav ट्रेंड चला रहे हैं। अखिलेश यादव की चुप्पी ने भी चर्चा बढ़ा दी है। पार्टी ने पुलिस से 24 घंटे में अपडेट मांगा है।

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

भाजपा ने मामले पर सफाई दी है। प्रवक्ताओं ने कहा कि यह व्यक्तिगत मामला है, राजनीति से जुड़ा नहीं। फिर भी, विपक्ष ने यूपी सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस और बसपा नेताओं ने लापता मामलों में पुलिस की नाकामी का जिक्र किया।

लखनऊ के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना 2027 चुनावों से पहले सपा को कमजोर कर सकती है। मनोज यादव की अनुपस्थिति से पार्टी के मीडिया हैंडलिंग पर असर पड़ेगा।

मनोज यादव के पिछले विवाद और बैकग्राउंड

2025 में इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अखिलेश यादव के इंटरव्यू के दौरान भाजपा नेता विनीत शुक्ला से झड़प हुई। शुक्ला ने योगी पर टिप्पणी का विरोध किया, तो मनोज यादव समेत सपा नेताओं पर धमकी और मारपीट का आरोप लगा। विभूति खंड थाने में FIR दर्ज हुई ।

इस घटना ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। पुलिस ने जांच की, लेकिन आगे कार्रवाई नहीं हुई। मनोज यादव ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया। उनके फेसबुक पेज पर योगी सरकार की आलोचना के पोस्ट वायरल होते रहे ।

लखनऊ में लापता मामलों का ट्रेंड

उत्तर प्रदेश की राजधानी में हाल के वर्षों में कई लापता मामले सुर्खियां बने। काकोरी जैसे क्षेत्रों में सामाजिक आयोजनों के बाद गायब होने की घटनाएं बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक नेताओं के लिए सुरक्षा जरूरी है।

पुलिस आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में लखनऊ में 500 से ज्यादा गुमशुदगी केस दर्ज हुए। अधिकांश सुलझे, लेकिन कुछ संदिग्ध बने रहे। यह मामला इसी चेन का हिस्सा लगता है।

सोशल मीडिया पर बहस

ट्विटर और फेसबुक पर #ManojYadavMissing ट्रेंड कर रहा है। सपा समर्थक पुलिस पर सवाल उठा रहे, जबकि भाजपा हैंडल्स तटस्थता बरत रहे। मनोज यादव का इंस्टाग्राम एक्टिव है, लेकिन अपडेट नहीं ।

नेटिजेंस ने पुरानी वीडियो शेयर कीं, जहां वे UGC प्रोटेस्ट में बोलते नजर आ रहे। बहस छिड़ गई कि क्या पुराने दुश्मन सक्रिय हैं।

परिवार की अपील और पुलिस का आश्वासन

परिजनों ने अपील की कि कोई जानकारी हो तो पुलिस को बताएं। पत्नी ने कहा, “मनोज कभी बिना बताए नहीं जाते।” पुलिस ने आश्वासन दिया कि सभी संसाधन लगाए जा रहे। डीआईजी लेवल पर मॉनिटरिंग हो रही।

अगर अपहरण हुआ, तो फिरौती या राजनीतिक डिमांड की आशंका। पुलिस फॉरेंसिक टीम भी लगाई जा सकती।

भविष्य की संभावनाएं और अपडेट

पुलिस को जल्द क्लू मिलने की उम्मीद। अगर सुरक्षित मिले, तो सपा मजबूत होगी। अन्यथा, राजनीतिक तूफान। हम लगातार अपडेट देते रहेंगे।

लखनऊ में सुरक्षा बढ़ी। सपा ने मीटिंग बुलाई। क्या यह साजिश है? इंतजार।
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