तालिबान इस समय अमेरिका और पाकिस्तान, दोनों के खिलाफ लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है और उसने दोनों को सीधी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने बगराम एयरबेस छोड़ने या अफगानिस्तान में फिर से हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो तालिबान अगले 20 साल तक भी युद्ध लड़ने के लिए तैयार है। पाकिस्तान के साथ भी तालिबान के रिश्ते अब काफी तनावपूर्ण हो गए हैं—तालिबान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की कार्रवाईयों से सीमा पर सीधा संघर्ष हो रहा है और तालिबान ने पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर कब्जा तक किया है।

तालिबान की रणनीति और ताकत

  • तालिबान के पास अब अमेरिका द्वारा छोड़े गए आधुनिक हथियार और भारी युद्ध का अनुभव है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता काफी बढ़ गई है।
  • तालिबान ने स्पष्ट कहा है कि अफगानिस्तान की एक इंच जमीन भी अमेरिका को नहीं दी जाएगी और वह पूरी ताकत से हर हस्तक्षेप का विरोध करेगा।

पाकिस्तान से नया टकराव

  • पाकिस्तान, जो पहले तालिबान का समर्थन करता था, अब दुश्मन बन चुका है। तालिबान के साथ उसके सीमा पर लगातार झड़पें हो रही हैं, जिसमें पाकिस्तानी सैनिकों की मौत भी हो चुकी है।
  • TTP और बलूचिस्तान के अलगाववादी भी तालिबान के साथ अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल करके पाकिस्तान पर हमला कर रहे हैं।

अमेरिका-तालिबान टकराव

  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बगराम एयरबेस वापस लेने की धमकी दी है और तालिबान ने सीधा विरोध जताया है।
  • तालिबान ने स्पष्ट किया है कि वे बगराम का नियंत्रण नहीं छोड़ेंगे, चाहे कितनी भी सैन्य ताकत लगे।

  • का सीधा उल्लेख मुख्यतः अफगान शरणार्थियों और तालिबान की वापसी से जुड़ा है, जिसमें तालिबान सरकार के लौटने के बाद पाकिस्तान में अफगानों की सुरक्षा, मानसिक स्थिति और राजनीतिक बदलाव का ज़िक्र आता है।

निष्कर्ष

तालिबान न सिर्फ खुद को अमेरिका और पाकिस्तान के खिलाफ अकेले लड़ने के लिए तैयार बता रहा है, बल्कि उसकी सैन्य क्षमता, युद्ध अनुभव और आधुनिक हथियार उसे दक्षिण एशिया के वर्तमान सुरक्षा संकट का केंद्र बना रहे हैं।

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