उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पाकिस्तानी नागरिक माहिरा अख्तर उर्फ फरजाना ने अपनी असली पहचान छिपाकर बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका के पद पर दशकों तक नौकरी की.

1979 में पाकिस्तान जाकर नागरिकता लेने वाली यह महिला 1992 से ग्राम कुम्हारिया प्राथमिक विद्यालय में तैनात रही और प्रधानाध्यापिका तक पहुंच गई. हालिया जांच के बाद विभाग ने उसे बर्खास्त किया और पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया.

माहिरा की पाकिस्तान यात्रा और शादी का राज

मामला रामपुर के मोहल्ला आतिशबाज निवासी अख्तर अली की बेटी माहिरा अख्तर से शुरू होता है। 17 जून 1979 को उसका निकाह पाकिस्तानी नागरिक सिबगत अली से हुआ, जिसके बाद वह पाकिस्तान चली गई और वहां की नागरिकता प्राप्त कर ली। पाकिस्तान में रहते हुए माहिरा ने दो बेटियों शुमायला खान और आलिमा को जन्म दिया। निकाह के लगभग तीन साल बाद ही पति ने उसे तीन तलाक दे दिया, जिसके बाद 15 अगस्त 1981 को पाकिस्तानी पासपोर्ट पर माहिरा अपनी बेटियों समेत मायके रामपुर लौट आई।

रामपुर लौटने के बाद माहिरा ने अपनी पहचान फरजाना कर ली और 1985 में स्थानीय निवासी से दूसरी शादी कर ली। उसने पाकिस्तानी नागरिकता का जिक्र छिपाते हुए अपनी पुरानी भारतीय पहचान का दावा किया। पाकिस्तानी पासपोर्ट 1995 तक वैध था, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह दौर भारत-पाकिस्तान संबंधों के तनावपूर्ण समय का था, फिर भी माहिरा ने चुपचाप जीवन जिया।

फर्जी दस्तावेजों से सरकारी नौकरी हासिल

रामपुर में बसने के बाद माहिरा ने स्थानीय शिक्षा प्राप्त की और बीटीसी प्रशिक्षण पूरा किया। 1990 में तत्कालीन अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने उसे निवास प्रमाण पत्र जारी किया, जिसके आधार पर 22 जनवरी 1992 को बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका के पद पर चयनित हुई। तैनाती सैदनगर ब्लॉक के ग्राम कुम्हारिया कला प्राथमिक विद्यालय में हुई, जहां वह वर्षों तक पढ़ाती रहीं।

समय के साथ पदोन्नति होती गई और माहिरा उर्फ फरजाना प्रधानाध्यापिका बन गईं। विभाग के अधिकारी एसके तिवारी ने स्वीकार किया कि नियुक्ति के समय पाकिस्तानी नागरिकता की जानकारी नहीं थी। इस दौरान उसकी बेटी शुमायला खान ने भी बरेली में सरकारी शिक्षिका की नौकरी हासिल की, जो फर्जी दस्तावेजों पर आधारित थी। मां-बेटी दोनों के मामले ने प्रशासनिक लापरवाही उजागर की।

पुराने मामले और 2015 का खुलासा

यह मामला पहली बार 2015 में सुर्खियों में आया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पाकिस्तानी मूल की फरजाना रामपुर स्कूल की प्रिंसिपल हैं और उनका पासपोर्ट 20 साल पहले समाप्त हो चुका था। विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) ने वीजा न बढ़ाने पर नोटिस जारी किया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मुख्य सचिव को जांच के आदेश दिए, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

2015 के बाद मामला ठंडा पड़ गया। फरजाना ने भतीजे के जरिए कहा कि वह सदमे में हैं। इसी बीच बेटी शुमायला का बरेली में मामला फूटा, जिसके बाद माहिरा को 2022 में बर्खास्त किया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुमायला की गिरफ्तारी पर रोक लगाई।
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हालिया जांच और पुलिस एक्शन

बेसिक शिक्षा विभाग की ताजा जांच में पुराने दस्तावेजों का मिलान हुआ, जिससे पाकिस्तानी नागरिकता साबित हुई। विभाग ने माहिरा को निलंबित कर बर्खास्त किया। 7 जनवरी 2026 को थाना अजीमनगर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 336, 338 और 340 (जालसाजी) के तहत एफआईआर दर्ज हुई।

अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने पुष्टि की कि ग्राम कुम्हारिया स्कूल की पूर्व शिक्षिका के खिलाफ जांच चल रही है। पुलिस फर्जी प्रमाण पत्रों की पड़ताल कर रही है और वेतन वसूली पर विचार हो रहा। यह मामला विभागीय भर्ती प्रक्रिया की कमजोरियों को रेखांकित करता है।

मां-बेटी का कनेक्शन और बड़ा सवाल

माहिरा की बेटी शुमायला खान बरेली के फतेहगंज वेस्ट के माधोपुर स्कूल में पढ़ाती थी। उसने भी फर्जी निवास प्रमाण पत्र से बीएड किया और नौकरी पाई। 2025 में उसके खिलाफ कार्रवाई हुई। मां-बेटी दोनों के मामले जुड़े होने से सवाल उठे कि कैसे इतने वर्षों तक धोखा चला।

पुलिस अधिकारी मानते हैं कि यह संगठित धोखाधड़ी हो सकती है। रामपुर एसपी ने कहा कि पूरी जांच के बाद आगे कार्रवाई होगी।

प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

यह घटना सरकारी नौकरियों में सत्यापन प्रक्रिया की पोल खोलती है। 1992 से 2026 तक 34 वर्ष बीत गए, फिर भी खुलासा हाल ही में हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि आधार, पैन जैसी प्रणालियों से पहले दस्तावेज आसानी से जाली बनाए जाते थे। अब डिजिटल सत्यापन जरूरी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार में विदेशी घुसपैठ पर सख्ती के बावजूद यह मामला चिंताजनक है। शिक्षा विभाग ने अन्य स्कूलों में समान जांच शुरू की है।

सोशल मीडिया पर वायरल और जनाक्रोश

समाचार सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। फेसबुक, इंस्टाग्राम पर हजारों शेयर हुए। लोग टिप्पणी कर रहे हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल है। एक यूजर ने लिखा, “कैसे संभव हुआ इतने वर्ष?”​

आगे क्या? कानूनी प्रक्रिया

एफआईआर के बाद माहिरा की तलाश जारी है। गिरफ्तारी संभव है। कोर्ट में वेतन वसूली और सजा का मुकदमा चलेगा। शुमायला का मामला भी फिर गरमाएगा। सरकार ने सभी विभागों को विदेशी नागरिकता जांच के निर्देश दिए।

यह घटना जागरूकता बढ़ाती है कि पहचान सत्यापन कितना महत्वपूर्ण है। रामपुर पुलिस ने अपील की कि ऐसी जानकारी दें।
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