इस्लामी कट्टरपंथ का घिनौना चेहरा उजागर!

जिनके कंधों पर सामाजिक बुराइयों, देश पर आसन्न खतरों से निपटने की जिम्मेदारी हो वही पढ़ा लिखा वर्ग अगर गैर जिम्मेदार, इस्लामिक कट्टरपंथ और गज़वा ए हिंद से प्रेरित होकर देश विरोधी गतिविधियों ( आतंकवाद, जबरन धर्मांतरण ) में लिप्त हो जाए तो फिर क्या ही किया जा सकता है?

हजारों वर्षों का साक्षी है इतिहास
भारतवर्ष ने दुनिया को मानवता शान्ति का पैगाम दिया है। हमारा हजारों वर्षों का इतिहास साक्षी है हमने कभी किसी पर आक्रमण नहीं किया। कभी माताओं बहनों की अस्मत नहीं लूटी हमने कभी किसी के मस्जिद, चर्च न जलाए न तोड़े। हमने मुस्लिम हो या ईसाई किसी भी मत पंत के सर्वोच्च धर्म गुरु या जिन में उनकी आस्था है उनका कभी अपमान नहीं किया। कुरान हो या बाइबल गीता हो या गुरुग्रंथ साहिब सभी को एक समान पूजनीय माना। हमारा तो दृढ़ विश्वास है कि सभी धर्म, पंथ अलग अलग ईश्वर को मानने वाले हो सकते हैं लें अंततोगत्वा सभी मानवता की भलाई ही चाहते होंगे!
लेकिन इतिहास को जब उलट पलट कर देखते हैं तो ध्यान में आता है कि एक खास वर्ग के लोगों ने दुनिया को अपना परिचय अपनी क्रूरता, असभ्यता, नरसंहार, महिलाओं ओर बच्चों से दरिंदगी, दूसरे के पूजा स्थलो के विध्वंस करके दिया है!
जब हिंदुस्तान ने क्रूरता को नजदीक से देखा…
सन् 711 ईसवी जब मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण किया तब पहली बार हिंदुस्तान ने मुसलमानों की क्रूरता को नजदीक से देखा महिलाओं का रेप किया गया मंदिरों को तोड़ा गया इतना ही नहीं राजा दाहिर की दोनों बेटियों को यौन दासी बनाकर खलीफा के सामने पेश किया गया जिस देश में नारियों की सदा सर्वदा पूजा होती रही हो वह उनका ऐसा अपमान तिरस्कार पहली बार देखा गया। बलात्कार शब्द ही मोहम्मद बिन कासिम के समय हिन्दू समाज ने सुना।इसने देश की अंतरात्मा को हिला दिया किंतु दुर्भाग्य से हम आपस में ही लड़ते, बटते और कटते रहे। हजारों वर्ष विदेशी आक्रांताओं के हमले उनका शासन, उनका अत्याचार समग्र हिंदू समाज को झेलना पड़ा। मोहम्मद बिन कासिम, गजनवी, औरंगजेब से लेकर हमारे सामने आए अभी हाल में नासिक के टी सी एस ब्रांच में पढ़े लिखे मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू युवतियों के शोषण के पीछे वही माल ए गनीमत या गज़बा-ए-हिंद की जिहादी मानसिकता छिपी हुई हैं।
कई दशक तक हिंदी सिनेमा में हिंदू संस्कृति का उड़ाया गया मजाक
देश की आजादी के बाद विकृत सेक्युलरिज्म के नाम पर हिंदुओं के विरुद्ध शिक्षा से लेकर फिल्म, कला के माध्यम से एक धीम जहर परोसा गया। हिंदू संस्कृति और परंपराओं का मजाक उड़ाया गया आप देखते होंगे कि किस प्रकार जब भी दिवाली या होली आती है तो उसे किस तरीके से बदनाम करने का षड्यंत्र रचा जाता है और वही ईद या christmas पर कुछ बोलने से न केवल डरते हैं बल्कि उनके मुंह में दही जम जाता है। ऐसा दोगलापन क्यों है?फिल्मों में हिंदुओं में विशेषकर क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य को नकारात्मक तरीके दिखाया गया उनका उपहास उड़ाया गया और दिखाया गया कि ये हिंदू समाज के शेष वर्ग पर अत्याचार करते है। इसके विपरीत किसी मुस्लिम को शांति का दूत बताया गया जबकि हकीकत में धर्मांध मुसलमान क्या कर रहे हैं ये पूरी दुनिया देखती और जानती है। टी सी एस, अमरावती, नागपुर, इंदौर से हिंदू युवतियों से शोषण के सामने आ रहे मामले बताते हैं कि हकीकत में मुसलमान का अधिकांश तबका किस तरह लव जिहाद, धर्मांतरण, रेप और ब्लैक मेलिंग में लिप्त है और निश्चित रूप से ये एक संगठित गिरोह या नेटवर्क का काम है!!इस षड्यंत्र में कोई न कोई धार्मिक नेता हो या राजनेता इन्हें पूरा संरक्षण,आर्थिक सहयोग पर्दे के पीछे से दे रहे है और ऐसी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उन्हें उकसा रहे हैं!
एक सभ्य समाज के लिए अभिशाप
अमेरिका में हुए 26 11 के आतंकवादी हमले से लेकर उसमें लिप्त लादेन हो या भारत में आतंकी गतिविधियां करने वाले रियाज भटकल हो या सिमी का सफदर नागौरी हो या टी सी एस कांड में लिप्त निदा खान हों या दानिश ये लोग न केवल उच्च शिक्षित हैं बल्कि बेहद असभ्य गैर मुस्लिमों के प्रति नफरत से भरे हुए क्रूर और यौन विकृति का शिकार लोग हैं! एक सभ्य समाज के लिए ये अभिशाप की तरह है!
मुसलमान यहां रहेंगे तो कभी सांप्रदायिक शांति नहीं होगी!
छत्रपति शिवाजी महाराज कहते थे कि नीति, नियम मानवों के लिए होते हैं दानवों के लिए नहीं ।
डॉ• अम्बेडकर ने भी कहा था आजादी के समय हिन्दू और मुस्लिम आबादी की पूरी अदला बदली होनी चाहिए हिंदू हिंदुस्तान में रहे ओर मुसलमान पाकिस्तान में क्योंकि मुसलमान यहां रहेंगे तो कभी सांप्रदायिक शांति नहीं होगी और जम्मू कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के नर संहार से लेकर आजादी के समय हुए हिंदुओं के भीषण नर संहार से लेकर अमरावती और टी सी एस की घटनाएं चीख चीख कर उपरोक्त दोनों महापुरुषों की बात का समर्थन ही कर रही हैं।
युवतियों बच्चियों के विरुद्ध जबरन धर्मांतरण

ये चिंता जनक है कि पढ़े लिखे मुस्लिम युवाओं, युवतियों का इस देश में आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने के बावजूद जिहादी नेटवर्क में सम्मिलित होना देश विरोधी गतिविधियां करना गंभीर मामला है!
बहुसंख्यक समुदाय की युवतियों बच्चियों के विरुद्ध जबरन धर्मांतरण उनके धार्मिक पहचान के आधार पर यौन उत्पीड़न और रेप जैसी गतिविधियों में एक संगठित नेटवर्क के रूप में सम्मिलित होना ओर सहयोग करना सामाजिक सद्भाव साथ साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है!
शिक्षा में क्या पढ़ाया जा रहा है घर में कैसे संस्कार दिए जा रहे हैं?
यह महज संयोग नहीं है कि लाल किले पर बम धमाके करने वाले डॉक्टर हों या टी सी एस में काम करने वाले इंजीनियर सबके तार आपस में जुड़े हुए हैं। अगर वाकई में कुछ अच्छे मुसलमान हैं और उनका सिर इनकी हरकतों को देखकर शर्म से झुकता है तो उन्हें खुलकर इनकी देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। पूरी दुनिया में मुसलमान आज हिंसा आतंक ओर गैर मुस्लिम महिलाओं से अभद्रता, रेप, ब्लैक मेलिंग के लिए ही जाने जा रहे हैं। तो आखिर इसकी वजह क्या है? उनको शिक्षा में क्या पढ़ाया जा रहा है घर में कैसे संस्कार दिए जा रहे हैं? अच्छे मुसलमान इनका विरोध क्यों नहीं करते उनकी चुप्पी को उनका मौन समर्थन क्यों न माना जाए? आज ये कुछ वाजिब सवाल है जिनका उत्तर मुसलमानों को देना चाहिए!
शिवाजी महाराज को हर समय रखो स्मरण
इसके साथ ही हिंदुओं ने सेक्युलरिज्म का जो कम्बल अपने ऊपर डाल रखा है वह उनका सबसे बड़ा शत्रु है उसे तत्काल हटाने की जरूरत है और सामने वाला कैसी मानसिकता का है उसे उसी आधार पर ट्रीट करने की जरूरत है। शिवाजी महाराज को हर समय स्मरण रखो और जो आपको सेकुलरिज्म का एकतरफा ज्ञान देते है वे मानव के रूप में दानव हैं वे घोषित हिंदू विरोधी हैं ठीक कालनेमी की तरह जो अपना भाषा और वेश सब बदलकर आता है!
मर्यादा लांघने का दुस्साहस करे तो…?
अपने बच्चों को सनातन संस्कृति की शिक्षा दो मंदिर लेकर जाइए, हिंदू प्रतीक तिलक, कलावा, जनेऊ को गर्व से धारण करिए। गीता, रामायण, वेद, उपनिषद कोई न कोई धार्मिक ग्रंथ पहले खुद पढ़िए बाद में बच्चों को पढ़ाइए। चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, महाराणा प्रताप, शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह, स्वामी विवेकानंद,वीर हकीकत राय,बाजीराव पेशवा,सम्राट ललितादित्य जैसे अनगिनत महापुरुषों के बारे उन्हें बताइए तभी आपके बच्चे ऐसे जिहादियों से मुकाबला कर पाएंगे। आज जिहाद का खतरा गंभीर है चुनौती बेहद कठिन है लेकिन इसे अवसर के रूप में बदलना है क्योंकि हार मानना हिंदुओं ने कभी सीखा नहीं है। हजारों वर्षों के विदेशी आक्रमण भी जिन्हें न मिटा पाए हों हम वही वीर हिंदू हैं इसलिए अपने बच्चों से कहो कि जहाँ भी जाओ वही कहो जो स्वामी विवेकानंद कहते थे वे कहते थे गर्व से कहो हम हिंदू हैं!अपने बच्चों को यही सब संस्कार दीजिए शास्त्र के साथ शस्त्र की शिक्षा दीजिए और कोई मर्यादा लांघने का दुस्साहस करे तो उसे सबक सिखाइए!!
लेखक: पंडित दीपक ऋषि एड.
(राजनीतिक, सामाजिक विश्लेषक)
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