बांके बिहारी का तहखाना, खजाना और सांप… आधी सदी से बंद ताले के पीछे का क्या है तिलिस्म, जानें पूरी कहानी

बांके बिहारी मंदिर का आधी सदी से बंद ताले वाला खजाना 54 वर्षों बाद 2025 के धनतेरस के अवसर पर खोलने की प्रक्रिया पूरी हुई। मंदिर के तहखाने को सुप्रीम कोर्ट से गठित हाई पावर कमेटी के निर्देशन में खोला गया। हालांकि उम्मीद के विपरीत खजाने में सोना-चांदी, गहने और कीमती वस्तुएं नहीं मिलीं, बल्कि खाली संदूक, टूटे बर्तन और मलबा ही मिला। इस दौरान तहखाने में अचानक दो छोटे सांप दिखे, जिन्हें वन विभाग ने सुरक्षित पकड़ लिया। इस रहस्यमय तहखाने की नमी और कीचड़, सांपों की उपस्थिति और पुरानी वस्तुओं से यह जगह काफी टिलिस्मी सी लगती है। मंदिर के कुछ सेवादार इस प्रक्रिया को लेकर नाराज भी थे, क्योंकि उन्होंने मंदिर की परंपरा में बाहरी दखलंदाजी को गलत माना।

हालांकि 1971 के बाद जब आखिरी बार खजाना खोला गया था, तब मंदिर के कीमती जेवरात बैंक के लॉकर में रखवा दिए गए थे, इसलिए खजाने में जो खाली संदूक मिले, वे इसी वजह से थे। इस खजाने को खोलने की प्रक्रिया पांच घंटे तक चली, जिसमें हाई पावर कमेटी, पुलिस, वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। खजाने के पीछे का रहस्य और तिलिस्म इसी रह गया कि आधी सदी तक बंद रहने के बाद भी कुछ खास कीमती वस्तुएं मंदिर में नहीं मिलीं, और इसके साथ सांपों की रिपोर्ट भी जुड़ी रही।
संक्षेप में, बांके बिहारी मंदिर का आधी सदी से बंद खजाना 2025 में खुला, जहां सांपों का रहस्य भी सामने आया, परंतु असल खजाना बैंक लॉकर में होने के कारण मंदिर के तहखाने में खाली संदूक और मलबा ही मिला। इस खजाने के खुलने से मंदिर की परंपरा, प्रशासनिक विवाद और रहस्यों का पुराना विवाद फिर से चर्चा में आया है।
खजाना खोलने का आदेश किसने और क्यों दिया गया
बांके बिहारी मंदिर के खजाने को खोलने का आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी ने दिया था। इस कमेटी ने 29 सितंबर 2025 को खजाना खोलने का निर्णय लिया, जिसके बाद मथुरा के जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने 17 अक्टूबर 2025 को इसे खोलने का आदेश जारी किया। खजाना खोलने का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना और मंदिर के 160 वर्ष पुराने खजाने की स्थिति की जांच करना था। मंदिर के गर्भगृह के नीचे मौजूद इस खजाने को कई दशकों तक बंद रखा गया था और इसे खोलने की मांग लंबे समय से चल रही थी।
इस प्रक्रिया में मंदिर प्रशासन के अधिकारियों, सिविल जज, पुलिस, वन विभाग तथा चारों गोस्वामी समेत कई प्रतिनिधि शामिल थे। खजाना खोलते समय पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई ताकि किसी प्रकार की अनियमितता न हो। इस निर्णय के पीछे यह भी माना जाता था कि मंदिर के इतिहास और धार्मिक महत्व के कारण खजाने को सही तरीके से प्रबंधित और संरक्षित किया जाए।
संक्षेप में, सुप्रीम कोर्ट की समिति के निर्देश और प्रशासनिक आदेश पर मंदिर के लंबे समय से बंद खजाने को 2025 में खोलने का फैसला किया गया था, ताकि मंदिर के खजाने की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके और पारदर्शिता बनी रहे।
वहां पाए गए सामानों और बक्सों की सूची क्या है
बांके बिहारी मंदिर के तिलिस्मी खजाने में 54 साल बाद खोले जाने पर जो सामान और बक्से मिले, उनकी प्रमुख सूची इस प्रकार है:
- तीन संदूक (खाली और कुछ टूटे हुए)
- एक तिजोरी (तिजोरी खोली गई थी)
- मिट्टी के घड़े
- चांदी के बर्तन
- एक छोटा चांदी का छत्र (छाता)
- कुछ कलश
- स्नान-संबंधित वस्तुएं और पुराने पूजा के बर्तन
- खजाने के भीतर कुछ सामग्री में मलबा और कीचड़ था
- खजाने में दो छोटे सांप भी पाए गए थे, जिन्हें सुरक्षित पकड़ा गया
ध्यान देने वाली बात यह है कि मंदिर के कीमती जेवरात और सोने-चांदी के सामान 1971 में बंद होने के बाद बैंक के लॉकर में रखे गए थे, इसलिए तहखाने में जो वस्तुएं मिलीं वे मुख्य रूप से पुराने पूजा-सामग्री और कुछ खाली संदूक ही थे।
यह खजाना लगभग 160 साल पुराना माना जाता है और मंदिर के गर्भगृह के नीचे स्थित है। यह प्राचीन वस्तुएं और संदूक मंदिर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।
संक्षेप में, खजाने में सोने-चांदी के कीमती गहने नहीं मिले, बल्कि मंदिर में उपयोग होने वाली पुरानी पूजा सामग्री और खाली संदूक ही सामने आए।

