तुर्कमान गेट हिंसा: 30 पत्थरबाज फरार, पुलिस ने खंगाले 450 वीडियो

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई हिंसा ने पूरे शहर को हिला दिया। पुलिस ने 450 से ज्यादा वीडियो खंगालकर 30 पत्थरबाजों की पहचान कर ली है। यह घटना 50 साल पुराने 1976 के दंगों की याद दिला रही है।

तुर्कमान गेट का गौरवशाली इतिहास और विवादास्पद अतीत
तुर्कमान गेट पुरानी दिल्ली (शाहजहानाबाद) का प्रमुख प्रवेश द्वार है, जिसे मुगल सम्राट शाहजहां ने 17वीं शताब्दी में बनवाया था। इसका नाम सूफी संत हज़रत शाह तुर्कमान की दरगाह के निकट होने से पड़ा, जो इलाके में धार्मिक सद्भाव का प्रतीक रहा। यह लाल बलुआ पत्थर से निर्मित आयताकार संरचना तीन मेहराबों और दो बुर्जों वाली है, जो मुगल स्थापत्य कला की बेजोड़ मिसाल है।
1976 के आपातकाल में यह इलाका फिर सुर्खियों में आया, जब संजय गांधी के आदेश पर बुलडोजर चलाकर हजारों घर तोड़े गए। पुलिस फायरिंग में कई लोग मारे गए, जिसे ‘तुर्कमान गेट नरसंहार’ कहा गया। अब 2026 में वही इलाका फिर बवाल का केंद्र बन गया, जहां MCD ने हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की।
घटना का विस्तृत क्रम: आधी रात का हंगामा
6 जनवरी 2026 की रात करीब 12 बजे दिल्ली हाईकोर्ट के सख्त निर्देश पर MCD ने तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद से सटी 0.195 एकड़ लीज भूमि पर अवैध निर्माण हटाना शुरू किया। लक्ष्य थे दवा घर, बारात घर, अवैध दुकानें और अस्थायी झुग्गियां, जो सालों से सड़क चौड़ीकरण में बाधा बने हुए थे।
30 जेसीबी, 4 पोकलेन मशीनें, 1000+ पुलिसकर्मी, RAP, RAF और दिल्ली पुलिस की भारी तैनाती थी। रात 12:40 बजे अचानक 50-100 लोगों की उग्र भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़ी, पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू की, लाउड हेलर छीन लिया और नारे लगाए। भीड़ ने तोड़फोड़ की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने आंसू गैस के 4-5 गोले, हल्का लाठीचार्ज और पीएमसी (प्लास्टिक मुनिशन कार्ट्रिज) का इस्तेमाल कर 2-3 मिनट में स्थिति संभाल ली।
हिंसा के शिकार: घायल पुलिसकर्मी और क्षतिग्रस्त सामान
हिंसा में 5-6 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें मामूली चोटें आईं। 2 पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त, 1 लाउड हेलर तोड़ा गया। मस्जिद भवन को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, केवल आसपास के अतिक्रमण हटाए गए। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि कार्रवाई शांतिपूर्ण थी, लेकिन कुछ लोगों ने हंगामा खड़ा कर दिया।
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पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई: 450 वीडियो से 30 चेहरे पहचाने
दिल्ली पुलिस ने चांदनी महल थाने में FIR दर्ज की (IPC 147, 186, 353, 332, 427 आदि धाराएं)। विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर 450+ वीडियो (CCTV, बॉडी कैमरा, ड्रोन फुटेज, मोबाइल, सोशल मीडिया) खंगाले गए। बॉडी कैमरों ने स्पष्ट चित्र दिए, जिससे 30 पत्थरबाजों की पहचान हुई।
अब तक 5 गिरफ्तार:
- काशिफ (22), मोहम्मद कैफ (25), मोहम्मद अरीब (19), अदनान (28), समीर (30) – सभी चांदनी महल/दरियागंज निवासी।
6-10 संदिग्ध हिरासत में, पूछताछ जारी। 20+ फरार, जिनके घरों पर छापे मारे जा रहे। पुलिस ने कहा, “सभी दोषी पकड़े जाएंगे।”
| जांच का विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| कुल वीडियो | 450+ |
| पहचाने गए पत्थरबाज | 30 |
| गिरफ्तार | 5 |
| हिरासत में | 6-10 |
| फरार | 20+ |
| घायल पुलिसकर्मी | 5-6 |
इलाके में छावनी: सुरक्षा और शांति प्रयास
घटना के बाद तुर्कमान गेट छावनी बना: अर्द्धसैनिक बल, ड्रोन निगरानी, ट्रैफिक प्रतिबंध। शांति समितियां बुलाई गईं, धार्मिक नेताओं से अपील। स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने कार्रवाई का समर्थन किया, कहा “अवैध निर्माण तो हटने ही चाहिए।” जामा मस्जिद इलाके पर भी HC ने सर्वे का आदेश दिया।
राजनीतिक साजिश? रात 1 बजे भीड़ जुटाने का रहस्य
रिपोर्ट्स में समाजवादी पार्टी के एक नेता की मौजूदगी का जिक्र, जांच में शामिल। पुलिस का मानना: सुनियोजित साजिश, क्योंकि रात 1 बजे भीड़ कैसे जुट गई? सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट (जैसे “मस्जिद तोड़ी जा रही”) की जांच, कई अकाउंट ब्लॉक। राजनीतिक दलों ने बयानबाजी शुरू कर दी।
हाईकोर्ट का रुख: अतिक्रमण पर सख्ती क्यों?
दिल्ली HC ने MCD को 6 महीने में अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। फैज-ए-इलाही मस्जिद 1940 में बनी, लेकिन आसपास 1980s से अवैध निर्माण। कोर्ट ने कहा, “ऐतिहासिक स्थलों पर कब्जे अस्वीकार्य।” यह कार्रवाई दिल्ली के व्यापक अतिक्रमण अभियान का हिस्सा।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो: सच्चाई vs अफवाहें
घटना के तुरंत बाद दर्जनों वीडियो वायरल: पत्थरबाजी, आंसू गैस, बुलडोजर। एक वीडियो में भीड़ पुलिस पर हमला करती दिखी। अफवाहें फैलीं कि मस्जिद तोड़ी गई, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया। यूट्यूब पर 10+ लाख व्यूज।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया: दोहरी आवाजें
- कुछ निवासी: “अवैध निर्माण हटना जरूरी, लेकिन रात को क्यों?”
- दुकानदार: “सड़क चौड़ी होगी, व्यापार बढ़ेगा।”
- धार्मिक नेता: “शांति बनाए रखें, हिंसा का कोई स्थान नहीं।”
दिल्ली सरकार और MCD का बयान
मुख्यमंत्री ने “कानून व्यवस्था बनाए रखने” का निर्देश दिया। MCD आयुक्त: “हाईकोर्ट आदेश का पालन, आगे भी कार्रवाई।” पुलिस कमिश्नर: “CCTV से कोई नहीं बचेगा।”
भविष्य की चुनौतियां: अतिक्रमण vs शांति
पुरानी दिल्ली में ऐतिहासिक स्थल (चौरी बाजार, लाल किले के पास) पर अतिक्रमण आम। यह घटना सबक: पारदर्शी कार्रवाई जरूरी। सरकार ने नई गाइडलाइंस जारी कीं।
कानूनी प्रक्रिया और संभावित सजा
FIR में NSA की संभावना, दोषी 7-10 साल जेल। कोर्ट सुनवाई तेज। परिवारों को पुनर्वास का वादा।
व्यापक प्रभाव: दिल्ली के अन्य इलाकों पर असर
जामा मस्जिद, चांदनी चौक में सतर्कता बढ़ी। ट्रैफिक सुधार की उम्मीद। पर्यटन पर असर नगण्य।
निष्कर्ष में: शांति की अपील
प्रशासन ने सभी से शांति बनाए रखने को कहा। यह घटना विकास और कानून के बीच संतुलन सिखाती है। हिंसा कभी समाधान नहीं।
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