यूपी: दो मदरसों की मान्यता रद्द, लंदन से ले रहा था मौलाना वेतन

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मदरसों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सख्त कार्रवाई शुरू की है। इसी के तहत प्रदेश के दो मदरसों की मान्यता रद्द की गई है। जांच में सामने आया कि इन मदरसों का संचालन वर्षों से “कागजों पर” किया जा रहा था, जबकि असल में वहां शिक्षण गतिविधियां बंद थीं। दोनों मदरसों का संबंध मौलाना शमशुल हुदा से बताया गया है, जो इस समय लंदन में रह रहे हैं।

शिक्षा विभाग ने जांच में पाया कि हुदा विदेश में रहकर भी दोनों मदरसों से वेतन और पेंशन लेते रहे। यह खुलासा होने के बाद विभाग ने न केवल दोनों मदरसों की मान्यता रद्द की बल्कि आर्थिक अनियमितता और फर्जीवाड़े की जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं।
कैसे हुआ पूरा खुलासा?
मामला तब सामने आया जब पिछले वर्ष मदरसा बोर्ड ने पूरे प्रदेश में संचालित मदरसों का अकाउंट और उपस्थिति ऑडिट शुरू किया। इस दौरान कई संस्थानों से ऑनलाइन रिपोर्ट मांगी गई। जब संबंधित अधिकारियों ने दोनों मदरसों की फाइलें खंगालीं, तो पता चला कि उनके प्रधानाचार्य या मुख्य मौलाना पिछले कई वर्षों से देश से बाहर हैं।
फिर विभाग की टीम ने स्थानीय स्तर पर जांच की, जिसमें पाया गया कि वहां न तो शिक्षक आते हैं और न ही छात्र। कई सालों से बिल्डिंग तक जर्जर पड़ी थी, फिर भी हर महीने फर्जी उपस्थिति दर्ज कर वेतन और पेंशन की राशि बैंक खाते में भेजी जा रही थी।
लंदन से संचालित हो रहा था पूरा नेटवर्क
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना शमशुल हुदा पिछले कई सालों से ब्रिटेन की राजधानी लंदन में रह रहे हैं। वह वहीं से अपने सहयोगियों के जरिए मदरसों से जुड़े वित्तीय लेनदेन को नियंत्रित कर रहे थे। विभाग का कहना है कि वेतन और पेंशन की राशि हर महीने हुदा के नाम दर्ज खाते में ट्रांसफर होती रही।
राज्य अधिकारियों के मुताबिक, हुदा ने फर्जी हस्ताक्षर और डिजिटल दस्तावेजों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दिखाने की कोशिश की थी। ऑडिट के दौरान जब इन दस्तावेजों की जांच की गई, तो उनमें से कई को “टेम्पलेट कॉपी” बताया गया — यानी एक ही हस्ताक्षर को बार-बार स्कैन करके अपलोड किया गया था।
शिक्षा विभाग ने बरती सख्ती
जब यह मामला सामने आया तो प्रदेश के शिक्षा मंत्री और मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष ने संयुक्त बैठक कर दोनों मदरसों की मान्यता तुरंत प्रभाव से रद्द करने के आदेश दिए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि भविष्य में यदि किसी मदरसे में इस तरह की अनियमितता पाई जाती है, तो न केवल मान्यता रद्द की जाएगी बल्कि आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि विभाग के पास अब डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी चल रही है। इसके तहत हर मान्यता प्राप्त मदरसे को अपने शिक्षकों और छात्रों का रीयल-टाइम डेटा अपलोड करना होगा। इससे किसी भी तरह की फर्जी उपस्थिति या वेतन भुगतान को आसानी से रोका जा सकेगा।
यह भी पढ़ें:https://thedbnews.in/dayaben-back-after-8-years-tmkoc-actor-reveals/
सरकारी बयान और आगे की कार्रवाई
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि मदरसों के पारदर्शी संचालन के लिए यह कार्रवाई एक “संदेशात्मक कदम” है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार की नीति है — “जो पढ़ाएगा वही तनख्वाह पाएगा।” यदि कोई संस्था केवल कागजों पर चल रही है तो उसे सरकारी सहायता का कोई हक नहीं।
शिक्षा मंत्री ने भी बयान जारी करते हुए कहा कि यह अभियान अब राज्यभर के सभी जिलों में चलाया जाएगा। हर मदरसे का वित्तीय लेनदेन, शिक्षकों की उपस्थिति और छात्रों की संख्या की सघन जांच की जाएगी। गलत पाए जाने वाले संस्थानों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई तय है।
सामाजिक और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई पर कई मुस्लिम संगठनों ने प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने सरकार की कार्रवाई को “उचित” बताया और कहा कि फर्जी मदरसों की पहचान कर उन्हें समाप्त करना जरूरी है ताकि असली शिक्षण संस्थान मजबूत हो सकें।
वहीं कुछ संगठनों ने कहा कि कार्रवाई करते समय निर्दोष संस्थानों को परेशान न किया जाए। उन्होंने मांग की कि सरकार स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करे, ताकि पारदर्शिता के नाम पर धार्मिक संस्थानों को अनावश्यक रूप से निशाना न बनाया जाए।
मदरसा बोर्ड की भूमिका
मदरसा बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से कई मदरसों में अनियमितताएं बढ़ी हैं। कुछ संस्थान सरकारी अनुदान का लाभ लेकर भी सही तरीके से कक्षाएं नहीं चला रहे। इसीलिए अब डिजिटल उपस्थिति सिस्टम, बायोमेट्रिक अटेंडेंस और ऑनलाइन ऑडिट की व्यवस्था लागू की जा रही है।
उन्होंने बताया कि यूपी में वर्तमान में करीब 16,500 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। इनमें से कई मदरसों को नियमित रूप से सरकारी वित्तीय सहायता मिलती है। इस कारण सरकार चाहती है कि इन संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और हर शिक्षक के कार्य का रिकार्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध हो।
आर्थिक फर्जीवाड़े की जांच शुरू
विभागीय सूत्रों के अनुसार, मौलाना शमशुल हुदा के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में शिकायत दर्ज कराई जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मदरसों के खातों से वेतन और पेंशन के नाम पर कुल कितनी राशि निकाली गई।
जानकारी के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में दोनों मदरसों के खातों से लाखों रुपये ट्रांसफर हुए हैं। जांच के अंतर्गत यह भी देखा जा रहा है कि इसमें मदरसा प्रबंधन समिति के अन्य सदस्य भी शामिल हैं या नहीं।
सरकार का उद्देश्य: शिक्षा व्यवस्था में सुधार
सरकार का उद्देश्य केवल दंड नहीं, बल्कि सुधार है। योगी सरकार ने साफ किया है कि कोई भी संस्था धर्म के नाम पर भ्रष्टाचार नहीं कर सकती। नए नियमों के तहत अब हर मदरसे को वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट, शिक्षक उपस्थिति रिकॉर्ड और छात्र पंजीकरण आंकड़े ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। ऐसा न करने पर आर्थिक सहायता रोक दी जाएगी।
जनता और विशेषज्ञों की राय
कई शिक्षा विशेषज्ञों ने सरकार की इस कार्रवाई को सकारात्मक बताया है। उनका कहना है कि यदि सभी मदरसों का संचालन पारदर्शी हो जाता है तो इससे शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी और सरकारी फंड का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।
वहीं आम जनता के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा है कि आखिर इतने वर्षों तक यह फर्जीवाड़ा बिना रुके कैसे चलता रहा। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए हैं कि ऐसे मामलों में स्थानीय अधिकारियों की जिम्मेदारी क्यों नहीं तय की जाती।
भविष्य की योजना
सरकार अब एक नया मदरसा मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू करने की तैयारी में है, जिसमें सभी मान्यता प्राप्त मदरसों की निगरानी जिला स्तर पर की जाएगी। यह सिस्टम हर तीन महीने में ऑडिट रिपोर्ट को राज्य बोर्ड तक भेजेगा।
इस योजना के तहत प्रत्येक मदरसा को यूनिक कोड दिया जाएगा, जिसके जरिए शिक्षक उपस्थिति, वेतन भुगतान और छात्र नामांकन की जानकारी सार्वजनिक रूप से देखी जा सकेगी।
शैक्षणिक संस्था में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं
मौलाना शमशुल हुदा से जुड़े दो मदरसों की मान्यता रद्द किए जाने का मामला सिर्फ एक उदाहरण नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह साफ संदेश है कि सरकार अब किसी भी मदरसे या शैक्षणिक संस्था में भ्रष्टाचार या फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं करेगी।
इस कार्रवाई के बाद अन्य मदरसों में भी सतर्कता बढ़ी है और अब हर संस्था यह सुनिश्चित करने में लगी है कि उनके दस्तावेज और कार्यप्रणाली पारदर्शी रहें।
यह भी पढ़ें:https://thedbnews.in/three-crore-cars-satua-babas-magh-mela-look-goes-viral-prayagraj/

