अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को सोने की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई। वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई और इसके बाद बढ़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने अपने धन को सुरक्षित निवेश की दिशा में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (NYMEX) पर सोना 1.2% की तेजी के साथ 2,365 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड हुआ, जबकि लंदन बुलियन मार्केट में भी दामों में उछाल देखा गया।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, निवेशक फिलहाल स्टॉक्स और क्रिप्टो जैसे जोखिमपूर्ण एसेट्स से दूरी बना रहे हैं। उनकी प्राथमिकता पूंजी की सुरक्षा बन गई है, और ऐसे समय में सोना एक विश्वसनीय विकल्प माना जा रहा है।

वेनेजुएला संकट: अमेरिकी कदम का असर

वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई के बाद स्थिति और बिगड़ती नजर आ रही है। अमेरिका ने वेनेजुएला की सरकार पर भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और अवैध व्यापार गतिविधियों के आरोप लगाते हुए कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इससे वहां की अर्थव्यवस्था और वैश्विक ऊर्जा बाजार दोनों प्रभावित हुए हैं।
वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका का प्रमुख तेल उत्पादक देश है। वहां की अस्थिरता से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की आपूर्ति घटने का खतरा बढ़ जाता है। तेल बाजार में उतार-चढ़ाव आने से विश्व अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है और डॉलर पर भी असर होता है। नतीजतन, निवेशक ऐसी परिस्थितियों में सोने की ओर रुख करते हैं, क्योंकि यह मुद्रास्फीति और राजनीतिक जोखिम दोनों से सुरक्षा प्रदान करता है।

अमेरिकी डॉलर में कमजोरी का लाभ सोने को

सोमवार को डॉलर इंडेक्स में 0.4% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे सोने की खरीद और आकर्षक हो गई। जब डॉलर कमजोर होता है, तो दूसरी मुद्राओं में सोना सस्ता हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ जाती है। यह प्रवृत्ति पिछले कुछ महीनों से लगातार बनी हुई है, जो बताती है कि निवेशक अमेरिकी अर्थव्यवस्था की धीमी गति को लेकर सतर्क हैं।
साथ ही, अमेरिकी ट्रेज़री यील्ड्स में नरमी ने भी गोल्ड की मांग को समर्थन दिया है, क्योंकि ब्याज दरों के स्थिर या घटने की संभावना निवेशकों को नॉन-यील्डिंग एसेट (जैसे गोल्ड) की ओर खींचती है।
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विश्वभर में बाजारों की स्थिति

एशियाई बाजारों में सोने की कीमतों में 0.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि यूरोपीय बाजारों में दोपहर के कारोबार तक यह बढ़त 1.1% तक पहुंच गई। चीन और रूस जैसे देशों के निवेशक भी डॉलर-आधारित निवेश से हटकर सोने और अन्य कीमती धातुओं में पोर्टफोलियो विविधीकरण कर रहे हैं।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2025 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने 1,200 टन से अधिक सोना खरीदा — जो पिछले दशक का सबसे ऊंचा स्तर है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2026 की शुरुआत में भी यह रुझान जारी रहने की संभावना है।

भारत में सोने के भावों में बढ़ोतरी

भारतीय सर्राफा बाजारों में भी अंतरराष्ट्रीय तेजी का असर देखने को मिला है। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और चेन्नई में सोमवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 74,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई। पिछले सप्ताह के मुकाबले यह लगभग ₹900 की बढ़ोतरी दर्शाता है।
सोने की यह तेजी आगामी शादी और त्योहारी सीजन में मांग को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, निवेशक वर्ग इसे लॉन्ग-टर्म स्टेबल रिटर्न के लिए अभी भी आकर्षक विकल्प मान रहा है।

मुंबई के बुलियन ट्रेडर अरुण अग्रवाल के अनुसार, “पिछले एक महीने से विदेशी बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। जब तक डॉलर मजबूत नहीं होता और अमेरिकी नीतियां स्थिर नहीं होतीं, तब तक सोना ऊपर की दिशा में बना रहेगा।”

निवेशकों की रणनीति: गोल्ड ETF और SGB पर जोर

खुदरा निवेशक अब भौतिक सोना खरीदने के बजाय गोल्ड ETF और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के माध्यम से निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।
SGB स्कीम में मिलने वाला 2.5% वार्षिक ब्याज इसे आकर्षक बनाता है। वहीं, गोल्ड ETF की लिक्विडिटी और सुरक्षित स्टोरेज की सुविधा भी निवेशकों को रास आ रही है। ब्रोकर फर्मों का कहना है कि दिसंबर से जनवरी के बीच गोल्ड ETF में 15% तक की इनफ्लो वृद्धि दर्ज हुई है।

विशेषज्ञों की राय: स्थिरता से पहले और बढ़त संभव

कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले दो से तीन महीनों में सोने की कीमतें 2,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर वेनेजुएला संकट का समाधान मिल गया और अमेरिका अपनी मुद्रा नीति को अधिक सख्त बनाता है, तो कीमतों में हल्की गिरावट भी संभव है।
दिल्ली स्थित फाइनेंशियल एनालिस्ट करन उप्पल के अनुसार, “मौजूदा हालात में गोल्ड बुलिश ट्रेंड में है। निवेशकों को चाहिए कि वे धीरे-धीरे खरीदारी करें और कीमतों के बड़े उछाल के समय मुनाफावसूली का भी ध्यान रखें।”

तेल बाजार और मुद्रास्फीति का संबंध

कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता ने भी सोने के भाव को सपोर्ट दिया है। अगर तेल महंगा होता है तो महंगाई बढ़ती है, जिससे फिएट करेंसी का मूल्य घटता है। ऐसे में सोना मुद्रास्फीति के खिलाफ एक स्वाभाविक कवच बन जाता है।
आर्थिक विश्लेषण यह भी बताते हैं कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद तेल उत्पादक देशों के बीच असंतोष बढ़ा है, जो भविष्य में और आपूर्ति व्यवधान पैदा कर सकता है। इसीलिए, वित्त जगत के अनुभवी निवेशक पहले से ही बचाव की रणनीति के तहत सोने को अधिक तवज्जो दे रहे हैं।

भारतीय उपभोक्ताओं पर असर

भारत जैसे देशों में जहां सोना सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण निवेश और उपहार दोनों है, बढ़ती कीमतों से घरेलू खपत पर असर पड़ सकता है। ज्वैलर्स एसोसिएशन का कहना है कि यदि दाम इसी गति से बढ़ते रहे, तो जनवरी-फरवरी के विवाह सीजन में खरीदारी 15% तक घट सकती है।
हालांकि लंबे समय के निवेशक और एनआरआई निवेशक इस मौके को “सुरक्षित लंबी अवधि” के अवसर के रूप में देख रहे हैं।

विश्व अर्थव्यवस्था के लिए संकेत

वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई ने केवल लैटिन अमेरिका ही नहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी हलचल पैदा कर दी है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि जब भी राजनीतिक या आर्थिक स्थिरता पर खतरा मंडराता है, तो सोना निवेशकों का सबसे भरोसेमंद साथी बन जाता है।
चाहे केंद्रीय बैंक हों या आम निवेशक — सबने इसे अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर जोखिम से बचाव की कोशिश की है। अगर अगले कुछ महीनों में भी भू-राजनीतिक तनाव जारी रहता है, तो 2026 का शुरुआती दौर इतिहास के सबसे लाभदायक सोने के बाजारों में से एक साबित हो सकता है।
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