भारतीय महिला क्रिकेट में कई खिलाड़ी आती हैं और कई चली जाती हैं, लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं जो मैदान पर दिखें या न दिखें, चर्चा में हमेशा बने रहते हैं। शिखा पांडे उन्हीं में से एक हैं।

वह 2023 के बाद से भारतीय टीम का हिस्सा नहीं रही हैं, इसके बावजूद विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) में उनकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है। 36 साल की उम्र में भी फ्रेंचाइज़ी टीमें उन पर करोड़ों रुपये खर्च करने को तैयार हैं। सवाल यही है – जब वह टीम इंडिया से बाहर हैं, तो फिर शिखा पांडे इतनी खास क्यों हैं?

एक समय भारतीय तेज गेंदबाज़ी की रीढ़ थीं शिखा

2018 से लेकर 2020 तक का दौर शिखा पांडे के करियर का स्वर्णिम समय रहा। झूलन गोस्वामी के टी20 से संन्यास के बाद भारतीय तेज आक्रमण की ज़िम्मेदारी शिखा के कंधों पर आ गई थी।

इस दौरान उन्होंने 28 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 24 विकेट लिए। उस समय भारतीय टीम में कोई भी अन्य तेज गेंदबाज़ उनके बराबर निरंतरता नहीं दिखा पा रहा था।

उम्मीद की जा रही थी कि वह तीनों फॉर्मेट में झूलन गोस्वामी की विरासत को आगे बढ़ाएंगी। लेकिन 2022 आते-आते परिस्थितियाँ बदल गईं और वह अचानक टीम से बाहर हो गईं।

छोटा सा कमबैक और फिर लंबा इंतज़ार

2023 महिला टी20 विश्व कप से ठीक पहले शिखा को दोबारा टीम में शामिल किया गया। लेकिन यह वापसी सिर्फ छह मैचों तक ही सीमित रही। इसके बाद से उन्होंने भारत के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं खेला।

इसके बावजूद WPL में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता चला गया।

WPL में शिखा पांडे: आंकड़ों से कहीं आगे की कहानी

शिखा पांडे सिर्फ नई गेंद से स्विंग कराने वाली गेंदबाज़ नहीं रहीं। WPL के तीन सीज़न में उन्होंने खुद को एक पूरे ओवर की गेंदबाज़ के रूप में ढाल लिया है।

अब वह:

  • पावरप्ले में विकेट ले सकती हैं
  • मिडिल ओवर्स में रन रोक सकती हैं
  • डेथ ओवर्स में यॉर्कर और स्लोअर गेंदों से बल्लेबाज़ों को परेशान कर सकती हैं

अब तक WPL में उनके 30 विकेट हैं, जिनमें से 10 विकेट आखिरी चार ओवरों (17 से 20) में आए हैं – जो किसी भी तेज गेंदबाज़ के लिए बेहद कठिन चरण माना जाता है।

यह उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है।

WPL 2026 नीलामी: जब करोड़ों की बोली लगी

WPL 2026 की नीलामी में शिखा पांडे का नाम आते ही माहौल गर्म हो गया।

उनका बेस प्राइस था सिर्फ 40 लाख रुपये, लेकिन यूपी वॉरियर्ज़ और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बीच बोली की जंग छिड़ गई।

आखिरकार यूपी वॉरियर्ज़ ने उन्हें 2.4 करोड़ रुपये में खरीद लिया – यानी बेस प्राइस से छह गुना ज़्यादा।

यह साफ दिखाता है कि फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट में शिखा की कीमत कितनी ऊंची है।

मैदान के बाहर की ताकत: तैयारी और सोच

दिल्ली कैपिटल्स की टैलेंट स्काउट रह चुकीं अनन्या उपेन्द्रन बताती हैं कि शिखा की सबसे बड़ी खूबी उनकी तैयारी है।

वह:

  • हर बल्लेबाज़ के खिलाफ नोट्स बनाती हैं
  • विरोधी खिलाड़ियों की आदतों का अध्ययन करती हैं
  • वीडियो एनालिसिस करती हैं
  • अपनी फिटनेस पर लगातार काम करती हैं

यह आदतें उन्होंने अंडर-19 क्रिकेट के समय से ही बना ली थीं, जब वीडियो एनालिसिस जैसी सुविधाएँ आम नहीं थीं।

तीनों चरणों की गेंदबाज़: दुर्लभ प्रतिभा

WPL के आंकड़े बताते हैं कि शिखा उन चुनिंदा गेंदबाज़ों में शामिल हैं जिन्होंने:

  • शुरुआती ओवरों
  • मिडिल ओवर्स
  • और डेथ ओवर्स

तीनों चरणों में कम से कम पाँच विकेट लिए हैं।

वह अब तक 27 WPL पारियों में सिर्फ 7 बार विकेट लेने में असफल रही हैं – यानी लगभग हर मैच में वह ब्रेकथ्रू देती हैं।zz

कोच और साथी खिलाड़ियों की नज़र में

पूर्व भारतीय फील्डिंग कोच बिजू जॉर्ज कहते हैं:

“शिखा चलती-फिरती क्रिकेट एनसाइक्लोपीडिया हैं। वह हर खिलाड़ी के बारे में जानती हैं, हर मैच को पढ़ती हैं और टीम मीटिंग्स में हमेशा लीड करती हैं।”

मेग लैनिंग, जो 2026 में यूपी वॉरियर्ज़ की कप्तान होंगी, कहती हैं:

“वह दबाव में शांत रहती हैं, पूरे ओवर में गेंदबाज़ी कर सकती हैं और युवा गेंदबाज़ों को गाइड करती हैं। कप्तान के तौर पर ऐसे खिलाड़ी टीम के लिए सोने जैसे होते हैं।”

दुनिया भर का अनुभव

शिखा सिर्फ भारत में ही नहीं खेलीं। उन्होंने:

  • ऑस्ट्रेलिया की WBBL
  • न्यूजीलैंड की सुपर स्मैश
  • कैरेबियन प्रीमियर लीग
  • और इंग्लैंड के घरेलू टूर्नामेंट

में भी क्रिकेट खेला है।

इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने उनकी सोच को और परिपक्व बनाया है।

घरेलू क्रिकेट में नई शुरुआत

करीब 18 साल तक गोवा की टीम का हिस्सा रहने के बाद शिखा ने 2024-25 में बड़ौदा टीम जॉइन की।

वहां उन्होंने गेंद के साथ-साथ बल्ले से भी योगदान दिया:

  • 6 पारियों में 127 रन
  • स्ट्राइक रेट 154 से ज्यादा

इससे साबित हुआ कि वह सिर्फ गेंदबाज़ ही नहीं, उपयोगी लोअर-ऑर्डर बल्लेबाज़ भी बन चुकी हैं।

युवा खिलाड़ियों की मेंटर

शिखा अब सिर्फ खुद के लिए नहीं खेलतीं। वह नेट सेशन में युवा गेंदबाज़ों को टिप्स देती हैं, रणनीति समझाती हैं और मानसिक मजबूती पर भी बात करती हैं।

उनकी यही भूमिका उन्हें टीम का सीनियर लीडर बनाती है।

क्या टीम इंडिया में वापसी संभव है?

2026 महिला टी20 विश्व कप इंग्लैंड में होना है, जहां तेज गेंदबाज़ों को अतिरिक्त मदद मिलती है।

अगर शिखा WPL 2026 में यूपी वॉरियर्ज़ को प्लेऑफ तक पहुंचाने में सफल रहती हैं और उसी तरह प्रभावी गेंदबाज़ी जारी रखती हैं, तो चयनकर्ताओं के लिए उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

मैदान पर उनका सम्मान

शिखा पांडे की कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं है। यह कहानी है:

  • निरंतर मेहनत की
  • खुद को बदलने की
  • नई चुनौतियों को अपनाने की
  • और क्रिकेट के प्रति जुनून की

भले ही वह इस वक्त भारतीय टीम की जर्सी न पहन रही हों, लेकिन मैदान पर उनका सम्मान, उनकी कीमत और उनका प्रभाव आज भी बरकरार है।

कभी-कभी असली वापसी स्कोरकार्ड से नहीं, बल्कि मौके से शुरू होती है। और शिखा पांडे उस मौके के बेहद करीब खड़ी दिखाई देती हैं।
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