पत्नी को ‘इलाज’ के नाम पर दी मौत की दवा!6 महीने बाद ‘डॉक्टर डेथ’ की खूनी साजिश का पर्दाफाश

बेंगलुरु में रहने वाले डॉक्टर कपल की कहानी शुरू में सामान्य लग रही थी, लेकिन छह महीने बाद डॉक्टर पति महेंद्र रेड्डी द्वारा अपनी डॉक्टर पत्नी कृतिका रेड्डी की हत्या का खुलासा हुआ। इस डॉक्टर जोड़े की शादी मई 2024 में हुई थी, लेकिन शादी के तुरंत बाद ही उनके रिश्ते में तनाव आ गया था। महेंद्र रेड्डी, जो विक्टोरिया अस्पताल में सर्जन थे, ने अपनी पत्नी कृतिका को एनेस्थेसिया की दवा प्रोपोफोल की घातक खुराक दी, जिससे उसकी मौत हुई।

पुलिस जांच में पाया गया कि महेंद्र को गुस्सा था क्योंकि उसे ऐसा लगा कि शादी से पहले कृतिका के परिवार ने उसकी मेडिकल हिस्ट्री छुपाई थी। कृतिका कई बीमारियों से परेशान थी, जिसमें गैस्ट्रो और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं शामिल थीं, जिसके कारण उसे बार-बार अस्पताल जाना पड़ता था। महेंद्र ने धीरे-धीरे कई दवाओं की डोज दी, जिससे एक नेचुरल मौत का भ्रामक प्रभाव पड़ा।
कृतिका की बहन और परिवार की शिकायत पर पुलिस ने फॉरेंसिक जांच कराई, जिसमें प्रोपोफोल की उपस्थिति पाई गई। इस रिपोर्ट के बाद पुलिस ने मामला हत्या में बदलकर महेंद्र रेड्डी को मणिपाल से गिरफ्तार कर लिया। मृतका के पिता ने सख्त सजा की मांग की है।
यह मामला एक शातिर साजिश का उदाहरण है जिसमें एक डॉक्टर ने अपनी मेडिकल नॉलेज का गलत इस्तेमाल कर अपनी पत्नी की जान ली और यह करीब छह महीने तक छुपा रहा गया। इस मामले ने डॉक्टर कपल की दिखने वाली परफेक्ट जिंदगी के पीछे के काले सच को उजागर किया है.
यह कहानी एक सामान्य, खुशहाल जीवन के पीछे छुपे दर्द और धोखे का मर्मस्पर्शी सच है। बेंगलुरु का डॉक्टर कपल—महेंद्र और कृतिका—पहले तो एक आदर्श शादीशुदा जोड़ी लगते थे, जिनका सुंदर घर और समृद्ध जीवन सबको प्रेरणा देता था। लेकिन छह महीने बाद एक ऐसी घटना ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया, जिसने सबको हिलाकर रख दिया।
कृतिका, जो अपने स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद जीवन की चुनौतियों से जूझ रही थी, अपने पति महेंद्र पर भरोसा करती थीं कि वे उसकी देखभाल करेंगे। पर इस भरोसे के पीछे छुपा था एक अंधकारमय सच। महेंद्र ने अपनी मेडिकल योग्यता का इस्तेमाल कर, धीरे-धीरे उसे घातक दवाएं दीं, जो उस पर इंसानी दया के बजाय नफरत की गवाही देती हैं।
यह दर्दनाक घटना हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी जिनसे हम सबसे ज्यादा प्यार और सुरक्षा की उम्मीद करते हैं, वही हमारे सबसे बड़े खतरे बन जाते हैं। कृतिका की मौत एक केवल हत्या की कहानी नहीं, बल्कि एक टूटे हुए सपने, परिवार की आह भरती पुकार और समाज के उन पहलुओं की कहानी है जहां इंसानी संवेदनाएं टूट जाती हैं।
इस कहानी में हर उस परिवार की आवाज़ छिपी है जो अपने भीतर आघात और दर्द सहता है, पर फिर भी उम्मीद की किरणों को थामे रखता है। यह हमारी ज़िन्दगी की असली खूबसूरती और जटिलता को बयां करती है—कि प्यार और विश्वास की कदर करना कितना ज़रूरी है, और अगर यह टूट जाए तो इसका न्यूनीकरण कितना गहरा होता है।
अंत में, यह दुखद सत्य हमारे भीतर मानवीय संवेदनशीलता जगाने का आग्रह करता है ताकि हम अपने आस-पास के लोगों के दर्द को समझें, जुड़ाव बनाएं, और किसी भी तरह के अनदेखे संकट को समझ कर समय रहते उसकी सहायता कर सकें। यह दर्दनाक कहानी हमें याद दिलाती है कि हमारे रिश्ते, सम्मान और जीवन की क़ीमत अनमोल है, जिसे संरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है।
यह कहानी हमें संवेदनशील बना कर हमारे भीतर मानवीय प्रेम और दया की जड़ों को मजबूत करती है। कृतिका के लिए न्याय और इनके जैसे और मामले हमारे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी हैं कि हम अपने करीबी रिश्तों में सचेत रहें और हमेशा सजग रहें.

