बजट 2026 पेश होने से ठीक पहले टैक्सपेयर्स की नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं। पेंशन पर टैक्स मुक्ति, बीमा प्रीमियम पर छूट बढ़ाने, होम लोन ब्याज में राहत, NPS निवेश सीमा वृद्धि और न्यूनतम पेंशन इजाफे जैसी पांच प्रमुख मांगें उठ रही हैं। ये बदलाव मध्यम वर्ग की जेब ढीली करने और रिटायरमेंट प्लानिंग को मजबूत बनाने में अहम साबित हो सकते हैं।​

बजट 2026 की तारीख और अपेक्षाएं

केंद्रीय बजट 2026 फरवरी के पहले हफ्ते में पेश होने की संभावना है, जहां मिडिल क्लास को लक्षित राहत पैकेज की उम्मीदें चरम पर हैं। पिछले बजटों में स्टैंडर्ड डिडक्शन और टैक्स स्लैब में बदलाव ने करदाताओं को लुभाया था, लेकिन इस बार फोकस रिटायरमेंट और सेविंग्स पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि PFRDA और IRDAI की सिफारिशें सरकार के एजेंडे में शामिल हो सकती हैं।​

महंगाई और नौकरी बाजार की अनिश्चितता के बीच ये मांगें समयबद्ध हैं। टैक्सपेयर्स संगठनों ने चिट्ठियां भेजी हैं, जिसमें पुरानी पेंशन स्कीम की वापसी से लेकर NPS को आकर्षक बनाने तक के प्रस्ताव हैं। क्या सरकार इन पर अमल करेगी, ये बजट भाषण तय करेगा।​

पहली मांग: पेंशन पर टैक्स पूरी तरह खत्म

PFRDA ने NPS और SWP पेआउट्स को टैक्स-फ्री करने का सुझाव दिया है, जो रिटायरमेंट के बाद पेंशनधारकों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। वर्तमान में 60 साल बाद निकासी पर 60% टैक्स-फ्री है, लेकिन बाकी पर टैक्स लगता है। चेयरमैन डॉ. एस. रामन ने कहा, “पूरी पेंशन टैक्स-मुक्त हो तो करोड़ों लोग NPS में निवेश करेंगे।”​

ये बदलाव EPF और ग्रेच्युटी जैसी स्कीम्स के बराबर लाभ देगा। मिडिल क्लास फैमिली, जहां एक कमाने वाले पर कई निर्भर होते हैं, को इससे बड़ी राहत मिलेगी। पिछले साल NPS में 20% वृद्धि हुई, लेकिन टैक्स बाधा बनी रही।​

विशेषज्ञों के अनुसार, ये कदम सरकारी खजाने पर 10,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ डालेगा, लेकिन लंबे समय में सेविंग्स रेट बढ़ाएगा। रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी और प्राइवेट जॉबर्स दोनों इसका फायदा उठा सकेंगे।​

दूसरी मांग: बीमा प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन लिमिट बढ़े

सेक्शन 80C के तहत लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर 1.5 लाख की छूट मौजूदा है, लेकिन Deloitte रिपोर्ट में इसे 3 लाख करने की सिफारिश है। महंगाई से प्रीमियम बढ़े हैं, जबकि छूट सीमा जस की तस है। इससे हेल्थकेयर कवरेज बढ़ेगा और परिवार सुरक्षित रहेंगे।​

एन्युटी प्रोडक्ट्स पर पूरी राशि टैक्सेबल है, जबकि म्यूचुअल फंड्स पर EEE बेनिफिट मिलता है। IRDAI ने बजट में संतुलन की मांग की है। 2025 में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम 30% बढ़े, जो इसकी जरूरत बताता है।
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बीमा कंपनियां उम्मीद कर रही हैं कि ये बदलाव 5 करोड़ नई पॉलिसी लाएंगे। युवा प्रोफेशनल्स, जो SIP के साथ इंश्योरेंस जोड़ना चाहते हैं, को इससे प्रोत्साहन मिलेगा।​

तीसरी मांग: होम लोन ब्याज पर 2 लाख से ज्यादा छूट

पुराने टैक्स रिजीम में होम लोन पर सालाना 2 लाख ब्याज छूट मिलती है, जिसे नए रिजीम में भी लाने की मांग है। रियल एस्टेट सेक्टर ठप पड़ा है, और ये राहत घर खरीद को बढ़ावा देगी। RBI के आंकड़ों से लोन रेट 8.5% पर हैं, जो बोझ बढ़ाते हैं।​​

महिलाओं के नाम पर अतिरिक्त 50,000 रुपये छूट को 1 लाख करने की भी बात है। पहले घर खरीदने वालों के लिए स्टांप ड्यूटी में छूट का प्रस्ताव है। इससे मिडिल क्लास की 40% आबादी लाभान्वित होगी।

नौकरीपेशा लोग PPF, NSC, बच्चों की फीस जैसी डिडक्शन्स को जोड़कर टैक्स बचाना चाहते हैं। ये बदलाव अर्थव्यवस्था को रफ्तार देंगे।​

चौथी मांग: NPS टैक्स छूट 50,000 से 1 लाख रुपये हो

सेक्शन 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये छूट को दोगुना करने की चर्चा है। प्राइवेट सेक्टर में NPS अपनाने की दर मात्र 15% है, जो पब्लिक सेक्टर के 90% से कम है। ये बदलाव रिटायरमेंट कॉर्प्स को मजबूत करेगा।

PFRDA नए पेंशन प्रोडक्ट्स ला रहा है, जैसे फ्लेक्सिबल विड्रॉल। बजट में 80C लिमिट 2 लाख हो सकती है। 2025 में NPS AUM 10 लाख करोड़ पार कर गया।​

युवा जेनरेशन, जो PF पर निर्भर है, NPS को वैरायटी के रूप में देखेगी। इससे मार्केट लिंक्ड रिटर्न्स मिलेंगे।​

पांचवीं मांग: न्यूनतम पेंशन 1000 से 2500 रुपये हो

EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये है, जिसे 2500 करने की मांग 10 साल से है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप की बात कही। 6 करोड़ पेंशनभोगी इससे लाभ लेंगे।

स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 से 1 लाख और सीनियर सिटीजन के लिए 75,000 करने की उम्मीद। टैक्स स्लैब में 3 लाख तक जीरो टैक्स का विस्तार। ये कदम गरीबी रेखा के नीचे वालों को ऊपर उठाएंगे।

मिडिल क्लास पर टैक्स का मौजूदा बोझ

2025 में 8 करोड़ से ज्यादा टैक्सपेयर्स हैं, जिनका औसत बोझ 15% है। महंगाई 6% पर है, जबकि सैलरी ग्रोथ 8-10%। NPS, PPF जैसे टूल्स अपर्याप्त हैं। बजट 2026 में रिबेट 25,000 से 50,000 हो सकता है।​

पिछले बजटों से सबक: क्या बदलेगा?

2025 बजट में न्यू टैक्स रिजीम को डिफॉल्ट बनाया गया, लेकिन डिडक्शन्स कम थे। अब पुराने रिजीम को मजबूत करने की जरूरत। कोविड के बाद सेविंग्स रेट गिरा है।

विशेषज्ञ जैसे अरुचि शर्मा कहती हैं, “टैक्स रिफॉर्म्स से कंजम्पशन बढ़ेगा।” सरकार का फोकस Viksit Bharat पर है।

विशेषज्ञों की राय और संभावित प्रभाव

CA विमल मेहता: “पेंशन टैक्स-फ्री होने से NPS में 30% उछाल आएगा।” अर्थशास्त्री प्रो. राकेश मोहन: “लोन छूट से रियल्टी सेक्टर रिकवर होगा।” ये बदलाव GDP को 1% बूस्ट देंगे।

नुकसान: सरकारी रेवेन्यू पर 50,000 करोड़ असर, लेकिन लॉन्ग-टर्म गेन।

बजट 2026 से आम आदमी को क्या फायदा?

  • टैक्स सेविंग: सालाना 20-30 हजार बचत।
  • रिटायरमेंट सिक्योर: पेंशन फंड्स मजबूत।
  • घरेलू सपना: लोन आसान।
  • हेल्थ प्रोटेक्शन: इंश्योरेंस सस्ता।
  • इनकम ग्रोथ: ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम।​​

निष्कर्ष: इंतजार खत्म होने वाला है

बजट 2026 मिडिल क्लास के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। पेंशन, बीमा, लोन पर राहत से जीवन आसान बनेगा। अपडेट्स के लिए बने रहें। क्या आपको लगता है ये मांगें पूरी होंगी? कमेंट करें।
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