40 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल और मेटाबॉलिज़्म से जुड़े बदलाव आने लगते हैं। इस समय शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल घटने लगता है, जिससे हड्डियों, दिल और किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जहां कई महिलाएं स्किन और वजन पर ध्यान देती हैं, वहीं किडनी हेल्थ को अक्सर नज़रअंदाज कर देती हैं। लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी हमारे शरीर से टॉक्सिन्स और अतिरिक्त तरल पदार्थों को बाहर निकालने का काम करती है। यदि किडनी सही तरीके से काम न करे तो शरीर में यूरिया और अन्य हानिकारक तत्व जमा हो जाते हैं, जिससे शरीर में सूजन, थकान और यहां तक कि हार्ट फेल्योर का खतरा भी बढ़ सकता है।

40 की उम्र के बाद किडनी फेल होने के खतरे क्यों बढ़ जाते हैं?

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता यानी glomerular filtration rate (GFR) धीरे-धीरे कम होती जाती है। इसका मतलब है कि शरीर से अशुद्धियां निकालने की रफ्तार घटने लगती है। 40 के बाद शरीर की कोशिकाएं उतनी तेजी से रिपेयर नहीं होतीं, ब्लड फ्लो धीमा पड़ जाता है और हार्मोनल डिसबैलेंस के कारण किडनी पर और दबाव बढ़ता है।

इसके अलावा:

  • उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)
  • डायबिटीज (Diabetes)
  • मोटापा
  • अधिक दवाओं का सेवन
  • और पानी की कमी

ये सभी मिलकर 40 की उम्र के बाद किडनी रोगों के खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं।

1. कम पानी पीने की गलती – किडनी के लिए सबसे हानिकारक आदत

पानी किडनी का सबसे बड़ा साथी है। यह टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है और यूरिन के माध्यम से शरीर की सफाई करता है। कई महिलाएं कामकाज या ठंड के मौसम में पर्याप्त पानी नहीं पीतीं। इससे यूरिन गाढ़ा हो जाता है और स्टोन या इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ महिला को दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। यदि किडनी पहले से कमजोर है, तो डॉक्टर की सलाह से पानी की मात्रा तय करनी चाहिए।

2. बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर लेना

सर दर्द, पीठ दर्द या पीरियड पेन की वजह से महिलाएं अक्सर पेनकिलर दवाएं बार-बार ले लेती हैं। लेकिन इन्हीं दवाओं के अति सेवन से किडनी को नुकसान पहुंच सकता है। नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) ब्लड फ्लो को बाधित करते हैं और किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता को घटा देते हैं।

लंबे समय तक इन दवाओं का सेवन करने से kidneys के छोटे-छोटे फिल्टर धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं। यदि दर्द लगातार बना रहे, तो घरेलू उपाय या डॉक्टर द्वारा सलाह दी गई दवाओं का ही सेवन करें।https://thedbnews.in/3-january-2026-know-the-price-of-gold-today-what-is-the-rate-in-delhi-mumbai-chennai/

3. ज्यादा नमक वाला खाना

भारत में नमक का अत्यधिक सेवन एक आम आदत है। लेकिन अधिक नमक लेने से शरीर में सोडियम का लेवल बढ़ जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर हाई होता है और किडनी पर जोर पड़ता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एक व्यक्ति को दिनभर में अधिकतम 5 ग्राम (लगभग एक चम्मच) से ज्यादा नमक नहीं लेना चाहिए। जंक फूड, चिप्स, नमकीन और रेडी-टू-ईट प्रोडक्ट्स में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिसे नियंत्रित रखना जरूरी है।

4. ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज करना

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर, दोनों किडनी को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं। ब्लड शुगर के बढ़ने से रक्त में मौजूद ग्लूकोज किडनी की केशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। वहीं, हाई ब्लड प्रेशर से किडनी की रक्त धमनियां सख्त हो जाती हैं जिनसे ब्लड फिल्ट्रेशन धीमा पड़ जाता है।

डॉक्टर मानते हैं कि 40 की उम्र के बाद हर महिला को साल में एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) जरूर करवाना चाहिए। इससे समय रहते बीमारी का पता चल सकता है।

5. पेशाब रोककर रखना – छोटा लक्षण, बड़ा खतरा

अक्सर महिलाएं बाहर या ऑफिस में सुविधा न होने के कारण लंबे समय तक पेशाब रोककर रखती हैं। इससे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) का खतरा बढ़ जाता है। यह संक्रमण बार-बार होना किडनी तक पहुंच सकता है और इंफ्लेमेशन या फेल्योर का कारण बन सकता है।

किडनी एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि अगर पेशाब का दबाव महसूस हो, तो उसे तुरंत बाहर निकालें। लंबे समय तक रोकना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

किडनी हेल्थ को बेहतर रखने के लिए करें ये 5 जरूरी काम

  1. पर्याप्त पानी पिएं: दिनभर में 8–10 गिलास पानी जरूर लें।
  2. नमक और चीनी पर कंट्रोल करें: जंक फूड, सोडा, और प्रोसेस्ड फूड से परहेज करें।
  3. नियमित एक्सरसाइज करें: योग, वॉकिंग और मेडिटेशन किडनी सहित पूरे शरीर को डिटॉक्स करते हैं।
  4. संतुलित नींद लें: 7–8 घंटे की नींद शरीर और अवयवों को रिपेयर करती है।
  5. वार्षिक हेल्थ चेकअप कराएं: ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और किडनी फंक्शन की जांच जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना

दिल्ली के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. रचना सेन के अनुसार, “40 की उम्र के बाद महिलाओं को अपनी हेल्थ रूटीन पर खास ध्यान देना चाहिए। पानी पीने की मात्रा बढ़ाना, पेनकिलर से दूरी रखना और शुगर लेवल की निगरानी करना किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकता है।”

वहीं, डायटीशियन साक्षी शर्मा बताती हैं, “हमारा खान-पान और नींद सीधा किडनी हेल्थ से जुड़ा है। सही डाइट में हरी सब्जियां, मौसमी फल, ओट्स, और लो-सोडियम फूड शामिल होना चाहिए।”

ब्लड को फिल्टर

किडनी हमारे शरीर का फ़िल्टरिंग सिस्टम है, जो दिनभर में लगभग 150 लीटर ब्लड को फिल्टर करती है। अगर हम अपनी रोजमर्रा की आदतों में थोड़ी सी सावधानी बरतें, तो न सिर्फ किडनी फेल्योर से बच सकते हैं बल्कि लंबी उम्र तक फिट और एक्टिव रह सकते हैं।

याद रखें — किडनी की समस्या शुरुआत में दिखती नहीं है, लेकिन एक बार गंभीर हो जाए तो इलाज कठिन और खर्चीला होता है। इसलिए अपने शरीर के हर छोटे संकेत को गंभीरता से लें और समय पर जांच जरूर करवाएं।https://thedbnews.in/gujarat-vadodara-railway-colony-girlfriend-kills-fiance/

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