उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 में एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जलवा देखने को मिला। समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के समय की शिक्षा व्यवस्था पर तंज कसते हुए उन्होंने ‘बिस्मिल्लाह खां को फांसी क्यों?’ वाला मजेदार किस्सा सुनाया, जिस पर सदन में जोरदार ठहाके लगे। यह घटना 13 फरवरी 2026 को हुई, जब योगी जी राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान बोल रहे थे। सोशल मीडिया पर #YogiAdityanathKissa और #BismillahKhanFansi ट्रेंड कर रहा है।

किस्से का पूरा विवरण: सपा मंत्री की भूल ने मचाई खलबली

उत्तर प्रदेश विधानसभा बजट सत्र के दौरान CM योगी ने सपा शासनकाल का एक ऐसा किस्सा सुनाया जो सदन को हंसने पर मजबूर कर गया। उन्होंने बताया कि सपा सरकार में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के एक मंत्री को मुख्य अतिथि बनाया गया। जब आयोजकों ने मंत्री जी को बताया कि आज राम प्रसाद बिस्मिल का शहादत दिवस है, तो उन्होंने हैरानी से पूछा, “बिस्मिल्लाह खां को तो अभी पुरस्कार मिला था, उन्हें फांसी क्यों दे दी गई?”

मंत्री जी मंच पर पहुंचे तो भी यही बात दोहराई। नीचे बैठे किसी व्यक्ति ने सुधारने की कोशिश की, तो मंत्री ने उसे भाजपाई बता दिया और कार्यक्रम से भगा दिया। योगी जी ने कहा, “शिक्षा व्यवस्था को चौपट होना ही था, जहां आपका शिक्षा मंत्री बिस्मिल्लाह खां और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के बीच फर्क नहीं समझ पा रहा था।” इस किस्से पर सदन में ठहाके गूंजे, यहां तक कि विपक्षी सदस्य भी हंस पड़े।

राम प्रसाद बिस्मिल कौन थे? क्रांतिकारी की अमर गाथा

पंडित राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी कवि थे। उनका जन्म 11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ। मात्र 30 वर्ष की उम्र में 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें फांसी दे दी। बिस्मिल काकोरी कांड और मैनपुरी षड्यंत्र में शामिल थे।

उन्होंने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रसिद्ध कविता “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” आज भी प्रेरणा स्रोत है। बिस्मिल ने 11 पुस्तकें लिखीं, जिनसे प्राप्त धन से हथियार खरीदे। 1916 में उन्होंने ‘मातृवेदी’ नामक क्रांतिकारी संगठन बनाया। उनका अंतिम संस्कार राप्ती नदी के राजघाट पर हुआ। बिस्मिल हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे।

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां: शहनाई के जादूगर, भारत रत्न सम्मानित

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां शहनाई वादन के उस्ताद थे, जिन्होंने इस वाद्ययंत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनका जन्म 21 मार्च 1916 को बिहार के डुमरांव में हुआ। बचपन में काशी विश्वनाथ मंदिर में उनके मामा अली बख्श विलायती से उन्होंने शहनाई सीखी। गंगा घाट पर क्रिम खाते हुए रियाज करते थे।​

2001 में उन्हें भारत रत्न मिला। वे हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे – काशी में शहनाई बजाते, नमाज पढ़ते, त्योहार मनाते। उनके परिवार में 66 सदस्य थे, जिन्हें वे संभालते। रोज 6 घंटे रियाज करते। 14 वर्ष की उम्र में इलाहाबाद संगीत समिति में पहला प्रदर्शन किया। लोक धुनों जैसे बजरी, झूला, चैती में महारत।​​

योगी आदित्यनाथ का दूसरा तंज: मंत्री को अधिकारी न पहचान सका

CM योगी ने एक और किस्सा सुनाया। गोरखपुर सांसद रहते रेलवे स्टेशन पर अधिकारियों से मिले। माध्यमिक शिक्षा मंत्री आए, तो योगी जी ने अधिकारी से पूछा – क्या ये मंत्री जी के साथ हैं? अधिकारी बोला, “कौन मंत्री?” मंत्री ने खुद कहा, “मैं 6 महीने से सचिवालय नहीं गया।” योगी ने इसे सपा सरकार की अव्यवस्था का प्रतीक बताया।

UP बजट सत्र 2026 का बैकग्राउंड: विकास और बहस का केंद्र

यह किस्सा UP विधानसभा के बजट सत्र 2026 के दौरान आया। योगी सरकार ने 9.12 लाख करोड़ का बजट पेश किया। कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण पर फोकस। छात्राओं के लिए स्कूटी पर 400 करोड़। पूर्वांचल-बुंदेलखंड विकास पर जोर। विपक्ष ने राज्यपाल अभिभाषण पर हंगामा किया।​​

राजनीतिक प्रभाव: सपा पर हमला, BJP का मजबूत संदेश

योगी का यह किस्सा सपा की पुरानी सरकार पर सीधा हमला था। शिक्षा व्यवस्था में अव्यवस्था उजागर। सदन में हंसी के बाद बहस शांत हुई। सोशल मीडिया पर वायरल, BJP समर्थक शेयर कर रहे। विपक्ष ने खंडन किया, लेकिन वीडियो वायरल।​

सांस्कृतिक महत्व: बिस्मिल-बिस्मिल्लाह नाम का भ्रम क्यों?

दोनों महान थे, लेकिन अलग क्षेत्र। बिस्मिल क्रांतिकारी, बिस्मिल्लाह संगीतकार। नाम समानता से भ्रम। योगी ने एकता का संदेश दिया। आज भी प्रासंगिक।​

सोशल मीडिया रिएक्शन: मीम्स और वायरल वीडियो

YouTube पर वीडियो को लाखों व्यूज। ट्विटर पर मीम्स। #UPVidhanSabha ट्रेंडिंग। यूजर्स बोले, “योगी जी का स्टाइल कमाल!”​

शिक्षा व्यवस्था में सुधार: योगी सरकार के प्रयास

योगी सरकार ने शिक्षा पर जोर। स्कूलों में सुधार, नई भर्तियां। सपा काल की कमियों पर तंज। बजट में शिक्षा को प्राथमिकता।

हंसी के बीच गंभीर संदेश

यह किस्सा न सिर्फ हंसाया, बल्कि सपा की कमियों पर रोशनी डाली। UP की राजनीति में योगी का जलवा बरकरार। ज्यादा अपडेट्स के लिए फॉलो करें।
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