मेरठ हथियार फैक्ट्री भंडाफोड़: घर के तहखाने में 60 हजार की पिस्टलें बना रहे 11 शातिर, पुलिस ने धर दबोचा!

मेरठ, 27 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस ने एक ऐसी साजिश का पर्दाफाश किया है, जो पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। ग्राम अल्लीपुर स्थित एक साधारण दिखने वाले मकान के तहखाने में अवैध हथियार बनाने की पूरी फैक्ट्री संचालित हो रही थी। मेरठ पुलिस की स्पेशल टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की और 11 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। ये गिरोह 60 हजार रुपये की ऊंची कीमत पर देशी पिस्टलें बेच रहा था, जो अपराध की दुनिया में तेजी से फैल रही थी।

यह कार्रवाई मेरठ एसएसपी डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में की गई। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री इतनी सफाई से छिपाई गई थी कि बाहर से कोई शक भी नहीं होता। तहखाने में मशीनें, कच्चा माल और दर्जनों तैयार हथियार मिले। यह घटना न सिर्फ मेरठ बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में अवैध हथियार तस्करी के नेटवर्क को झकझोर रही है। स्थानीय निवासियों ने पुलिस की सराहना की है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसे गुप्त ठिकाने कैसे पनप जाते हैं?
मेरठ हथियार फैक्ट्री भंडाफोड़ की यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। #मेरठपुलिस और #अवैधहथियार जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
कैसे चला रहा था गिरोह अपना काला कारोबार? पूरी साजिश का खुलासा
पकड़े गए मुख्य आरोपी रवि उर्फ राजा (35 वर्ष) ने पूछताछ में कई राज उगले। वह ग्राम अल्लीपुर का ही निवासी था और पिछले दो साल से इस फैक्ट्री को चला रहा था। उसके साथी दिल्ली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के थे। गिरोह का modus operandi बेहद चालाकी भरा था। वे मकान के ऊपरी हिस्से में सामान्य परिवार का ढोंग रचते थे, जबकि तहखाने को मोटी दीवारों और गुप्त दरवाजे से सील कर रखा था।
फैक्ट्री में चाइनीज मशीनों का इस्तेमाल हो रहा था, जो लोहे की पाइपों से पिस्टलें तैयार करती थीं। एक पिस्टल बनाने में मात्र 4-5 घंटे लगते थे, जबकि बिक्री मूल्य 60 हजार रुपये था। लाभ का आंकड़ा चौंकाने वाला है – प्रति पिस्टल 40-45 हजार का मुनाफा! गिरोह ने पिछले एक साल में 200 से ज्यादा पिस्टलें बेच चुका था। खरीदार मुख्य रूप से अपराधी, गुंडे और अंतरराज्यीय तस्कर थे।
पुलिस ने बरामदगी में शामिल किया:
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15 तैयार देशी पिस्टलें (9 एमएम कैलिबर)।
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25 खाली मैगजीन और 100 गोली के कारतूस।
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2 हाई-स्पीड ड्रिल मशीनें और वेल्डिंग उपकरण।
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500 किलो कच्चा लोहा और रसायनिक पदार्थ।
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5 लाख रुपये नकद और 2 लग्जरी बाइकें।
एसएसपी ने कहा, “यह गिरोह मेरठ को हथियारों का हब बनाने की फिराक में था। हमारी टीम ने 48 घंटे की निगरानी के बाद दबिश दी।”
मेरठ में अवैध हथियारों का काला इतिहास: पुरानी घटनाओं से सबक
मेरठ लंबे समय से अपराध का केंद्र रहा है। 2024 में भी यहां एक फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ था, जिसमें 8 पिस्टलें बरामद हुई थीं। लेकिन इस बार का मामला सबसे बड़ा है। उत्तर प्रदेश में अवैध हथियार तस्करी एक गंभीर समस्या है। एनसीआरबी डेटा के अनुसार, 2025 में यूपी में 1,200 से ज्यादा हथियार संबंधी मामले दर्ज हुए। मेरठ, गाजियाबाद और मुरादाबाद जैसे जिले सबसे संवेदनशील हैं।
स्थानीय पत्रकारों से बातचीत में पता चला कि अल्लीपुर गांव में कई संदिग्ध मकान हैं। ग्रामीणों ने शिकायत की कि रातों में मशीनों की आवाज आती थी, लेकिन डर के मारे चुप रहते थे। अब प्रशासन ने पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है।
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गिरफ्तार 11 शातिरों का बैकग्राउंड: कौन हैं ये अपराधी?
पकड़े गए आरोपियों की लिस्ट:
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रवि उर्फ राजा (मुख्य सरगना): पूर्व ऑटो ड्राइवर, 5 पुराने केस।
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मोहन लाल (मशीन ऑपरेटर): सहारनपुर से, हथियार बनाने का एक्सपर्ट।
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अजय त्यागी: दिल्ली से सप्लायर, कच्चा माल लाता था।
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विक्रम सिंह: बिक्री का इंचार्ज, अपराधियों से संपर्क।
5-11: अन्य साथी, ज्यादातर ग्रामीण बैकग्राउंड।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर कोड वर्ड्स से सौदे करता था। एक पिस्टल की डिलीवरी के लिए ‘नया फोन’ कोड यूज होता था। पुलिस साइबर सेल अब उनके डिजिटल फुटप्रिंट ट्रैक कर रही है।
कानूनी कार्रवाई और भविष्य की चुनौतियां
सभी 11 पर आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 25/27, एक्सप्लोसिव एक्ट और जीएसटी फ्रॉड के तहत केस दर्ज। कोर्ट ने 14 दिन की रिमांड दी है। यूपी डीजीपी ने इसे मॉडल ऑपरेशन बताया। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध हथियार नेटवर्क को जड़ से उखाड़ना चुनौतीपूर्ण है।
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पुलिस की सिफारिशें: गांवों में सीसीटीवी लगाना, इंटेलिजेंस नेटवर्क मजबूत करना।
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सामाजिक प्रभाव: युवाओं को अपराध से बचाने के लिए जागरूकता कैंप।
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आंकड़े: यूपी में 2026 में अब तक 300 हथियार गिरोह पकड़े गए।
अपराध पर अंकुश लगाने के उपाय: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
क्रिमिनोलॉजिस्ट डॉ. अनिल शर्मा ने कहा, “आर्थिक तंगी और बेरोजगारी ऐसे गिरोहों को जन्म देती है। सरकार को स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम तेज करने चाहिए।” मेरठ के पूर्व एसएसपी ने सुझाव दिया कि बॉर्डर चेकिंग स्ट्रिक्ट हो।
स्थानीय विधायक ने विधानसभा में मामला उठाने का ऐलान किया। यह घटना मेरठ अवैध हथियार कार्रवाई को राष्ट्रीय चर्चा में ला रही है।
जनता की प्रतिक्रिया: सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी
ट्विटर पर यूजर्स लिख रहे हैं: “मेरठ पुलिस सलाम! ऐसे ठिकानों पर नजर रखो।” फेसबुक ग्रुप्स में वीडियो शेयर हो रहे। लेकिन कुछ सवाल भी: “क्या ये हथियार गैंगवार के लिए थे?”
अपराध मुक्त मेरठ का संकल्प
यह भंडाफोड़ मेरठ को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। पुलिस का कहना है कि और गिरोहों पर नजर है। नागरिकों से अपील: संदिग्ध गतिविधि पर 112 पर कॉल करें। अवैध हथियार तस्करी को कुचलने का अभियान जारी रहेगा।
गाजीपुर मामले पर कांग्रेस-सपा सोशल मीडिया हैंडल पर FIR, भ्रामक पोस्ट का आरोप
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