हरिओम की हत्या उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के ऊंचाहार थाना क्षेत्र में एक बर्बर भीड़ हिंसा का परिणाम थी, जहां उन्हें चोर या ड्रोन चोर समझकर करीब चार घंटे तक लाठी-डंडों और बेल्ट से पीटा गया, और जब वे पानी मांगे, तो उनके चेहरे पर पानी फेंक दिया गया. घटना 2 अक्टूबर 2025 की रात को हुई, जब हरिओम अपनी ससुराल नई बस्ती, ऊंचाहार जा रहे थे.

घटना का विवरण

हरिओम को पहले गदागंज इलाके के गोविंदपुर माधव स्थित ढाबे पर चोर समझकर ग्रामीणों ने पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुंची. वह पैदल चलते हुए रात करीब एक बजे डाड़ेपुर मजरे ईश्वरदासपुर गांव पहुंचे, जहां एक भीड़ ने उन पर हमला कर दिया. उन्हें एक बजे से लेकर सुबह चार बजे तक पीटा गया, और घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि हरिओम ने खुद को बचाने के लिए राहुल गांधी का नाम लिया, जिसके बाद उनके साथ हिंसा और बढ़ गई.

पुलिस कार्रवाई और आरोपित

घटना के बाद पुलिस ने अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है. प्रारंभ में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था, बाद में चार अन्य को भी गिरफ्तार किया गया. इसके अलावा, पुलिस की लापरवाही के आरोप में पांच पुलिसकर्मियों, जिसमें एक एसआई और एक दरोगा शामिल हैं, को निलंबित कर दिया गया है. एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने घटना को लेकर एक्शन लेते हुए आरोपियों पर रासुका लगाने की बात कही है.

राजनीतिक प्रतिक्रिया

हरिओम की हत्या ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है, खासकर क्योंकि रायबरेली कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है. कांग्रेस नेतृत्व ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और इसे “संविधान और इंसानियत की हत्या” बताया है. राहुल गांधी ने पीड़ित परिवार से फोन पर बात की और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया. NSUI ने दिल्ली में यूपी भवन के बाहर प्रदर्शन किया और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की.

आरोपी कौन-कौन हैं

हरिओम हत्या मामले में पुलिस ने अब तक कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से पांच लोग पहले ही गिरफ्तार किए गए थे, जिनके नाम हैं: वैभव सिंह, विपिन कुमार, सुरेश कुमार, विजय मौर्य, और सहदेव। बाद में चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनके नाम हैं: शिवप्रसाद अग्रहरि, लल्ली पासी, आशीष पासी, और सुरेश गुप्ता।

इन आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और गैंगस्टर एक्ट के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह मामला जातिगत नहीं बल्कि गलतफहमी पर आधारित था, जिसमें आरोपियों ने हरिओम को चोर समझकर पीटा और उसकी हत्या कर दी। इसके अलावा, पुलिस अब भी कई अन्य संदिग्धों की पहचान कर रही है और आगे गिरफ्तारी की संभावना है।

मुख्य आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और पुलिस के लेहाज से लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया है.

हरिओम हत्याकांड की ताजा पुलिस रिपोर्ट क्या कहती है

हरिओम हत्याकांड की ताजा पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने अब तक कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इनमें से पांच मुख्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया गया था और मंगलवार देर शाम चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि घटना के दौरान हरिओम मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और भीड़ ने उन्हें पीट-पीटकर हत्या कर दी।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि घटना के समय पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। डायल-112 पर सूचना मिलने के बाद भी पुलिसकर्मी मौके पर उतरकर पूछताछ नहीं कर पाए और आरोपितों की पहचान के बावजूद भीड़ को नहीं रोका गया। इसके चलते गदागंज थाने के हल्का दरोगा प्रेम कुमार और कांस्टेबल जयसिंह यादव को निलंबित कर दिया गया है।

एसपी ने कहा कि वारदात में शामिल सभी आरोपियों की पहचान की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इसके अलावा आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। घटना के कारण आसपास के गांवों में लोग हैरान और पुलिस की कार्यवाही को लेकर नाराज हैं।

पुलिस की कार्रवाई के बाद भी परिवार और स्थानीय लोग न्याय की मांग कर रहे हैं, जिसे लेकर स्वास्थ्य और प्रशासनिक जांच जारी है.

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