महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और एनसीपी प्रमुख अजित पवार का 29 जनवरी 2026 को बारामती में अंतिम संस्कार किया गया। बेटे पार्थ पवार ने भावुक क्षणों में मुखाग्नि दी, जबकि शहर ने नम आंखों से ‘दादा’ को विदाई दी। यह घटना पूरे देश में शोक की लहर ला रही है।

अंतिम सफर की शुरुआत: शवयात्रा में उमड़ा जनसैलाब

अजित पवार का पार्थिव शरीर मंगलवार सुबह पुणे से बारामती पहुंचा। यहां से भव्य शवयात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों समर्थक शामिल हुए। शहर के मुख्य मार्गों – राजर्षि शाहू महाराज चौक से होते हुए स्मशान घाट तक – जुलूस चला। लोग फूल बरसाते रहे और ‘अजित दादा अमर रहें’ के नारे लगाते रहे।

शवयात्रा में एनसीपी के अलावा महायुति और महाविकास अघाड़ी के नेता भी नजर आए। बारामती की सड़कें फूलों की होली से सजीं, जो अजित पवार के 40 वर्षों के राजनीतिक योगदान को दर्शाती हैं। स्थानीय व्यापारियों ने दुकानें बंद रखीं, जबकि युवा कार्यकर्ता तिरंगे में लिपटे शव को कंधा देने को उत्सुक दिखे। यह दृश्य बारामती के विकास पुरुष को अलविदा कहने का प्रतीक बन गया।

पार्थ पवार का भावुक क्षण: मुखाग्नि देकर टूट गए बेटे

स्मशान घाट पर पार्थ पवार ने पिता को मुखाग्नि दी। पार्थ की आंखें नम थीं, और वे बार-बार पिता को नमन करते नजर आए। अंतिम संस्कार वैदिक रीति से संपन्न हुआ, जिसमें पंडितों ने मंत्रोच्चार किया। पार्थ ने समर्थकों से कहा, “दादा हमेशा हमारे साथ हैं। उनका आशीर्वाद हमें दिशा देगा।”

इस दौरान पार्थ ने पिता के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अजित पवार ने हमेशा परिवार और समाज को प्राथमिकता दी। भावुक पार्थ ने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दिया। यह क्षण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जहां #AjitPawarFuneralLIVE ट्रेंड कर रहा है। लाखों लोग ऑनलाइन श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

बारामती में शोक की लहर: शहर ठप, सन्नाटा छाया

बारामती शहर आज पूरी तरह ठप रहा। स्कूल-कॉलेज बंद रहे, सरकारी कार्यालयों में छुट्टी घोषित की गई। सड़कों पर सन्नाटा पसर गया, जबकि शोक सभाओं का आयोजन हुआ। स्थानीय लोग घरों के बाहर खड़े होकर शवयात्रा को सलामी देते रहे। महिलाएं घरों से भजन गाती रहीं।

अजित पवार को बारामतीवासी ‘दादा’ कहते थे। उन्होंने शहर को सिंचाई, शिक्षा और स्वास्थ्य का हब बनाया। नहर प्रोजेक्ट्स से किसानों को फायदा पहुंचा। उनकी विदाई ने पूरे जिले को गमगीन कर दिया। ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग पैदल चलकर आए। यह शोक शहर की एकजुटता को दिखाता है।

राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी: दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि

अंतिम संस्कार में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शरद पवार समेत कई नेता पहुंचे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शोक संदेश जारी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, “अजित पवार का योगदान अविस्मरणीय है।”

एनसीपी (अजित पवार गुट) के नेता जयंत पाटिल ने भावुक होकर कहा, “हमारा मार्गदर्शक चला गया।” भाजपा के सुधीर मुनगंटीवार ने उनके सहयोग की सराहना की। विपक्षी दलों ने भी एकजुटता दिखाई। यह दृश्य महाराष्ट्र राजनीति के बदलते दौर को इंगित करता है। नेताओं ने पार्थ को भविष्य का नेतृत्व सौंपा।

अजित पवार का राजनीतिक सफर: बारामती से उपमुख्यमंत्री तक

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को पुणे में हुआ। वे शरद पवार के भतीजे थे। 1991 में बारामती से पहली बार विधायक बने। लगातार 8 बार विधायक चुने गए। 1999-2004 तक मंत्री रहे। 2012-2019 तक उपमुख्यमंत्री के रूप में सेवा दी।

एनसीपी विभाजन के बाद उन्होंने नई पार्टी बनाई। 2019 में महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। सिंचाई घोटाले में नाम आने के बावजूद वे मजबूत लौटे। बारामती को उन्होंने ‘महाराष्ट्र का स्विट्जरलैंड’ बनाया। साखर इंडस्ट्री, कोऑपरेटिव बैंकों में उनका योगदान ऐतिहासिक है। उन्होंने 1000 किमी नहरें बनवाईं।

विकास कार्य: बारामती मॉडल की नींव रखी दादा ने

अजित पवार ने बारामती को मॉडल शहर बनाया। कृषी विद्यापीठ, हॉस्पिटल और स्कूल स्थापित किए। जलयुक्त शिवार योजना में अग्रणी भूमिका निभाई। किसानों को ड्रिप इरिगेशन से जोड़ा। सोलर पार्क और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स शुरू किए।

शिक्षा क्षेत्र में दादा पाटील महाविद्यालय प्रसिद्ध है। स्वास्थ्य के लिए सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनवाया। ग्रामीण विकास में 500 करोड़ के प्रोजेक्ट पूरे किए। बारामती एग्रीकल्चरल एग्जिबिशन उनकी देन है। ये कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगे।

पारिवारिक जीवन: पार्थ को संभाला राजनीतिक विरासत

अजित पवार की पत्नी सुनीता पवार सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। बेटे पार्थ पवार युवा नेता हैं। उन्होंने बारामती से विधानसभा लड़ी। पार्थ को पिता ने राजनीति सिखाई। परिवार ने हमेशा जनसेवा को प्राथमिकता दी। सुनीता ने अंतिम संस्कार में भी संयम बरता।

पार्थ अब एनसीपी का चेहरा बनेंगे। उन्होंने कहा, “पिताजी के सपनों को पूरा करूंगा।” परिवार ने शोक में भी मजबूती दिखाई। यह विरासत बारामती की राजनीति को नई दिशा देगी। सोशल मीडिया पर पार्थ को समर्थन मिल रहा है।

राष्ट्रीय प्रभाव: महाराष्ट्र राजनीति पर असर

अजित पवार के निधन से एनसीपी कमजोर हुई। महायुति सरकार स्थिर रहेगी, लेकिन विपक्ष मजबूत हो सकता है। शरद पवार गुट इसका फायदा उठाएगा। विधानसभा चुनावों में बदलाव आएंगे। बारामती सीट पर पार्थ मजबूत दावेदार हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना महाराष्ट्र को दोबारा एकजुट करेगी। मोदी सरकार ने सहानुभूति दिखाई। राष्ट्रीय स्तर पर अजित पवार को सहयोगी माना जाता था। उनका निधन केंद्र-राज्य संबंधों को प्रभावित करेगा। भविष्य में नई गठबंधन संभावनाएं बनेंगी।

सोशल मीडिया पर ट्रेंड: #AjitPawarKiJai वायरल

ट्विटर पर #AjitPawarFuneralLIVE टॉप ट्रेंड है। लाखों पोस्ट में श्रद्धांजलि। फेसबुक लाइव पर शवयात्रा देखी गई। इंस्टाग्राम रील्स में यादें शेयर हो रही हैं। युवा पीढ़ी दादा के वीडियो देख रही।

यूट्यूब चैनलों पर लाइव कवरेज। न्यूज चैनल एनडीटीवी, जी न्यूज ने विशेष बुलेटिन चलाए। सोशल मीडिया ने शोक को राष्ट्रीय बनाया। मीम्स से बचते हुए सम्मानजनक पोस्ट ही वायरल हो रहे। यह डिजिटल युग में शोक का नया रूप है।

भविष्य की राजनीति: पार्थ पवार का उदय

पार्थ पवार अब अजित पवार की विरासत संभालेंगे। वे युवा चेहरा हैं। बारामती से उनकी पकड़ मजबूत। एनसीपी में नई ऊर्जा लाएंगे। महायुति में उनकी भूमिका बढ़ेगी। विश्लेषक कहते हैं, पार्थ उपमुख्यमंत्री बन सकते हैं।

बारामती मॉडल को statewide फैलाएंगे। युवा वोटरों पर फोकस। डिजिटल कैंपेन चलाएंगे। परिवार का राजनीतिक सफर जारी रहेगा। अजित पवार की नीतियां अपनाएंगे। यह बदलाव महाराष्ट्र को नई दिशा देगा।

अन्य राज्यों से संदेश: राष्ट्रीय शोक

कर्नाटक, गुजरात से नेता पहुंचे। राहुल गांधी ने शोक व्यक्त किया। ममता बनर्जी ने ट्वीट किया। दक्षिण भारत में भी श्रद्धांजलि सभाएं। पड़ोसी राज्यों में शोक दिवस घोषित। यह अजित पवार के राष्ट्रीय प्रभाव को दिखाता है।

संघ परिवार ने भी श्रद्धांजलि दी। किसान संगठनों ने नमन किया। बॉलीवुड सितारों ने पोस्ट शेयर किए। खेल जगत ने सलामी दी। यह व्यापक शोक राष्ट्रीय एकता दर्शाता है।

स्वास्थ्य कारण: अचानक निधन का सदमा

अजित पावर को हार्ट अटैक आया। पुणे हॉस्पिटल में भर्ती थे। डॉक्टरों ने प्रयास किया, लेकिन निधन हो गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामान्य। परिवार ने गोपनीय रखा। राजनीतिक हलकों में सदमा।

उनकी फिटनेस प्रसिद्ध थी। योग और वॉकिंग करते थे। फिर भी स्वास्थ्य चेतावनी। नेताओं को सलाह: नियमित चेकअप कराएं। यह घटना जागरूकता बढ़ाएगी।

स्मृति सभा और कार्यक्रम: विरासत को संरक्षित

एनसीपी 7 दिनों का शोक घोषित करेगी। बारामती में स्मृति सभा। पुणे में कार्यक्रम। पुस्तक लिखी जाएगी। डॉक्यूमेंट्री बनेगी। स्टैच्यू लगेगा। ये कदम यादें ताजा रखेंगे।

शिक्षा संस्थानों में लेक्चर सीरीज। किसान सम्मेलन में श्रद्धांजलि। युवा विंग एक्टिव होगा। यह निरंतरता सुनिश्चित करेगा। अजित पवार अमर रहेंगे।

अमर विरासत

अजित पवार की विदाई दुखद है। लेकिन उनकी विरासत जीवित रहेगी। बारामती चमकता रहेगा। पार्थ नई मिसाल बनेंगे। महाराष्ट्र आगे बढ़ेगा। शोक में एकजुट रहें। 

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