अरविंद केजरीवाल को केंद्र सरकार ने दिल्ली के लोधी एस्टेट में टाइप-7 श्रेणी का नए सरकारी बंगला आवंटित कर दिया है। यह बंगला 95 लोधी एस्टेट में है और इसे पाने के लिए केजरीवाल को लगभग एक साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें यह लग्जरी बंगला मिला है।

टाइप-7 बंगला सरकारी आवास की दूसरी सबसे बड़ी श्रेणी माना जाता है। केजरीवाल के पास अब यह बंगला राष्ट्रीय पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में है, भले ही वे वर्तमान में मंत्री या विधायक न हों। उनके पूर्व सरकारी बंगले को अब स्टेट गेस्ट हाउस बनाने की तैयारी की जा रही है। केजरीवाल ने 2024 में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, तब से वे इस बंगले के लिए संघर्ष कर रहे थे.

95 लोधी एस्टेट का इतिहास

  • लोधी एस्टेट का नाम लोधी वंश से पड़ा है, जो 15वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत पर शासन करता था। यह वंश बहलोल लोदी ने स्थापित किया था और इसका शासनकाल 1451 से 1526 तक रहा था।
  • लोधी एस्टेट को ब्रिटिश राज के बाद विकसित किया गया था, और यह क्षेत्र दिल्ली के केंद्रीय सरकारी और राजनयिक आवासों में से एक है।
  • इस इलाके में कई ऐतिहासिक और आधुनिक संरचनाएं हैं, जिसमें प्रमुख रूप से लोधी गार्डन शामिल है, जो लोधी वंश के मकबरों और भव्य बागानों के लिए प्रसिद्ध है।
  • 95 लोधी एस्टेट में कई प्रमुख व्यक्तियों के बंगले हैं, और यह भारत के राजनीतिक और प्रशासनिक महत्वपूर्ण केंद्रों के करीब स्थित है।

लोधी एस्टेट की विशेषताएं

  • यह क्षेत्र दिल्ली के दक्षिण-केन्द्रीय भाग में है और मुख्यत: सरकारी अधिकारियों के लिए आवास प्रदान करता है।
  • इस इलाके का निर्माण स्वतंत्रता के बाद हुआ, जिसमें अमेरिकी वास्तुकार जोसेफ एलेन स्टीन की डिज़ाइन भी शामिल थी, जिनके कारण इसे ‘स्टीनाबाद’ भी कहा जाता है।
  • लोधी गार्डन और आसपास की हरियाली इस इलाके को दिल्ली के हरे-भरे और ऐतिहासिक हिस्सों में गिनाती है।

संक्षेप में, अरविंद केजरीवाल का नया बंगला इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण सरकारी आवास क्षेत्र में है जो दिल्ली की राजनीतिक और ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है। यह बंगला 95 लोधी एस्टेट, लोधी गार्डन के पास स्थित है, जो लोधी वंश की स्मृति और ब्रिटिश तथा आधुनिक वास्तुकला का संगम है.

केंद्र ने आवंटन का औपचारिक कारण क्या बताया

केंद्र सरकार ने अरविंद केजरीवाल को टाइप-7 बंगला आवंटित करने का औपचारिक कारण यह बताया कि वे आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं, और राष्ट्रीय पार्टियों के प्रमुखों को सरकारी आवास का प्रावधान होता है। इसके तहत, दिल्ली की दिल्ली हाईकोर्ट की दबाव और कड़ी सलाह पर यह निर्णय लिया गया।

यह आवंटन 2014 की भूमि निदेशालय की नीति के अनुसार किया गया है, जो राष्ट्रीय पार्टियों के अध्यक्षों या संयोजकों को आवास प्रदान करती है, हालांकि इसमें बंगले के प्रकार का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। केजरीवाल के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि ऐतिहासिक रूप से राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्षों को टाइप-VII बंगला मिलता रहा है, और उन्हें इससे कम श्रेणी का बंगला नहीं दिया जाना चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र की देरी पर नाराजगी जताई और पारदर्शिता बनाए रखने को कहा। मार्च 2025 में कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वे तय समय में उचित बंगला आवंटित करें। अंततः कोर्ट के आदेश और केंद्र की देरी के बाद, 95, लोधी एस्टेट का टाइप-7 बंगला केजरीवाल को उनके पद के सम्मान में आवंटित किया गया। यह आवंटन राजनीतिक आवास नीति की पारदर्शिता का प्रतीक माना गया। केंद्र ने इसे केवल केजरीवाल की व्यक्तिगत सुविधा नहीं बल्कि राष्ट्रीय पार्टियों के नेताओं के लिए स्पष्ट और निष्पक्ष नीति की आवश्यकता के रूप में देखा गया.

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