प्रयागराज के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का विवाद चरम पर पहुंच गया है। उन्होंने पवित्र स्नान से इनकार करते हुए दो सख्त शर्तें रखी हैं। यह रार लाखों श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।​

अविमुक्तेश्वरानंद का स्नान बहिष्कार: दो शर्तों पर अड़ी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक उनकी शर्तें पूरी नहीं होंगी, वे संगम स्नान नहीं करेंगे। पहली शर्त है जूना अखाड़े को मुख्य स्नान का समय पहले आवंटित किया जाए। दूसरी शर्त मेला प्रशासन द्वारा जारी समय-सारणी में संशोधन। मौनी अमावस्या पर यह विवाद भड़का, जब उनके रथ को रोका गया।​​

यह घटना 30 जनवरी 2026 को फिर सुर्खियों में है। स्वामी जी ने प्रशासन को ‘लठैत’ और ‘गुंडा’ तक कहा। उनके समर्थकों के साथ धक्का-मुक्की हुई, जिससे तनाव बढ़ा। प्रयागराज DM ने बातचीत का भरोसा दिया है।​

माघ मेला विवाद की पूरी समयरेखा

माघ मेला 2026 की शुरुआत शांतिपूर्ण हुई, लेकिन मौनी अमावस्या पर भूचाल आ गया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान को जा रहे थे। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने रथ रोक दिया। समर्थकों ने विरोध किया, पुलिस कार्रवाई हुई।

स्वामी जी ने आरोप लगाया कि उन्हें स्नान से रोका गया। इसके बाद वे धरने पर बैठे। 27 जनवरी को बिना स्नान मेला छोड़कर वाराणसी चले गए। 28 जनवरी को धरना समाप्ति की घोषणा हुई। अब माफी की बात चल रही है।

प्रशासन ने शंकराचार्य पद के दावे पर नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट केस का हवाला दिया। स्वामी जी ने इसे अदालत अवमानना बताया। ज्योतिष्पीठ विवाद फिर उभरा।

दो शर्तें क्या हैं? विस्तार से समझें

पहली शर्त: अखाड़ा परिषद की समय-सारणी में जूना अखाड़ा पहले स्नान करे। परंपरा के अनुसार यह प्रथा रही है। स्वामी जी इसे तोड़ने को अपमान बता रहे हैं।

दूसरी शर्त: चारों शंकराचार्यों के लिए प्रोटोकॉल तय हो। लिखित माफी मांगी गई। योगीराज सरकार ने कहा कि प्रशासन माफी को तैयार है।

ये शर्तें धार्मिक परंपराओं की रक्षा का सवाल उठाती हैं। स्वामी जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह साफ हुआ।

प्रशासन का रुख: माफी और नोटिस का दोहरा चेहरा

मेला प्राधिकरण ने नोटिस चस्पा किया। शंकराचार्य होने का स्पष्टीकरण मांगा। स्वामी जी ने कहा कि महाकुंभ स्मारिका में उन्हें शीर्षक दिया गया था। गोरक्षा बोलने पर नोटिस आया।

अब माफी की खबरें हैं। DM ने कहा कि शंकराचार्य पूर्णिमा तक रहेंगे। CM योगी के बयान पर पलटवार हुआ। विवाद थमने की उम्मीद।

प्रयागराज मेला अधिकारियों ने जमीन रद्द करने की धमकी दी। लेकिन बातचीत जारी है।

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कौन हैं?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिष्पीठाधीश्वर हैं। जूना अखाड़े से जुड़े। हिंदू परंपराओं के रक्षक। वासुदेवानंद से पद विवाद। सुप्रीम कोर्ट में लंबित।

पहले हरिद्वार कुंभ में स्नान क्रम पर लड़े। गोरक्षा, राम मंदिर पर मुखर। सोशल मीडिया पर सक्रिय। लाखों अनुयायी।

उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस वायरल। ‘हिंदू कायर, मुसलमान धन्य’ बयान सुर्खियां बटोरा।

मेले पर प्रभाव: श्रद्धालुओं की चिंता

लाखों भक्त संगम स्नान के इंतजार में। विवाद से माहौल खराब। सुरक्षा चिंता बढ़ी। योग गुरु रामदेव ने समर्थन ट्वीट किया।​

माघ पूर्णिमा निकट। मुख्य स्नान प्रभावित हो सकता। प्रशासन 1 करोड़ श्रद्धालुओं की तैयारी।

विशेषज्ञ कहते हैं, परंपरा बनाम प्रशासनिक व्यवस्था का संघर्ष। समाधान जरूरी।

धार्मिक-सामाजिक आयाम

यह विवाद अखाड़ा परंपराओं को चुनौती। जूना अखाड़ा पहले स्नान की मांग। दशम अविमुक्त अखाड़ा समर्थन।​

शंकराचार्य पद का सवाल संवेदनशील। सुप्रीम कोर्ट फैसला लंबित। हिंदू संगठनों में बहस।

माघ मेला 2026 में 40 लाख स्नान। विवाद सुर्खियां चुरा रहा।

पिछले विवादों का इतिहास

हरिद्वार कुंभ 2021 में स्नान क्रम विवाद। प्रयागराज महाकुंभ 2019 में भी टकराव। स्वामी जी लगातार मुखर।

माघ मेला छोटा लेकिन महत्वपूर्ण। मौनी अमावस्या पवित्र।

प्रशासन की चुनौतियां

भीड़ प्रबंधन मुश्किल। रथ रोकना जरूरी था। लेकिन संतों का सम्मान अनिवार्य। प्रोटोकॉल तय करने की मांग जायज।

UP सरकार हाईकोर्ट निगरानी में। कोई हिंसा नहीं होनी चाहिए।

भविष्य की संभावनाएं

प्रेस कॉन्फ्रेंस 30 जनवरी सुबह 11 बजे। स्नान या काशी लौटना तय। माफी मिली तो प्रयाग लौट सकते।

माघ पूर्णिमा पर शांति जरूरी। अखाड़ा परिषद मध्यस्थता करे।

सोशल मीडिया पर हंगामा

ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर वीडियो वायरल। #Avimukteshwaranand ट्रेंडिंग। समर्थक प्रशासन के खिलाफ।

ABP, NDTV, आजतक कवरेज। यूट्यूब लाइव अपडेट्स।​

श्रद्धालुओं के लिए सलाह

संगम स्नान के समय का पालन करें। ट्रैफिक नियम मानें। विवाद से दूर रहें। हेल्पलाइन 0532-2420482।

मेला ऐप डाउनलोड करें। लाइव लोकेशन चेक।

यह विवाद धार्मिक परंपराओं को मजबूत कर सकता। समाधान शुभ। अपडेट्स बने रहें।
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