बिजनौर साइबर ठगी: महिला ने दी जान, कस्टोडियल डेथ का राज

बिजनौर, उत्तर प्रदेश |30 अप्रैल 2026 | विशेष संवाददाता:उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में साइबर ठगों का क्रूर खेल एक महिला की जिंदगी ले उड़ा। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर महीनों से ब्लैकमेल की शिकार महिला ने आखिरकार सुसाइड कर लिया। सबसे सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब उसके शव को श्मशान ले जाया गया और ठगों ने परिवार को वीडियो कॉल पर धमकाना जारी रखा।

सुसाइड नोट और मोबाइल चैट्स में साफ संकेत मिले कि ठगों ने उसे ‘कस्टोडियल डेथ’ का झूठा केस ठोक दिया था। बिजनौर पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर सेल को जांच सौंपी है। यह घटना पूरे उत्तर प्रदेश में साइबर क्राइम की लहर को लेकर अलार्म बजा रही है।
बिजनौर साइबर ठगी केस: घटना की पूरी टाइमलाइन
बिजनौर के एक छोटे से इलाके में रहने वाली 40 वर्षीय महिला (नाम गोपनीय) को पिछले तीन महीनों से साइबर ठग परेशान कर रहे थे। ठगों ने पहले उसे फोन पर कॉल किया और खुद को CBI अधिकारी बताते हुए कहा कि उसके खाते में मनी लॉन्ड्रिंग का पैसा आया है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर उन्होंने महिला को घर में कैद रखा और लाखों रुपये मांगने शुरू कर दिए।
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पहला कॉल (जनवरी 2026): ठगों ने वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिस स्टेशन दिखाया।
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ब्लैकमेल चरण (फरवरी-मार्च): महिला ने 2 लाख रुपये ट्रांसफर किए, लेकिन ठगों ने रुकने का नाम नहीं लिया।
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कस्टोडियल डेथ थ्रेट (अप्रैल): ठगों ने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए तो ‘कस्टोडियल डेथ’ का केस बनेगा।
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29 अप्रैल की रात: तंग आकर महिला ने सुसाइड नोट लिखा और जहर खा लिया।
परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह हुई कि अगले दिन श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान ठगों का वीडियो कॉल आ गया। रिकॉर्डिंग में ठग चिल्ला रहे थे, “पैसे दो वरना सबको अरेस्ट करेंगे!” यह वीडियो अब पुलिस के पास सबूत के तौर पर है।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है? भारत में बढ़ते मामले
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगों का नया हथकंडा है, जिसमें वे खुद को पुलिस, CBI या ED अधिकारी बताते हैं। वे वीडियो कॉल पर फर्जी बैकग्राउंड दिखाते हैं और लोगों को ‘डिजिटल कैद’ में रखकर पैसे ऐंठते हैं। भारत में 2025 में ऐसे 50,000 से ज्यादा केस दर्ज हुए, जिनमें उत्तर प्रदेश टॉप पर है।
स्रोत: NCRB साइबर क्राइम रिपोर्ट 2025। बिजनौर जैसे छोटे जिलों में भी स्कैम 300% बढ़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि AI टूल्स से ठग अब और रियल वीडियो बना रहे हैं।
महिला के परिवार का दर्द: ‘ठगों ने जिंदगी बर्बाद कर दी’
महिला के पति ने बताया, “वह दिन-रात डरती रहती थी। ठग रोज 10-15 कॉल्स करते। हमने पैसे दिए, लेकिन लालच खत्म न हुआ। श्मशान पर कॉल आया तो खून जम गया।” परिवार ने बिजनौर SSP से न्याय की गुहार लगाई। स्थानीय लोगों में गुस्सा भरा है, कई ने साइबर जागरूकता रैली की मांग की।
साइबर ठगों की ट्रिक्स: कैसे पहचानें?
साइबर ठग कई तरीके अपनाते हैं:
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फर्जी वीडियो कॉल: पुलिस यूनिफॉर्म में AI जनरेटेड वीडियो।
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पर्सनल डिटेल्स: आधार, PAN जैसी जानकारी पहले से लीक।
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डर का फायदा: ‘अरेस्ट वॉरंट’ दिखाकर पैनिक क्रिएट।
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मल्टीपल नंबर्स: कॉल्स अलग-अलग नंबर्स से।
बिजनौर पुलिस ने चेतावनी दी कि कोई असली अधिकारी फोन पर पैसे नहीं मांगता।
पुलिस जांच: ठगों का नेटवर्क जल्द बेनकाब?
बिजनौर SSP ने कहा, “साइबर सेल 24 घंटे काम कर रही। IP ट्रैकिंग से ठगों का लोकेशन जामनगर (गुजरात) तक पहुंचा है। अंतरराज्यीय गिरोह का मामला लग रहा।” पुलिस ने:
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मोबाइल फॉरेंसिक शुरू की।
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बैंक ट्रांजेक्शन ट्रेस किए।
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हेल्पलाइन 1930 पर 50+ शिकायतें मिलीं।
पिछले महीने बिजनौर में 20 साइबर ठग गिरफ्तार हो चुके। यह केस नेशनल लेवल पर जा सकता है।
उत्तर प्रदेश में साइबर क्राइम की लहर: आंकड़े चौंकाने वाले
UP में 2026 के पहले 4 महीनों में 25,000 साइबर केस दर्ज। डिजिटल अरेस्ट में 40% महिलाएं शिकार। बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर जैसे नॉर्थ UP जिलों में सबसे ज्यादा। सरकार ने साइबर पुलिस थाने बढ़ाने का ऐलान किया।
विशेषज्ञ सलाह: साइबर विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार ने कहा, “डिजिटल अरेस्ट कस्टोडियल डेथ जैसी थ्रेट्स मानसिक तनाव बढ़ाती हैं। सुसाइड रेट 20% ऊपर। जागरूकता जरूरी।”
डिजिटल अरेस्ट से बचाव के 10 गोल्डन टिप्स
साइबर ठगी से 100% बचने के लिए ये कदम उठाएं:
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हेल्पलाइन याद रखें: 1930 या 112 पर कॉल।
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वीडियो कॉल न लें: स्क्रीनशॉट लेकर पुलिस जाएं।
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पैसे न दें: कोई अधिकारी फोन पर डिमांड नहीं करता।
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ऐप्स चेक: Truecaller से नंबर वेरिफाई।
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रिपोर्ट करें: cybercrime.gov.in पर FIR।
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फैमिली अलर्ट: बुजुर्गों को ट्रेनिंग दें।
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टू-फैक्टर ऑन: बैंक अकाउंट सिक्योर।
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AI डिटेक्टर यूज: फर्जी वीडियो चेक।
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लोकल पुलिस: पहले थाने रिपोर्ट।
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जागरूकता: सोशल मीडिया पर शेयर।
बिजनौर न्यूज स्पेशल: अन्य साइबर केस जो दहला गए
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मेरठ केस: बुजुर्ग से 5 लाख ऐंठे।
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सहारनपुर: डॉक्टर को फर्जी अरेस्ट।
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मुजफ्फरनगर: 10 लोगों का गिरोह पकड़ा।
ये केस नॉर्थ इंडिया में साइबर क्राइम की सच्चाई बयां करते हैं।
FAQ: डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े सवाल
Q1: डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?
A: ठगों का फर्जी अरेस्ट गेम, जहां घर में कैद कर पैसे मांगते हैं।
Q2: बिजनौर केस में क्या हुआ?
A: महिला की सुसाइड, श्मशान वीडियो कॉल से राज खुला।
Q3: रिपोर्ट कैसे करें?
A: 1930 डायल या ऑनलाइन पोर्टल।
Q4: कितने केस UP में?
A: 2026 में 25,000+।
Q5: ठग कहां से ऑपरेट करते?
A: ज्यादातर गुजरात, राजस्थान।
सावधानी ही सुरक्षा, जागें और जागरूक करें
बिजनौर की यह घटना साइबर ठगों के खिलाफ जंग का ऐलान है। डिजिटल अरेस्ट और कस्टोडियल डेथ स्कैम से लाखों परिवार तबाह हो रहे। सरकार, पुलिस और समाज को मिलकर लड़ना होगा। अगर आपको भी संदिग्ध कॉल आए, तो तुरंत रिपोर्ट करें। बिजनौर पुलिस से अपडेट्स के लिए फॉलो करें।
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