हमास की कैद में इकलौते हिंदू बिपिन जोशी की मौत,जानें कौन है वो इकलौता हिंदू लड़का, जिसका शव मिलेगा अब वापस

बिपिन जोशी, एक नेपाली हिंदू छात्र, हमास के हमले के दौरान 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में बंधक बना लिया गया था। उसकी मौत हमास की कैद में हुई और उसका शव 13 अक्टूबर 2025 को इजरायली अधिकारियों को सौंप दिया गया ।

बंधकत्व और बहादुरी
बिपिन जोशी, जो 22 वर्ष के थे, गाजा सीमा के पास किबुत्ज़ अलुमिम में एक कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए नेपाल से आए थे । हमास के हमले के दौरान उन्होंने बहादुरी दिखाई और एक जिंदा ग्रेनेड को फेंककर कई लोगों की जान बचाई, लेकिन वह खुद घायल हो गए और बंधक बना लिए गए । उन्हें गाजा में जीवित रहने वाला एकमात्र गैर-इजरायली और हिंदू बंधक माना जाता था ।
मौत और शव का हस्तांतरण
हमास ने 13 अक्टूबर 2025 को चार मृत बंधकों के शव इजरायल को सौंपे, जिनमें बिपिन जोशी का शव भी शामिल था । इजरायली सेना ने रेड क्रॉस के माध्यम से शव प्राप्त किए और उन्हें तेल अवीव ले जाया गया । नेपाल के इजरायल में राजदूत धन प्रसाद पंडित ने इसकी पुष्टि की कि जोशी का शव हमास द्वारा इजरायली अधिकारियों को सौंपा गया है ।
परिवार और अंतिम संस्कार
बिपिन के परिवार ने लगातार उनकी सुरक्षित वापसी के लिए अपील की थी, और उनकी मां व पुष्पा नामक बहन अगस्त 2025 में इजरायल गई थीं । उनके अवशेषों को नेपाल वापस भेजने से पहले डीएनए परीक्षण किया जाएगा, और उनका अंतिम संस्कार इजरायल में ही किए जाने की उम्मीद है ।
बिपिन जोशी के जीवन व बहादुरी की विस्तृत जीवनी
बिपिन जोशी नेपाल के सुदूरपश्चिम प्रदेश के कञ्चनपुर जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले थे। वह 22 वर्ष के थे और कृषि में अध्ययनरत एक छात्र थे। सितंबर 2023 में बिपिन जोशी 16 अन्य साथियों के साथ इजरायल गए थे, जहां वे “लर्न एंड अर्न” कार्यक्रम के तहत इजरायल के गाजा सीमा के पास किबुत्ज अलुमिम में कृषि की व्यावहारिक ट्रेनिंग और काम के लिए गए थे। यह कार्यक्रम विदेशी छात्रों को इजरायली कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण देने के लिए था।
7 अक्टूबर 2023 को, जब हमास ने इजरायल पर बड़ा हमला किया, तब बिपिन जोशी उसी किबुत्ज अलुमिम में थे। उस हमले के दौरान जब आतंकवादियों ने ग्रेनेड फेंका, तब बिपिन ने अपनी जान जोखिम में डालते हुए एक ग्रेनेड उठाया और उसे वापस हमास की ओर फेंक दिया। इस बहादुरी से कई साथियों की जान बचाई गई। इसके बाद उन्हें हमास के आतंकवादियों द्वारा पकड़ा गया और गाजा के शिफा अस्पताल में कैद रखा गया।
बिपिन जोशी हमास की कैद में रहने वाले गाजा में एकमात्र गैर-इजरायली और एकमात्र हिन्दू बंधक माने जाते थे। उनके परिवार ने उनकी रिहाई के लिए इजरायल, अमेरिका और कतार तक में प्रयास किए, लेकिन दो साल बाद हमास ने उनका शव इजरायली सेना को सौंप दिया।
उनकी बहादुरी और संघर्ष के कारण उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है, जो उनके परिवार और देश नेपाल दोनों के लिए भावनात्मक क्षण है। बिपिन जोशी का नाम मानवता और साहस का प्रतीक बनकर उभरा है, जिन्होंने खतरे के बीच अपने साथियों की जान बचाई और वे अपनी आखिरी सांस तक कैद में रहे।
इस प्रकार, बिपिन जोशी एक बहादुर और अध्ययनशील युवा थे, जिनकी कहानी मानवता, देशभक्ति और साहस की मिसाल है.
नेपाल और इज़राइल की सरकारों की प्रतिक्रिया
नेपाल और इज़राइल सरकारों की प्रतिक्रिया इस प्रकार है:
नेपाल सरकार ने बिपिन जोशी की मौत की पुष्टि को लेकर गहरा शोक व्यक्त किया है। नेपाली राजदूत धनप्रसाद पण्डित ने बताया कि बिपिन अब जीवित नहीं हैं। नेपाल के परिवार ने उनकी सुरक्षित वापसी के लिए कई वर्षों तक कूटनीतिक प्रयास किए थे, जिसमें इज़राइल और अन्य देशों से भी मदद मांगी गई थी। विपिन की मां और बहन भी अगस्त 2025 में इज़राइल गई थीं ताकि वे हमास से उनकी रिहाई के लिए गुहार लगा सकें। हालांकि, विपिन जोशी को रिहा नहीं किया गया और अब उनका शव सौंपे जाने की खबर के बाद नेपाल में मातम छा गया है। नेपाल सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर उनकी मौत को लेकर तत्कालीन प्रयासों की कमी पर भी गौर किया है।
इज़राइल सरकार ने भी बिपिन जोशी की मौत की पुष्टि की है। इज़रायली सैन्य अधिकारियों ने उनके शव की पहचान की और नेपाली दूतावास को इसकी जानकारी दी। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटना को लेकर शोक व्यक्त किया है। इज़राइल-हमास युद्ध के दौरान बिपिन जोशी को हमास ने बंधक बनाया था, और वह गाजा में कैद में थे। इज़राइल सरकार ने कहा है कि हमास द्वारा बंधकों की रिहाई और शव सौंपने को लेकर युद्ध विराम समझौते का हिस्सा माना जा रहा है, हालांकि बिपिन जोशी सहित कई बंधकों की रिहाई के मामले में अनसुलझे प्रश्न भी हैं।
दोनों सरकारें बिपिन जोशी के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए शांति प्रक्रिया और बंधकों की सुरक्षा पर जोर दे रही हैं। इस घटना ने नेपाल और इज़राइल दोनों देशों में बड़ी संवेदनशीलता और दुख उत्पन्न किया है.

