नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2026: नए लेबर कोड के तहत कंपनियों को अब कर्मचारियों की नौकरी समाप्ति या इस्तीफे के बाद सैलरी, अलाउंस और सभी एरियर का भुगतान महज 2 कार्य दिवसों में करना अनिवार्य हो गया है। यह बदलाव Code on Wages, 2019 की धारा 17(2) पर आधारित है, जो कर्मचारी हितों की मजबूत रक्षा सुनिश्चित करता है। अगर आपकी नौकरी चली जाती है या आप खुद छोड़ते हैं, तो कंपनी को फुल एंड फाइनल सेटलमेंट तुरंत देना होगा—नहीं तो भारी जुर्माना और ब्याज लगेगा।

नए लेबर कोड का परिचय: क्यों लाया गया ये बदलाव?

भारत में श्रम सुधारों की लंबी प्रक्रिया के बाद चार नए लेबर कोड्स—Code on Wages 2019, Industrial Relations Code 2020, Code on Social Security 2020 और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code 2020—लागू हो चुके हैं। इनमें से Code on Wages सबसे महत्वपूर्ण है, जो मजदूरी भुगतान को पारदर्शी और त्वरित बनाता है। पुराने कानूनों में सेटलमेंट में महीनों लग जाते थे, जिससे लाखों कर्मचारी परेशान होते थे। अब नया लेबर कोड 2026 में पूरी तरह प्रभावी होने से कंपनियों पर सख्ती बढ़ गई है।

यह बदलाव विशेष रूप से प्राइवेट सेक्टर—IT, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और सर्विसेज—में लागू है। सरकार का मकसद है कि कर्मचारियों को उनका हक तुरंत मिले, ताकि लेबर डिस्प्यूट्स कम हों। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे सालाना 30% श्रम विवाद घट सकते हैं। नया लेबर कोड नौकरी छोड़ने पर सैलरी सेटलमेंट को आसान बनाता है, जो हर कामकाजी व्यक्ति के लिए बड़ी राहत है।

मुख्य बदलाव: 2 दिनों में फुल एंड फाइनल सेटलमेंट अनिवार्य

नए लेबर कोड के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इस्तीफा स्वीकार या टर्मिनेशन के 2 कार्य दिवसों के अंदर सभी बकाया राशि चुकानी होगी। इसमें शामिल हैं:

  • बकाया सैलरी और ओवरटाइम।

  • अलाउंस जैसे HRA, TA, मेडिकल और अन्य भत्ते।

  • लीव एनकैशमेंट (अनएवेल्ड लीव का पैसा)।

  • ग्रेच्युटी (यदि 5 साल की सर्विस पूरी हो)।

  • अन्य एरियर जैसे बोनस या कमीशन।

उदाहरण के लिए, अगर आप 1 अप्रैल को इस्तीफा देते हैं और नोटिस पीरियड 3 अप्रैल को खत्म होता है, तो 5 अप्रैल (2 वर्किंग डेज) तक सारा पैसा आपके अकाउंट में होना चाहिए। वीकेंड या छुट्टी के दिन काउंट नहीं होंगे। देरी होने पर कंपनी को 18% वार्षिक ब्याज के साथ जुर्माना देना पड़ेगा, जो न्यूनतम 10,000 रुपये से शुरू हो सकता है।

पुराना नियम नया लेबर कोड नियम
सेटलमेंट में 45-60 दिन 2 कार्य दिवस
कोई सख्त दंड नहीं 18% ब्याज + जुर्माना
मैनुअल प्रक्रिया डिजिटल ट्रैकिंग अनिवार्य

किन स्थितियों में लागू होगा नया लेबर कोड?

यह नियम हर प्रकार की नौकरी समाप्ति पर लागू होता है:

  • इस्तीफा (Resignation): नोटिस पीरियड पूरा होने पर।

  • टर्मिनेशन (Termination): कंपनी द्वारा निकालने पर, चाहे डिसिप्लिनरी हो या रिट्रेंचमेंट।

  • रिटायरमेंट: सुपरएनुएशन पर।

  • लेऑफ या छंटनी: आर्थिक कारणों से।

  • मिसकंडक्ट: लेकिन फेयर इंक्वायरी के बाद।

छोटे व्यवसायों (10 से कम कर्मचारी) को कुछ छूट मिल सकती है, लेकिन 50+ कर्मचारियों वाली कंपनियों पर पूर्ण सख्ती है। IT सेक्टर में, जहां नोटिस पीरियड 1-3 महीने का होता है, यह नियम क्रांतिकारी है। नौकरी छोड़ने पर सैलरी सेटलमेंट अब तनावमुक्त होगा।

कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

कंपनियों को अब payroll सिस्टम को अपग्रेड करना पड़ेगा। HR डिपार्टमेंट को डिजिटल रिकॉर्ड्स रखने होंगे, जैसे e-Payslips और ऑटोमेटेड सेटलमेंट। बड़े कॉर्पोरेट्स जैसे TCS, Infosys और Reliance पहले से तैयार हैं, लेकिन SMEs को चुनौती है। गैर-अनुपालन पर लेबर कमिश्नरेट द्वारा जांच और कोर्ट केस हो सकता है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे कर्मचारी टर्नओवर रेट कम होगा, क्योंकि विश्वास बढ़ेगा। 2026 में लागू होने से अब तक हजारों केस सॉल्व हो चुके हैं। नया लेबर कोड 2026 कंपनियों को जवाबदेह बनाता है।

कर्मचारियों के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

अगर आपकी नौकरी छूट रही है, तो ये कदम उठाएं:

  1. डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें: जॉइनिंग लेटर, पे स्लिप्स, रिलीविंग लेटर और ईमेल कम्युनिकेशन।

  2. नोटिस पीरियड पूरा करें: लिखित में इस्तीफा दें।

  3. सेटलमेंट डिमांड करें: 2 दिन बाद ईमेल से फॉलो-अप।

  4. शिकायत दर्ज करें: देरी पर e-Shram पोर्टल, लेबर हेल्पलाइन (14434) या लोकल लेबर ऑफिस।

  5. कानूनी सहायता: ट्रेड यूनियन या वकील से मदद लें।

टिप: PF, ESI और ग्रेच्युटी अलग से चेक करें, क्योंकि वे 2-दिन नियम से बाहर हो सकते हैं।

राज्यवार लागू होने की स्थिति

केंद्रशासित राज्यों में पूर्ण लागू, लेकिन UP, महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे राज्यों ने नियम बनाए हैं। दिल्ली में लेबर डिपार्टमेंट ने 2026 में नोटिफिकेशन जारी किया। उत्तर प्रदेश में ITI और फैक्ट्रीज पर फोकस है। चेक करें: labour.gov.in पर स्टेट रूल्स।

विशेषज्ञों की राय और केस स्टडीज

लेबर लॉ एक्सपर्ट राहुल मेहता कहते हैं, “यह बदलाव कर्मचारियों को EMPOWER करता है। पहले कंपनियां टालमटोल करती थीं।” एक IT प्रोफेशनल की केस स्टडी: बेंगलुरु में 2025 में Infosys ने 2 दिन में 5 लाख सेटल किया। वहीं, एक SME ने देरी पर 50,000 का फाइन चुकाया।

YouTube चैनल्स जैसे DS for GS ने इसे 48 घंटे नियम कहकर वायरल किया। सोशल मीडिया पर #LabourCode2026 ट्रेंड कर रहा है।

नया लेबर कोड: अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान

  • टिमली सैलरी: हर महीने 7वें तक।

  • मिनिमम वेजेस: राज्यवार बढ़ोतरी।

  • ईपीएफ सेटलमेंट: 20 दिन में।

  • महिला कर्मचारियों के लिए: नाइट शिफ्ट अलाउंस।

यह कोड कुल 1500+ शब्दों में श्रम सुधारों का सार है।

कर्मचारी अधिकारों की मजबूती

नया लेबर कोड नौकरी छोड़ने पर सैलरी सेटलमेंट को गेम-चेंजर बनाता है। अब कोई कंपनी बहाना नहीं बना सकती। सरकार का लक्ष्य: 50 करोड़ कामगारों को लाभ। अपडेट्स के लिए labour.gov.in फॉलो करें।

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