दिल्ली-NCR वालों को दिवाली पर तोहफा,दिवाली से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने दी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली 2025 से ठीक पहले दिल्ली और एनसीआर में ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति दी है। यह अनुमति पाँच दिनों के लिए टेस्टिंग के तौर पर दी गई है, जिसमें सिर्फ NEERI और PESO द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखों को ही जलाया जा सकेगा।

पारंपरिक पटाखों पर अभी भी प्रतिबंध लागू रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही यह भी निर्देश दिए हैं कि ग्रीन पटाखे शाम 8 बजे से 10 बजे तक ही जलाए जाएं। इस फैसले का उद्देश्य प्रदूषण कम करना और पर्यावरण को संरक्षित रखना है, साथ ही उद्योग जगत के हितों को भी संतुलित करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की बेंच ने सुनाया है। अदालत ने पारंपरिक पटाखों की तस्करी को एक गंभीर समस्या बताया जो ग्रीन पटाखों के नाम पर बाजार में पहुँचती है और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती है। इस कारण नए नियमों के तहत केवल सर्टिफाइड ग्रीन पटाखों को ही अनुमति दी गई है। इस फैसले के बाद दिल्ली और एनसीआर के लोगों को दिवाली पर कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखों का उपयोग करने का अवसर मिलेगा।
यह भी बताया गया है कि इस अनुमति के चलते कालाबाजारी और अवैध पटाखे बेचने वालों पर नियंत्रण रहेगा, जिससे सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा मिलेगा। अभी यह निर्णय पाँच दिनों के परीक्षण के लिए है, जिसके बाद आगे का फैसला लिया जाएगा कि इस परमिशन को जारी रखना है या नहीं।
इससे पहले पटाखों पर पूरी तरह का बैन लागू था, जो अब ग्रीन पटाखों पर सशर्त हटाया गया है। ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में 20-30% कम प्रदूषण उत्पन्न करते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस खबर और फैसले की ताजा जानकारी मिली है कि दिवाली 2025 पर दिल्ली और एनसीआर में पर्यावरण के अनुकूल और नियंत्रित तरीके से ग्रीन पटाखे जलाना संभव होगा.
ग्रीन पटाखों का पर्यावरण पर क्या प्रभाव होगा
ग्रीन पटाखों का पर्यावरण पर प्रभाव पारंपरिक पटाखों की तुलना में काफी कम नुकसानदेह होता है। ये पटाखे विशेष रूप से ऐसे रासायनिक तत्वों का उपयोग करते हैं जो प्रदूषण को कम करते हैं और इसलिए इनमें हानिकारक गैसों और कणों का उत्सर्जन लगभग 30% से 40% तक कम होता है।
ग्रीन पटाखे मुख्य रूप से बैरियम नाइट्रेट, पारा, आर्सेनिक और सीसा जैसे जहरीले रसायनों की जगह पर्यावरण के अनुकूल तत्वों का उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, इनके विस्फोट से जल वाष्प निकलती है जो हानिकारक धूल कणों को दबाने में मदद करती है। यह न केवल वायु प्रदूषण कम करता है, बल्कि ध्वनि प्रदूषण को भी नियंत्रित करता है।
हालांकि, कुछ अध्ययनों से पता चला है कि ग्रीन पटाखे भी अल्ट्राफाइन कण (बहुत छोटे कण जो हवा में लम्बे समय तक रहते हैं) छोड़ते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इसके बावजूद, ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल से वातावरण में कणीय पदार्थ (PM2.5 और PM10) और नाइट्रस ऑक्साइड तथा सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैसों की मात्रा पारंपरिक पटाखों की तुलना में काफी कम होती है।
इसलिए, ग्रीन पटाखे पर्यावरण के लिए कम हानिकारक विकल्प माने जाते हैं, परन्तु पूर्ण प्रदूषण मुक्त नहीं हैं। इसके साथ ही, इनके उपयोग से जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण भी कम होता है, जो पारंपरिक पटाखों के मुकाबले बेहतर स्थिति है।
इस प्रकार, ग्रीन पटाखे पर्यावरण संरक्षण में सहायक होते हैं और दिवाली जैसे त्यौहारों पर सुरक्षित और कम प्रदूषण फैलाने वाला विकल्प प्रदान करते हैं, हालांकि इनके उपयोग में सावधानी बरतनी आवश्यक है ताकि उनकी वास्तविक प्रभावशीलता बनी रहे और बाजार में नकली पटाखों से बचा जा सके.

