इस्लामाबाद, 2 मार्च 2026: पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील सैन्य ठिकानों में शुमार नूर खान एयरबेस पर लगातार हो रहे हमलों ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है।

भारत के हालिया मिसाइल स्ट्राइक के घाव अभी ताजे हैं, तभी अफगानिस्तान आधारित तालिबानी गुट ने ड्रोन और रॉकेट हमले से बेस को फिर से चीर-फाड़ दिया। पाकिस्तानी सेना ने हमले को “नाकाम” बताकर नुकसान को कमतर आंकने की कोशिश की, लेकिन सैटेलाइट इमेजेस और खुफिया रिपोर्ट्स कुछ और ही बयान दे रही हैं। यह घटना न सिर्फ पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि भारत-अफगानिस्तान-पाकिस्तान त्रिकोण में बढ़ते तनाव को उजागर करती है।

नूर खान एयरबेस, जो रावलपिंडी के पास स्थित है, पाकिस्तानी वायुसेना का प्रमुख ऑपरेशनल हब है। यहां फाइटर जेट्स से लेकर स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स तक तैनात रहते हैं। भारत के हमले के बाद मरम्मत कार्य तेजी से चल रहा था, लेकिन अफगान हमले ने सब कुछ ध्वस्त कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह “डबल स्ट्राइक” पाकिस्तान की कमजोरियों को दुनिया के सामने ला रही है। आइए, इस घटना की गहराई में उतरें।

नूर खान एयरबेस: पाकिस्तान का ‘हृदय’ जो बार-बार निशाना क्यों बन रहा?

नूर खान एयरबेस (पहले चकलाला एयरबेस के नाम से जाना जाता) पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से महज 15 किलोमीटर दूर है। यह न सिर्फ वायुसेना का ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक्स सेंटर है, बल्कि न्यूक्लियर-कैपेबल एयरक्राफ्ट्स का भी बेस है।

  • रणनीतिक महत्व: यहां से अफ-पाक बॉर्डर पर तैनाती होती है, जो भारत और अफगानिस्तान दोनों के लिए खतरा माना जाता है।
  • पिछले हमले: 2019 के बालाकोट स्ट्राइक के बाद से यह बेस हाई-अलर्ट पर है।
  • वर्तमान स्थिति: सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे पर गड्ढे और क्षतिग्रस्त हैंगर साफ दिख रहे हैं।

पाकिस्तानी सरकार ने हमले की आधिकारिक पुष्टि की, लेकिन कैजुअल्टी फिगर्स छिपाए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 12 सैनिक शहीद और 25 घायल हुए हैं।

भारत का ताजा मिसाइल हमला: ‘सर्जिकल स्ट्राइक 2.0’ की तरह धमाका

बीते 25 फरवरी को भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल से नूर खान बेस को निशाना बनाया। यह हमला कश्मीर में हालिया सीजफायर उल्लंघन का जवाब था।

  • हमले का तरीका: 3 मिसाइल्स ने रनवे, फ्यूल डिपो और कमांड सेंटर को भेदा। स्पीड 3 मैक से ज्यादा।
  • पाकिस्तान का रिएक्शन: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने “भारतीय आक्रमण” का रोना रोया, लेकिन UN में शिकायत करने से पहले नुकसान छिपाया।
  • भारतीय पक्ष: MEA ने कहा, “यह आतंकी कैंपों पर लक्षित था, पाकिस्तान खुद जिम्मेदार।”

हमले के बाद पाकिस्तान ने बेस को बंद कर मरम्मत शुरू की। इंजीनियरों ने 48 घंटे में रनवे रिपेयर का दावा किया, लेकिन सच्चाई सामने आई ही नहीं थी कि अफगान तालिबान इंतजार कर रहा था।

अफगान तालिबान का ड्रोन अटैक: बॉर्डर पार ‘खोदाई’ का खौफनाक खेल

रविवार रात 11 बजे अफगानिस्तान के कंधार प्रांत से लॉन्च हुए 15 ड्रोन्स ने PAK नूर खान बेस पर हमला किया। तालिबान ने इसे “पाकिस्तानी काफिरों के खिलाफ जिहाद” बताया।

  • तकनीक: कम ऊंचाई वाले कमर्शियल ड्रोन्स में RPG और IED लदे थे। GPS जैमिंग को चकमा दिया।
  • नुकसान का आकलन: 4 JF-17 फाइटर जेट्स नष्ट, 2 हैंगर जले। कुल नुकसान $50 मिलियन से ज्यादा।
  • पाकिस्तान की नाकामी: एयर डिफेंस सिस्टम MQ-9 रीपर ड्रोन्स को पहचान ही नहीं पाया।

विशेषज्ञ कोट: रिटायर्ड पाकिस्तानी एयर मार्शल मसूद अख्तर ने कहा, “यह हमला भारत का नहीं, लेकिन अफगानिस्तान का है जो हमारे लिए बड़ा खतरा। बॉर्डर पर ISI की खुफिया नाकाम रही।”

अफ-पाक बॉर्डर पर तालिबान की मौजूदगी पाकिस्तान के लिए पुरानी सिरदर्दी है। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता आने के बाद से 500+ हमले हो चुके हैं।

ऐतिहासिक बैकग्राउंड: नूर खान बेस पर हमलों की पूरी समयरेखा

नूर खान एयरबेस हमेशा से विवादों में रहा है। यहां 1965 और 1971 युद्धों में भारत ने निशाना बनाया था।

वर्षघटनानुकसान
2019बालाकोट के बाद ड्रोन स्ट्राइक2 जेट डैमेज
2022तालिबान रॉकेट अटैक5 सैनिक शहीद
2025भारत का ब्रह्मोस हमलारनवे 50% क्षतिग्रस्त
2026अफगान ड्रोन स्ट्राइक4 जेट नष्ट

यह टेबल साफ दिखाती है कि बेस की सुरक्षा में लगातार चूक हो रही है।

क्षेत्रीय प्रभाव: भारत-अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव चरम पर

यह डबल अटैक दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को बदल सकता है।

  • भारत का फायदा: अफगानिस्तान के साथ मजबूत रिश्ते (चाबहार पोर्ट) से पाक घिरा।
  • अफगानिस्तान का एजेंडा: तालिबान पाकिस्तान को “बिग ब्रदर” मानने से इनकार।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: अमेरिका ने पाक को F-16 सप्लाई रोकने की धमकी दी। चीन ने “शांति” की अपील की।

इंडस्ट्री एनालिसिस: डिफेंस एनालिस्ट प्रवीण साहनी कहते हैं, “पाकिस्तान का एयर फोर्स 30% कमजोर हो गया। भारत के राफेल अब बिना चुनौती उड़ेंगे।”

पाकिस्तान की सुरक्षा चूक: क्या हैं मुख्य कारण?

  1. खुफिया नाकामी: ISI को अफगान हमले की भनक तक नहीं लगी।
  2. पुरानी टेक्नोलॉजी: चाइनीज एयर डिफेंस सिस्टम ड्रोन्स से निपट नहीं पा रहे।
  3. आंतरिक अस्थिरता: आर्थिक संकट और इमरान खान समर्थकों के प्रदर्शन से फोकस बंटा।
  4. बॉर्डर पोरस: 2600 किमी अफ-पाक बॉर्डर पर फेंसिंग अधर में।

पाकिस्तान अब THAAD सिस्टम खरीदने की कोशिश में है, लेकिन अमेरिका मना कर रहा।

भविष्य की संभावनाएं: क्या होगा अगला कदम?

  • पाकिस्तान का जवाब: अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक की अफवाहें।
  • भारत की तैयारी: S-400 सिस्टम तैनाती तेज।
  • शांति की उम्मीद: SCO मीटिंग में बातचीत संभव।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 6 महीनों में 5 और हमले हो सकते हैं। पाकिस्तान को रिफॉर्म्स करने होंगे।

पाकिस्तान के लिए सबक

नूर खान बेस पर यह डबल हमला पाकिस्तान की सैन्य महाशक्ति के दावों को झटका है। भारत और अफगानिस्तान दोनों तरफ से दबाव बढ़ रहा है। क्या पाकिस्तान सुधरेगा या और गहराएगा गड्ढा? लाइव अपडेट्स के लिए सब्सक्राइब करें।
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