राजस्थान में हाल ही में दवा घोटाले का बड़ा मामला उजागर हुआ है, जिसमें कई जानलेवा टैबलेट्स और सिरप बेचे जा चुके हैं, जिनके सैंपल जांच में फेल पाए गए या दवाओं में जरूरी साल्ट ही नहीं था। दवा नियंत्रक विभाग की जांच में सामने आया है कि एंटीबायोटिक, हार्ट (कार्डियक), दर्द निवारक, खांसी सिरप सहित कई गंभीर बीमारियों की दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं, लेकिन सैंपल फेल होने से पहले ही हजारों गोलियां और सिरप आम लोगों को बेच दी गईं थी। जांच में यह भी सामने आया कि पेट दर्द की गोली से लेकर कान-नाक की दवाओं में साल्ट गायब था, यानी दवा में सक्रिय तत्व ही नहीं मिला.

मुख्य तथ्य और कार्रवाई

  • राजस्थान की जांच में सैकड़ों दवाओं के सैंपल फेल हुए, जिनमें से अधिकतर राज्यों के बाहर बनी थीं और इनमें साल्ट की मात्रा मानकों से कम या नाममात्र पाई गई.
  • ड्रग कंट्रोल विभाग की लापरवाही उजागर हुई—जांच के बाद भी फेल दवाओं पर कोई कड़ी कार्रवाई या बिक्री पर तुरंत रोक नहीं लगी। नियम के अनुसार इन पर कोर्ट केस होना चाहिए था, मगर बहुत मामलों में ऐसा नहीं हुआ.
  • राजस्थान सरकार ने हाल ही में कायासन फार्मा की सभी 19 दवाओं की सप्लाई पर रोक लगा दी है और ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को निलंबित कर दिया है।
  • जिन कफ सिरप या दवाओं के सैंपल फेल हुए, वे लाखों यूनिट की संख्या में मरीजों तक पहुँच गईं, जिससे कई बच्चों की मौत और अन्य गंभीर बीमारियां सामने आईं.
  • 2024 में 101 सैंपल फेल हुए थे, 2025 में अब तक 81 सैंपल फेल हो चुके हैं। 2019 से 2025 तक 915 से ज्यादा दवा सैंपल फेल पाए जा चुके हैं.

सिस्टम में खामियां

  • सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा योजना के तहत बांटी जाने वाली दवाओं की टेस्टिंग ज़्यादा प्राइवेट लैब में होती रही, जिसमें गड़बड़ी की गुंजाइश अधिक पाई गई.
  • ब्लैकलिस्टेड कंपनियां फार्मूले में मामूली बदलाव कर फिर से सप्लाई शुरू कर देती हैं, या दूसरी लैब से सर्टिफिकेट लेकर सरकारी टेंडर में वापस आ जाती हैं.

जनता पर असर और विशेषज्ञ जांच

  • दवाओं की गुणवत्ता पर समय रहते कार्रवाई न हो पाने के कारण लाखों लोग इन जानलेवा व नकली दवाओं का उपयोग कर चुके होते हैं, जिससे जिंदगी पर सीधा खतरा बढ़ गया है.
  • फिलहाल राज्य सरकार की ओर से विशेषज्ञ समिति बनाकर जांच शुरू कराई गई है और खराब साल्ट या फेल दवाओं पर सख्त एक्शन की घोषणा की गई है.

यह मामला राजस्थान के स्वास्थ्य तंत्र में गंभीर खामियों, अधिकारियों की लापरवाही और नकली या अमानक दवाओं के बाजार में बिकने की बड़ी समस्या को उजागर करता है।

राजस्थान में फेल दवाओं की सूची और ब्रांड

राजस्थान में हाल ही में जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं और जिन ब्रांड्स पर कार्रवाई हुई है, उनमें मुख्य रूप से ‘Kaysons Pharma’ की 19 दवाएं शामिल हैं। इन प्रमुख दवाओं के सैंपल परीक्षण में फेल होने के बाद, राज्य सरकार ने इनका वितरण तत्काल रोक दिया है। 2024-2025 में जिन ब्रांड्स या दवाओं के मुद्दे सामने आए, उनमें कफ सिरप, एंटीबायोटिक, दर्द निवारक, हार्ट और शुगर की दवाएं प्रमुख थीं.

फेल दवाओं के प्रमुख ब्रांड व नाम

  • Kaysons Pharma (कंपनी का नाम) – इस कंपनी की सभी 19 दवाओं को राजस्थान में बैन किया गया है.
  • Dextromethorphan HBr Syrup (डेक्सट्रोमेथोरफन हाइड्रोब्रोमाइड कफ सिरप) – इस सिरप से ही सबसे अधिक बच्चों की मौत के मामले सामने आए.
  • Coldrif Syrup (कोल्ड्रिफ सिरप) – कई बच्चों की मौत या गंभीर बीमारियों की वजह बनी.
  • एनाल्जेसिक, कार्डियक, शुगर और अन्य औषधियां – इनमें से कुछ के नाम सार्वजनिक सूची में नहीं हैं, लेकिन केसन फार्मा की दवाओं की पूरी सप्लाई पर रोक है.

विस्तृत सूची की स्थिति

  • सरकार ने ‘Kaysons Pharma’ की इन 19 दवाओं पर रोक लगाई है, लेकिन दवा के हर ब्रांड और नाम की विस्तार से सूची स्वास्थ्य विभाग/आरएमएससीएल की रिपोर्ट या आदेश में उपलब्ध है.
  • 2019 से अब तक 915 से अधिक दवा सैंपल फेल हो चुके हैं, जिनमें अधिकतर फेल ब्रांड्स में कफ सिरप और एंटीबायोटिक शामिल हैं.

यदि विशेष ब्रांडेड दवाओं की सरकारी, अपडेटेड सूची चाहिए, तो राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम या स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट अथवा आदेश से विस्तृत नाम पता चल सकते हैं। फिलहाल सबसे बड़ा नाम ‘Kaysons Pharma’ और उसके अंतर्गत आने वाली सभी दवाएं है, जिसमें कफ सिरप/डेक्सट्रोमेथोरफन सिरप सबसे प्रमुख है, जिस पर बैन लगाया गया है.

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