नवम्बर 2025 के बिहार चुनावी माहौल में भोजपुरी सुपरस्टार्स और अब नेता बने खेसारी लाल यादव और दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ के बीच राम मंदिर को लेकर जबरदस्त बयानबाज़ी और राजनीतिक घमासान हुआ है। खेसारी लाल यादव ने राम मंदिर के स्थान पर अस्पताल बनाए जाने का बयान दिया, जिस पर निरहुआ ने तीखा पलटवार करते हुए कहा—”राजनीति मेरे खिलाफ करो, भगवान राम के खिलाफ नहीं।”​​

विवाद की पृष्ठभूमि

  • खेसारी लाल यादव, RJD के प्रत्याशी, ने कहा कि राम मंदिर की जगह अस्पताल बनाना बेहतर होता, जिससे जनता को अधिक फायदा मिलता.
  • इस बयान को निरहुआ ने हिंदुओं की आस्थाओं और 500 वर्षों की संघर्ष का अपमान बताया.​
  • निरहुआ ने खेसारी को “यदमुल्ला” कहते हुए निशाना साधा और कहा कि विरोध करना है तो BJP या विपक्ष का करें, भगवान या राम मंदिर के प्रति अपमान न करें.​
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मानवीय दृष्टिकोण

  • निरहुआ का संदेश था कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद और विरोध जायज है, लेकिन किसी भी धर्म या आस्था की भावनाओं के खिलाफ बयानबाज़ी उचित नहीं.​
  • उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति को समझना चाहिए उसकी बातें समाज में किस प्रकार प्रभाव डालती हैं.

सोशल मीडिया और प्रचार का असर

  • ये बयानबाज़ी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ चैनलों पर वायरल हो गई, जिससे दोनों नेताओं के समर्थकों में भी बहस छिड़ी.​

राजनीतिक और धार्मिक भावनाओं

बिहार चुनाव 2025 के दौरान खेसारी लाल यादव के बयान ने राजनीतिक और धार्मिक भावनाओं को प्रभावित किया, जिस पर निरहुआ ने बेहद स्पष्ट और मानवीय अंदाज में पलटवार कर यह समझाया कि राजनीति व्यक्तिगत विरोध तक सीमित रहे, धार्मिक आस्था का सम्मान किया जाए

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