न्याय दिलाउंगा बोलकर ‘अन्याय’, शारीरिक शोषण… गाजियाबाद में सब-इंस्पेक्टर पर दुष्कर्म और जबरन अबॉर्शन का आरोप

गाजियाबाद में एक महिला ने दारोगा जयसिंह निगम पर रेप, धोखाधड़ी, और जबरन गर्भपात कराने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि दरोगा ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात कराया। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर आरोपी के खिलाफ लोनी थाने में FIR दर्ज की गई है। दरोगा जयसिंह निगम पहले से शादीशुदा हैं, जिसके बारे में पीड़िता को शादी के बाद पता चला। पुलिस पर भी पीड़िता ने शिकायत करने पर कोई कार्रवाई न करने और धमकी देने के आरोप लगाए हैं। आरोपी वर्तमान में बरेली में तैनात है। इस मामले में कोर्ट ने आदेश देकर FIR दर्ज कराई और जांच चल रही है। पीड़िता ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और न्याय पाने के लिए कोर्ट की शरण ली है.

पीड़िता ने कब और कहां शिकायत दर्ज कराई थी
पीड़िता ने गाजियाबाद की महिला ने 26 जून 2025 को गाजियाबाद न्यायालय की शरण ली थी। इससे पहले जब उसने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराना चाहा तो पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बाद में न्यायालय के आदेश पर लोनी थाना में आरोपी दारोगा जयसिंह निगम के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। FIR में दुष्कर्म, धोखाधड़ी, जबरन गर्भपात कराने, और आपराधिक धमकी देने के मामले शामिल हैं। पीड़िता ने कोर्ट की मदद लेकर न्याय की राह चुनी क्योंकि पुलिस पर कारवाई न करने और आरोपी द्वारा धमकाने के आरोप लगे हैं
आरोपित दारोगा का नाम और सेवा विवरण
आरोपित दारोगा का नाम जयसिंह निगम बताया गया है। वह पुलिस विभाग में कार्यरत हैं और वर्तमान में बरेली में तैनात हैं। वह पहले गाजियाबाद में पदस्थ थे, जहां पर आरोप सामने आए। जयसिंह निगम पहले से ही शादीशुदा हैं, इस बारे में पीड़िता को बाद में पता चला। इस मामले में उनपर दुष्कर्म, धोखाधड़ी, जबरन गर्भपात कराने, और धमकी देने के आरोप लगे हैं.
कोर्ट ने FIR दर्ज करने पर क्या कहा था
कोर्ट ने इस मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दिया था और कहा था कि पीड़िता की शिकायत गंभीर है और पुलिस को तत्काल इस मामले की जांच करनी चाहिए। कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए कि आरोपी दारोगा जयसिंह निगम के खिलाफ यथाशीघ्र कानूनी कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस को शिकायतकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सही जांच करनी होगी और मामले की निष्पक्षता बनाए रखनी होगी। FIR दर्ज करना न्यायलय की प्राथमिकता थी ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और आरोपी पर कानूनी कार्रवाई हो सके.

