ilvअक्षय तृतीया से ठीक पहले सोना और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सर्राफा बाजार में जहां निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख कर रहे हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय संकेतों, डॉलर की मजबूती और घरेलू मांग में बदलाव के कारण कीमती धातुओं के दामों में हलचल बनी हुई है।

शुक्रवार के कारोबार में दिल्ली सहित देश के कई शहरों में सोने के भाव में हल्की नरमी दर्ज की गई, जबकि चांदी भी ऊंचे स्तरों से फिसलती नजर आई। ऐसे में अक्षय तृतीया से पहले ग्राहकों और निवेशकों की निगाहें लेटेस्ट रेट पर टिकी हुई हैं।

बाजार में क्यों आया उतार-चढ़ाव?

सोना-चांदी के दाम कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित होते हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर संकेत, कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की खरीदारी की प्रवृत्ति इन धातुओं के दाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है। जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तब सोने की मांग बढ़ती है, क्योंकि इसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। दूसरी तरफ, जब डॉलर मजबूत होता है या बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो सोने पर दबाव बनता है।

चांदी की कीमतों में भी इसी तरह का असर देखा जाता है, लेकिन इसके दाम केवल निवेश नहीं, बल्कि औद्योगिक मांग पर भी निर्भर करते हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चांदी की मांग बढ़ने या घटने से इसके रेट तेजी से बदलते हैं। यही वजह है कि अक्षय तृतीया से पहले भी चांदी में तेज उठापटक बनी हुई है।

अक्षय तृतीया पर क्यों बढ़ती है मांग?

भारत में अक्षय तृतीया को शुभ खरीदारी का दिन माना जाता है। इस दिन सोना खरीदना परंपरागत रूप से बहुत शुभ समझा जाता है। यही कारण है कि हर साल अक्षय तृतीया से पहले सर्राफा बाजार में ग्राहकी बढ़ जाती है। शादी-ब्याह के सीजन की वजह से भी इस समय ज्वेलरी की मांग तेज रहती है। कई परिवार इस मौके पर छोटे-छोटे गहने, सिक्के या डिजिटल गोल्ड में निवेश करना पसंद करते हैं।

त्योहार और शादी के मौसम में बढ़ी मांग के कारण ज्वेलर्स भी अपने स्टॉक और ऑफर्स को उसी हिसाब से तैयार करते हैं। कुछ दुकानों पर मेकिंग चार्ज में छूट, पुराने गहनों की एक्सचेंज स्कीम और गोल्ड कॉइन पर ऑफर भी दिए जाते हैं। इसलिए अक्षय तृतीया को सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि आर्थिक नजरिए से भी सोने की खरीदारी के लिए अहम माना जाता है।

दिल्ली में ताजा सोने के भाव

दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹1,54,350 प्रति 10 ग्राम के आसपास दर्ज किया गया है। 22 कैरेट सोना इससे नीचे चल रहा है और ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए यही सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला कैरेट माना जाता है। पिछले कुछ सत्रों में कीमतों में हल्की कमजोरी और रिकवरी दोनों देखने को मिली हैं, जिससे बाजार में असमंजस का माहौल बना हुआ है।

22 कैरेट सोने का दाम आमतौर पर ज्वेलरी मार्केट के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि अधिकांश आभूषण इसी शुद्धता में बनाए जाते हैं। दूसरी तरफ, 24 कैरेट सोना शुद्ध निवेश के लिए लिया जाता है और इसे आम तौर पर सिक्कों, बार या डिजिटल गोल्ड के रूप में खरीदा जाता है। इसी कारण निवेशक और ग्राहक दोनों अपने-अपने उद्देश्य के हिसाब से कैरेट चुनते हैं।

Silver में कितनी गिरावट?

चांदी के दाम भी हाल के दिनों में नीचे आए हैं। दिल्ली में चांदी का भाव करीब ₹2,64,900 से ₹2,65,000 प्रति किलो के आसपास देखा जा रहा है। हालांकि यह दर बाजार और शहर के हिसाब से बदल सकती है। चांदी में गिरावट की वजह अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव, औद्योगिक मांग में बदलाव और निवेशकों की मुनाफावसूली मानी जा रही है।

चांदी उन लोगों के लिए भी आकर्षक विकल्प होती है, जो कम बजट में कीमती धातु में निवेश करना चाहते हैं। कई बार निवेशक सोने के मुकाबले चांदी को ज्यादा वोलैटाइल मानते हैं, लेकिन लंबे समय में यह अच्छा रिटर्न देने की क्षमता भी रखती है। अक्षय तृतीया के आसपास चांदी के सिक्के और बर्तन भी खासे लोकप्रिय रहते हैं।

खरीदारी से पहले किन बातों का ध्यान रखें

सोना-चांदी खरीदते समय केवल रेट देखकर निर्णय लेना सही नहीं होता। सबसे पहले हॉलमार्क की जांच करना जरूरी है, क्योंकि यही शुद्धता की गारंटी देता है। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध होता है, लेकिन यह गहनों के लिए नहीं बल्कि निवेश के लिए उपयुक्त माना जाता है। 22 कैरेट सोना ज्वेलरी के लिए बेहतर होता है, क्योंकि इसमें मजबूती ज्यादा होती है।

खरीदारी करते समय मेकिंग चार्ज, GST, वेस्टेज चार्ज और एक्सचेंज पॉलिसी भी जरूर समझें। कई बार बाजार रेट कम होने के बावजूद बिल में कुल लागत ज्यादा हो जाती है। इसलिए दुकान पर जाने से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करना फायदेमंद रहता है। अगर आप निवेश के लिए खरीद रहे हैं, तो सिक्के या बार जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।

निवेशक क्या कर रहे हैं?

हाल के दिनों में निवेशकों का रुझान सुरक्षित विकल्पों की तरफ बढ़ा है। शेयर बाजार में अस्थिरता और वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोना एक बार फिर मजबूत विकल्प के रूप में उभरा है। खासतौर पर जब महंगाई और ब्याज दरों को लेकर सवाल बने रहते हैं, तब गोल्ड पोर्टफोलियो को संतुलन देने का काम करता है।

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोना लंबी अवधि में संपत्ति बचाने का अच्छा जरिया हो सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में इसमें उतार-चढ़ाव सामान्य है। इसलिए अक्षय तृतीया पर खरीदारी करते समय जल्दबाजी नहीं, बल्कि योजना बनाकर निवेश करना बेहतर रहता है। जिन लोगों को गहनों की जरूरत है, वे त्योहार के मौके पर खरीद सकते हैं, जबकि शुद्ध निवेशक SIP या डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्पों को भी देख सकते हैं।

शहरों के हिसाब से अलग क्यों होते हैं रेट?

सोना-चांदी के दाम हर शहर में थोड़े अलग हो सकते हैं। इसका कारण ट्रांसपोर्ट लागत, स्थानीय टैक्स, ज्वेलर्स मार्जिन, मांग और आपूर्ति का फर्क होता है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ और जयपुर जैसे शहरों में रेट अलग-अलग देखने को मिलते हैं। इसलिए किसी भी खरीदारी से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर देखें।

दिल्ली जैसे बड़े बाजार में रेट अक्सर देशभर के ट्रेंड को प्रभावित करते हैं। लेकिन अंतिम कीमत दुकान और बिलिंग के समय बदल सकती है। यही वजह है कि लोग अब ऑनलाइन रेट चेक करने के बाद ही ज्वेलरी शोरूम जाते हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ती है और गलतफहमी की संभावना कम होती है।

क्या अभी खरीदना सही रहेगा?

अक्षय तृतीया से पहले सोना-चांदी की कीमतों में आई नरमी खरीदारों के लिए मौका हो सकती है। हालांकि खरीद का फैसला सिर्फ मौजूदा रेट देखकर नहीं लेना चाहिए। अगर आपकी जरूरत शादी या त्योहार से जुड़ी है, तो किस्तों में या बजट तय करके खरीदारी करना समझदारी होगी। निवेश के लिहाज से भी एक ही बार में बड़ी खरीद करने की बजाय चरणबद्ध निवेश बेहतर माना जाता है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों के आधार पर सोने और चांदी में फिर से तेजी या कमजोरी आ सकती है। इसलिए जो लोग अक्षय तृतीया पर खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें लेटेस्ट रेट पर नजर बनाए रखनी चाहिए। अगर दाम अभी कुछ नरम हैं, तो यह आंशिक खरीदारी के लिए उपयुक्त समय हो सकता है।

बाजार में हलचल

कुल मिलाकर, अक्षय तृतीया से पहले सोना-चांदी के बाजार में हलचल बनी हुई है। दिल्ली में सोने और चांदी के रेटों में जो बदलाव दिख रहा है, वह निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए अहम है। सोना जहां परंपरा, आस्था और निवेश का प्रतीक बना हुआ है, वहीं चांदी भी छोटे निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनी रहती है। ऐसे में खरीदारी से पहले ताजा रेट, शुद्धता और बिलिंग शर्तों की जांच करना सबसे जरूरी कदम है।

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