इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘हाफ एनकाउंटर’ पर कड़ा प्रहार किया है। जस्टिस अरुण कुमार देशवाल ने स्पष्ट कहा कि अपराधियों को पैरों में गोली मारना प्रमोशन या सोशल मीडिया फेम के लिए अस्वीकार्य है। यह फैसला मिर्जापुर एनकाउंटर से जुड़ी जमानत याचिकाओं पर आया ।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने पुलिस को लताड़ा
प्रयागराज बेंच ने कहा, “सजा देना न्यायालय का विशेषाधिकार है, पुलिस का नहीं।” कोर्ट ने यूपी पुलिस की प्रवृत्ति पर चिंता जताई, जहां आरोपी के गैर-जरूरी अंगों में गोली मारकर इसे मुठभेड़ बताया जाता है। जस्टिस देशवाल ने जोर देकर कहा कि पुलिस कानून से ऊपर नहीं, और बिना आवश्यकता फायरिंग खतरनाक है ।

‘हाफ एनकाउंटर’ की प्रथा पर सवाल
कोर्ट ने पूछा कि क्या डीजीपी या गृह सचिव ने पैरों में गोली मारने के मौखिक/लिखित निर्देश दिए? मिर्जापुर के राजू उर्फ राजकुमार समेत तीन आरोपियों के केस में पुलिसकर्मी को चोट न लगने पर हथियार उपयोग संदिग्ध पाया। यह प्रथा वरिष्ठों को खुश करने या सबक सिखाने के लिए हो रही ।

यूपी एनकाउंटर का इतिहास

योगी राज में 500+ एनकाउंटर
2017 से अब तक यूपी पुलिस ने 500 से अधिक एनकाउंटर किए, जिसमें 200 अपराधी मारे गए। योगी आदित्यनाथ सरकार इसे ‘माफिया राज खत्म’ का हथियार बताती है। लेकिन विपक्ष इसे ‘जंगलराज’ कहता रहा। हाईकोर्ट का फैसला पुलिस की ‘जमानत फ्रीक्रिप्शन’ वाली छवि को चुनौती देता है ।

पिछले विवादास्पद एनकाउंटर
2024 में लखनऊ के महेश यादव कांड ने हंगामा मचाया। 2025 में कानपुर और मिर्जापुर केसों में पैरों में गोली चली। NHRC ने कई मामलों की जांच की। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के PUCL vs महाराष्ट्र (2014) फैसले का हवाला दिया ।

कोर्ट की 6-पॉइंट गाइडलाइंस

नए नियमों का पालन अनिवार्य
हाईकोर्ट ने एनकाउंटर में फायरिंग/गंभीर चोट पर ये निर्देश दिए:

  • स्वतंत्र मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य।
  • घायल आरोपी का बयान मजिस्ट्रेट/डॉक्टर से दर्ज।
  • FIR तुरंत दर्ज, वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना।
  • SP/SSP व्यक्तिगत जिम्मेदार; अवमानना कार्रवाई संभव।
  • प्रमोशन/पुरस्कार पर रोक।
  • सभी दस्तावेज कोर्ट में पेश।

जांच प्रक्रिया में सख्ती
कोर्ट ने नोट किया कि मिर्जापुर केस में घायल का बयान न दर्ज होना PUCL गाइडलाइंस का उल्लंघन। अब हर एनकाउंटर पर सख्त निगरानी होगी। SP/SSP जवाबदेह बनेंगे ।

कानूनी प्रभाव

पुलिस पर लगाम लगेगी?
वकीलों का मानना है कि यह फैसला यूपी पुलिस की कार्यशैली बदलेगा। एनकाउंटर कम हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को लागू करने से न्यायिक प्रक्रिया मजबूत होगी। लेकिन पुलिस संघों ने विरोध जताया ।

अन्य राज्यों पर असर
महाराष्ट्र, गुजरात में भी एनकाउंटर विवाद रहे। यूपी फैसला मिसाल बनेगा। केंद्र सरकार से कानून बनाने की मांग तेज हो सकती है। मानवाधिकार संगठन इसे स्वागतयोग्य बता रहे ।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

योगी सरकार की चुप्पी
बीजेपी ने अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया। विपक्षी नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, “कोर्ट ने पुलिस राज उजागर किया।” सपा ने विशेष सत्र की मांग की। कांग्रेस ने न्यायपालिका की सराहना की ।

मुख्यमंत्री योगी का पुराना स्टैंड
योगी ने 2025 में कहा था, “अपराधी जंगल के कानून पर चलते हैं, पुलिस आत्मरक्षा में फायरिंग करेगी।” अब कोर्ट ने इसे सीमित कर दिया। गृह विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया ।​

एनकाउंटर के फायदे-नुकसान

अपराध दर पर प्रभाव
एनकाउंटर से माफिया भागे, लेकिन फर्जी केस बढ़े। NCRB डेटा: यूपी में हत्या दर घटी, लेकिन कस्टडी डेथ बढ़ी। कोर्ट फैसला संतुलन लाएगा। विशेषज्ञ: “लोकतंत्र में एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग नहीं चलेगी” ।

पैरामीटरएनकाउंटर नीति (पहले)नई गाइडलाइंस के बाद
जांचआंतरिकमजिस्ट्रेट अनिवार्य 
जिम्मेदारीसामूहिकSP/SSP व्यक्तिगत 
पुरस्कारतुरंतरोक 
बयानवैकल्पिकडॉक्टर/मजिस्ट्रेट से 
असरअपराध कमन्याय मजबूत 

विशेषज्ञ विश्लेषण

कानूनी पक्ष
पूर्व जजों ने कहा, “पुलिस का काम अपराध रोकना, सजा नहीं।” CrPC धारा 46 के तहत न्यूनतम बल। संविधान अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन। PIL दायर हो सकती ।

सामाजिक प्रभाव
एनकाउंटर से जनता में भय, लेकिन विश्वास भी। अब ट्रायल बढ़ेंगे। RTI से एनकाउंटर डेटा मांगा जा सकता। मीडिया को सतर्क रहना होगा ।

आगे की कार्रवाई

अगली सुनवाई फरवरी में
कोर्ट ने डीजीपी, SSP मिर्जापुर को नोटिस जारी। राज्य से जवाब 15 दिनों में। अवमानना अगर गाइडलाइंस तोड़ीं। NHRC को सूचित ।

सुझाव

  • पुलिस ट्रेनिंग बढ़ाएं।
  • CCTV मंडेटरी।
  • इंडिपेंडेंट मॉनिटरिंग।

यह फैसला यूपी के कानून-व्यवस्था पर नया अध्याय लिखेगा। एनकाउंटर अब सावधानी से होंगे।
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