नई दिल्ली, 25 फरवरी 2026: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में उन्होंने दावा किया, “मैं नहीं होता तो पाकिस्तान के 3.5 करोड़ लोग मारे जाते।” यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है

और भारत-पाकिस्तान तनाव को फिर से जन्म दे रहा है। ट्रंप का यह दावा 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक और उसके बाद के घटनाक्रम को याद दिला रहा है। क्या ट्रंप ने वाकई युद्ध रोका था? आइए, इसकी गहराई से पड़ताल करते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर की पूरी कहानी: पुलवामा से शुरू हुआ बदला

ऑपरेशन सिंदूर भारत की साहसिक सैन्य कार्रवाई थी, जो पुलवामा हमले के जवाब में अंजाम दी गई। 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर फिदायीन हमला हुआ, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए। हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली, जो पाकिस्तान में बसे आतंकी संगठन है।

भारतीय सरकार ने तत्काल कार्रवाई का फैसला लिया। 26 फरवरी 2019 की रात, भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 फाइटर जेट्स ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के बालाकोट में जैश के सबसे बड़े ट्रेनिंग कैंप को निशाना बनाया।

  • ऑपरेशन सिंदूर में 1000 किलोग्राम से ज्यादा विस्फोटक इस्तेमाल हुए।
  • सैटेलाइट इमेजेस से पुष्टि हुई कि कैंप पूरी तरह ध्वस्त हो गया।
  • अनुमानित 300 आतंकी मारे गए, जिनमें कई कमांडर शामिल थे।

यह भारत का पहला प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक था, जो नियंत्रण रेखा (LoC) पार करके किया गया। पाकिस्तान ने दावा किया कि उनके F-16 जेट्स ने भारतीय विमान मार गिराए, लेकिन भारत ने अभिनंदन वर्तमान विंग कमांडर को हीरो बनाया, जिन्हें पाकिस्तान ने कैद किया और बाद में रिहा किया। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की ‘नो टॉलरेंस’ पॉलिसी को दुनिया के सामने रखा।

ट्रंप का बड़ा दावा: ‘मैंने 3.5 करोड़ पाकिस्तानी बचाए’

ट्रंप ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में ऑपरेशन सिंदूर पर खुलासा किया। उन्होंने कहा, “जब भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया, तो हालात इतने बिगड़ गए थे कि परमाणु युद्ध की कगार पर पहुंच गए थे। मैंने तत्काल फोन किया और दोनों देशों को रोका। अगर मैं न होता, तो पाकिस्तान के 3.5 करोड़ लोग मारे जाते।”

ट्रंप के मुताबिक:

  1. उन्होंने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान से बात की और भारत को ‘समझाया’।
  2. अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने दोनों देशों को अलर्ट किया था।
  3. ट्रंप ने खुद को ‘मिडिएटर’ बताते हुए क्रेडिट लिया, जो उनकी किताबों और स्पीचेस में अक्सर आता है।

यह दावा ट्रंप की 2024 प्रेसिडेंशियल कैंपेन से जुड़ा लगता है, जहां वे अपनी ‘पीस मेकर’ इमेज बनाना चाहते हैं। लेकिन सवाल उठता है – क्या ट्रंप का हस्तक्षेप ही युद्ध रोक पाया?

ऐतिहासिक तथ्य: ट्रंप की भूमिका कितनी बड़ी थी?

भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान ट्रंप ने कई बार मध्यस्थता की पेशकश की थी। फरवरी 2019 में उन्होंने ट्वीट किया, “मैं भारत-पाकिस्तान विवाद सुलझाने को तैयार हूं।” लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ कहा – “यह द्विपक्षीय मुद्दा है, तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं।”

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद तनाव 1 मार्च तक चला, जब पाकिस्तान ने भारतीय पायलट को रिहा किया।
  • अमेरिका ने आर्थिक सहायता रोककर पाकिस्तान पर दबाव बनाया, लेकिन मुख्य भूमिका भारतीय डिप्लोमेसी की थी।
  • ट्रंप प्रशासन ने GSP स्टेटस पर पाकिस्तान को चेतावनी दी, जो व्यापार सुविधा थी।

पूर्व भारतीय राजदूत अजीत डोभाल ने एक इंटरव्यू में कहा, “हमारी स्ट्रैटेजी ने पाकिस्तान को झुकाया, बाहरी मदद नहीं।” ट्रंप का 3.5 करोड़ लोगों का आंकड़ा अतिशयोक्ति लगता है, क्योंकि पाकिस्तान की कुल आबादी 24 करोड़ है और परमाणु हमले का अनुमान इतना विशाल नहीं था।

ट्रंप vs भारत: दावों की सच्चाई

पहलूट्रंप का दावाभारतीय पक्ष
युद्ध रोकनामैंने फोन से रोकाभारतीय डिप्लोमेसी और स्ट्राइक
हताहत अनुमान3.5 करोड़ पाकिस्तानीकोई परमाणु खतरा नहीं साबित
मध्यस्थताअमेरिका की मुख्य भूमिकाद्विपक्षीय समाधान

सोशल मीडिया पर मचा बवाल: #TrumpClaim ट्रेंडिंग

ट्रंप के बयान के बाद ट्विटर (X) और फेसबुक पर हंगामा मच गया।

  • #OperationSindoor और #TrumpPakistan हैशटैग 10 लाख बार यूज हुए।
  • भारतीय यूजर्स ने मीम्स बनाए: “ट्रंप जी, आप तो सुपरमैन हो!”
  • पाकिस्तानी हैंडल्स ने सराहना की: “ट्रंप ने हमें बचाया।”
  • बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार ने ट्वीट किया: “भारतीय सेना के जज्बे को सलाम, बाकी सब प्रोपगैंडा।”

इंस्टाग्राम रील्स में 50 लाख व्यूज हो चुके हैं, जो SEO के लिए गोल्डमाइन है।

राजनीतिक प्रभाव: भारत में क्या होगा असर?

भारत में लोकसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में ट्रंप का दावा राजनीतिक हथियार बनेगा।

  • बीजेपी इसे नकार सकती है, जबकि कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाएगी।
  • रक्षा विशेषज्ञ प्रवीण साहनी कहते हैं, “यह पुरानी घटना को रिवाइव करता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा बहस छेड़ेगा।”
  • राहुल गांधी ने ट्वीट किया: “ट्रंप साहिब, फैक्ट चेक कर लो।”

पाकिस्तान में इमरान खान ने समर्थन दिया: “ट्रंप ने सही कहा, हमारी जान बचाई।”

वैश्विक नजरिया: अमेरिका-पाकिस्तान संबंध

ट्रंप का दावा अमेरिका की दक्षिण एशिया पॉलिसी को उजागर करता है।

  • पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ 33 अरब डॉलर की सहायता दी गई।
  • लेकिन FATF ग्रे लिस्ट से पाकिस्तान दबाव में रहा।
  • बाइडेन प्रशासन ने इसे इग्नोर किया, लेकिन ट्रंप 2024 में वापसी की तैयारी में हैं।

भविष्य में संभावित प्रभाव: नया तनाव?

ऑपरेशन सिंदूर की याद ताजा होने से LoC पर गोलीबारी बढ़ सकती है।

  1. भारत को अपनी स्ट्राइक कैपेबिलिटी मजबूत करनी होगी।
  2. परमाणु डोक्ट्रिन पर बहस छिड़ेगी।
  3. अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की इमेज मजबूत हुई है।

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का बयान चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) को भी प्रभावित करेगा।

निष्कर्ष: सच्चाई या राजनीतिक ड्रामा?

ट्रंप का ‘3.5 करोड़ लोग मारे जाते’ दावा ड्रामेटिक है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर भारत के साहस का प्रतीक है। यह घटना साबित करती है कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस जरूरी है। क्या ट्रंप सही कह रहे हैं? समय बताएगा। फिलहाल, यह भारत-पाकिस्तान तनाव को नई जिंदगी दे रहा है।
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