भारत-यूरोप मौसम संकट: रिवर्स हवाएं ला रहीं नया हिमयुग

दुनिया भर में असामान्य ठंड, बाढ़ और सूखे का दौर चल रहा है, जिसका मुख्य कारण क्वासी बाइनरील ऑसिलेशन (QBO) हवाओं का असामान्य पलटाव है। ये हवाएं जमीन से 20-30 किमी ऊपर बहती हैं और नवंबर में ही रिवर्स गियर में चली गईं, जबकि सामान्यतः ये जनवरी-फरवरी में बदलती हैं।

वैज्ञानिक कारणों का खुलासा
QBO का जल्दी उलटना ध्रुवीय वोर्टेक्स को कमजोर कर रहा है, जिससे आर्कटिक की सर्द हवाएं भारत, यूरोप और अमेरिका तक दक्षिण की ओर सरक रही हैं। अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (AMOC) की कमजोरी से उत्तर अटलांटिक में ‘कोल्ड ब्लॉब’ बन रहा है, जो यूरोप को कनाडा जैसी ठंड की ओर धकेल सकता है। जलवायु परिवर्तन से आर्कटिक तेजी से गर्म हो रहा है, जो जेट स्ट्रीम को कमजोर कर ठंडी हवाओं को mid-latitudes में ला रहा है।
भारत और यूरोप पर पड़ रहा असर
भारत में 2025-26 में ठंडी लहरें और अनियमित मानसून की आशंका है, जबकि यूरोप में आइसलैंड सबसे पहले प्रभावित हो रहा है, जहां सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए योजना बना रही है। अमेरिका, अफ्रीका और सऊदी अरब में बाढ़-सूखे की मार जारी है, जो ग्लोबल सिस्टम के टूटने का संकेत देता है।
भविष्य की बड़ी चेतावनी
वैज्ञानिकों का मानना है कि AMOC का पूरी तरह रुकना यूरोप में नए हिमयुग जैसी स्थिति पैदा कर सकता है, हालांकि ये बदलाव अचानक हो सकते हैं। पोलर वोर्टेक्स का विघटन दिसंबर तक उत्तर गोलार्ध में ठंड बढ़ाएगा।

