भारत में बच्चों और युवाओं की औसत लंबाई में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, जो एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का संकेत दे रही है।

लैंसेट स्टडी और NFHS-5 सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि पोषण की कमी मुख्य वजह है, जिससे लाखों बच्चे अपनी आनुवंशिक क्षमता से छोटे रह जाते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर समय रहते सुधार न किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इससे प्रभावित होंगी।​

लंबाई घटने के आंकड़े जो डराते हैं

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के अनुसार, 5 साल से कम उम्र के 35% बच्चे स्टंटिंग (ठिगनेपन) का शिकार हैं, जो उनकी हड्डियों की ग्रोथ रोक देता है। पुरुषों की औसत लंबाई 1998 से 2022 तक महज 0.6 इंच बढ़ी, जबकि चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में 3 इंच से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। ग्रामीण इलाकों में यह समस्या 40% तक पहुंच जाती है, खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में।​

कुपोषण: सबसे बड़ा दुश्मन

बचपन में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन D और जिंक की कमी हड्डियों को कमजोर बनाती है। गर्भावस्था में मांओं का खराब पोषण बच्चे की ग्रोथ को स्थायी नुकसान पहुंचाता है। ICMR की रिपोर्ट कहती है कि 50% से ज्यादा भारतीय बच्चे आयरन की कमी से जूझ रहे हैं, जो ग्रोथ हार्मोन को प्रभावित करता है।​

आनुवंशिक बनाम पर्यावरणीय कारक

भारतीयों की जेनेटिक हाइट एशियाई औसत से कम है, लेकिन पर्यावरण 70% भूमिका निभाता है। गरीबी, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और आदिवासी क्षेत्रों में यह ज्यादा दिखता है। अमीर वर्ग में भी लंबाई स्थिर है, जबकि गरीबों में गिरावट जारी है।​

जंक फूड और आधुनिक जीवनशैली का जाल

फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड खाने से कैलोरी तो मिलती है, लेकिन पोषक तत्व नहीं। मोबाइल-टीवी पर 6-8 घंटे बिताने से व्यायाम की कमी हो जाती है। प्रदूषण हड्डी घनत्व घटाता है, जबकि गंदा पानी संक्रमण फैलाता है।​
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डॉक्टर्स की चेतावनी: स्टंटिंग का खतरा

पेडियाट्रिशियन डॉ. राजेश उप्पल बताते हैं कि स्टंटिंग से IQ 10-15 पॉइंट्स कम हो जाता है। हार्वर्ड स्टडी के मुताबिक, भारत में 20 करोड़ बच्चे प्रभावित हैं। लंबाई 18 साल तक बढ़ती है, उसके बाद रुक जाती है।​

वैश्विक तुलना: हम पीछे क्यों?

दक्षिण कोरिया ने 50 सालों में पोषण सुधार से औसत हाइट 6 इंच बढ़ाई। चीन ने दूध और प्रोटीन पर फोकस किया, जबकि भारत में दाल-रोटी पर निर्भरता बनी हुई है। यूरोप में बच्चे औसतन 5-6 इंच लंबे हैं।​

सरकार की योजनाएं: कितनी कारगर?

पोषण अभियान और मिड-डे मील से स्टंटिंग 10% घटी, लेकिन लक्ष्य से कोसों दूर। आंगनवाड़ी में प्रोटीन सप्लीमेंट्स की कमी है। विशेषज्ञ मांग कर रहे हैं कि स्कूलों में न्यूट्रिशन एजुकेशन अनिवार्य हो।​

बचाव के आसान उपाय

  • बैलेंस्ड डाइट: दूध, अंडा, पनीर, हरी सब्जियां रोजाना लें।
  • व्यायाम: जंपिंग, स्विमिंग, योग से ग्रोथ हार्मोन बढ़ता है।
  • नींद: 8-10 घंटे की गहरी नींद जरूरी।
  • सूरज की रोशनी: विटामिन D के लिए 15-20 मिनट धूप लें।

माता-पिता की जिम्मेदारी

गर्भावस्था से ही पोषण पर ध्यान दें। जंक फूड बंद करें, घर का खाना दें। नियमित चेकअप करवाएं ताकि कमी जल्दी पकड़ में आ जाए।​

भविष्य की चुनौतियां

क्लाइमेट चेंज से फसलें प्रभावित होंगी, पोषण और मुश्किल होगा। शहरीकरण से व्यायाम कम हो रहा है। 2030 तक स्टंटिंग को 25% तक लाने का लक्ष्य है, लेकिन रफ्तार धीमी है।​

विशेषज्ञ सलाह: अभी जागें

डॉ. अनुराग भाटिया कहते हैं, “पोषण सुधार से 2-3 इंच हाइट बढ़ सकती है।” समय रहते बदलाव लाएं, वरना पीढ़ियां छोटी रह जाएंगी। यह सिर्फ हाइट की नहीं, राष्ट्र स्वास्थ्य की बात है।
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