टूट रही इंडियन टेक्टोनिक प्लेट: हिमालय-तिब्बत क्षेत्र में भूकंप का बढ़ा खतरा, वैज्ञानिकों की चेतावनी

नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने एक ताजा अध्ययन में चेतावनी दी है कि इंडियन टेक्टोनिक प्लेट धीरे‑धीरे टूट रही है, जिससे आने वाले वर्षों में हिमालय-तिब्बत क्षेत्र में भूकंप का खतरा और बढ़ सकता है। भूवैज्ञानिकों के मुताबिक, भारतीय प्लेट हर साल लगभग 5 सेमी उत्तर दिशा में खिसक रही है, जिससे यह यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है — यही टक्कर हिमालय पर्वत श्रृंखला के बनने का मुख्य कारण है।

प्लेट के नीचे हो रही दरारें चिंता का कारण
अध्ययन में बताया गया है कि भारतीय प्लेट के अंदर गहराई में सूक्ष्म दरारें बनने लगी हैं। इन दरारों के फैलने से प्लेट के बीच “अंतर-खंडीय विभाजन” (intra-plate deformation) की स्थिति बन रही है, जो बड़े भूकंपीय झटकों का संकेत देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह टूटन भविष्य में प्लेट के विभाजन का कारण भी बन सकती है।
भूकंप संभावित ज़ोन हुआ और संवेदनशील
भू‑वैज्ञानिक डेटा के मुताबिक, हिमालय और तिब्बत पठार पहले से ही उच्च‑भूकंपीय ज़ोन (High Seismic Zone) में आते हैं। हाल के महीनों में नेपाल, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में दर्ज हुए कई छोटे भूकंप इसी तनाव का परिणाम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन इलाकों में ऊर्जा का यह संचय जारी रहा, तो भविष्य में बड़ा भूकंप आ सकता है।
वैज्ञानिकों ने दिए सुरक्षा उपायों के सुझाव
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी और नेशनल सेंटर फॉर सिस्मिक रिसर्च के वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि भूकंप‑प्रवण इलाकों में भवन निर्माण मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। वहीं, स्थानीय प्रशासन को आपदा प्रबंधन योजनाओं को अपडेट करने और आम नागरिकों को भूकंप से बचाव के प्रति जागरूक करने की सलाह दी गई है।
क्या कहना है विशेषज्ञों का
भूभौतिक विज्ञानी डॉ. आर.के. सिंह के अनुसार, “प्लेट सीमाओं पर बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में अगले कुछ दशकों तक भूकंप का खतरा बना रहेगा। हालांकि, समय की सटीक भविष्यवाणी अभी भी वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बनी हुई है।”

