इंदौर में संवेदनशील हादसा: गाढ़े दूध में नल का पानी मिलाने से 5 महीने के मासूम की मौत, जांच में खुला बड़ा राज

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक ऐसी दुखद खबर आई है जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। यहां रहने वाले एक दंपत्ति के घर 10 साल की प्रार्थनाओं और उम्मीदों के बाद पांच महीने पहले बेटे अव्यान का जन्म हुआ था।

परिवार में खुशियों का माहौल था — रिश्तेदार और पड़ोसी तक बच्चे को “घर का चिराग” कहते थे। लेकिन नए साल से ठीक पहले आई एक अनहोनी ने परिवार की दुनिया ही उजाड़ दी।
गाढ़े दूध को पचाने के लिए मां ने किया था पानी का इस्तेमाल
सूत्रों के मुताबिक, घटना की शुरुआत उस समय हुई जब अव्यान की मां ने बच्चे को फॉर्मूला मिल्क तैयार कर पिलाया। दूध गाढ़ा लगने पर उसने सोचा कि थोड़ा नल का पानी मिलाने से दूध पतला और पचने में आसान हो जाएगा। लेकिन उसे यह नहीं पता था कि वही पानी उसके लाड़ले के लिए ‘जहर’ साबित होगा।
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दूध पीने के बाद बिगड़ी तबीयत
दूध पिलाने के कुछ समय बाद ही अव्यान की तबीयत अचानक खराब होने लगी। उसे उल्टियां और तेज बुखार आने लगा। परिवार घबरा गया और बच्चे को पास के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच में बताया कि बच्चे को गंभीर संक्रमण हुआ है। कुछ घंटों में ही उसकी हालत नाजुक हो गई और डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
अस्पताल रिपोर्ट में खुलासा: नल के पानी में था खतरनाक संक्रमण
डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि संक्रमण का कारण दूषित पानी था। नल से लिए गए सैंपल की जांच में ई.कोलाई (E. coli) और अन्य हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए। डॉ. आलोक मिश्रा, जो बच्चा वार्ड में वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ हैं, उन्होंने बताया कि “पांच महीने का बच्चा बहुत संवेदनशील अवस्था में होता है। थोड़ी सी भी अशुद्ध चीज उसके शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। दूध में बिना उबाले पानी का उपयोग नहीं करना चाहिए।”
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने ली कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और संबंधित इलाके के नल जल सैंपल लिए। स्वास्थ्य विभाग ने भी जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दूषित पानी की आपूर्ति का स्रोत पहचानकर जल्द से जल्द सुधार किया जाएगा।
परिवार का मातम, इलाके में शोक की लहर
पांच महीने के अव्यान की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। रिश्तेदार और पड़ोसी लगातार परिजनों को सांत्वना दे रहे हैं। अव्यान के पिता रोहित (काल्पनिक नाम) ने बताया कि “हमने सोचा भी नहीं था कि दूध में थोड़ा-सा पानी मिलाना इतना बड़ा खतरा बन जाएगा। अब तो हमें डर लगता है कि घर का पानी भी भरोसेमंद नहीं रहा।”
डॉक्टरों की चेतावनी और विशेषज्ञों के सुझाव
शिशुरोग विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए केवल उबला और ठंडा किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करना चाहिए। अगर आप फॉर्मूला मिल्क बना रहे हैं, तो पानी को पहले उबालें, फिर ठंडा करके प्रयोग करें।
- पानी की बोतलें या फिल्टर नियमित रूप से साफ करें।
- लंबे समय तक रखे हुए दूध का सेवन न कराएं।
- नल का पानी सीधे उपयोग न करें, खासकर नवजात शिशुओं के लिए।
प्रशासन ने जारी की चेतावनी
इंदौर नगर निगम की जल विभाग अधिकारी दीप्ति चौहान ने बताया कि संबंधित क्षेत्र में जल पाइपलाइन की लीकेज की शिकायत पहले भी आई थी। फिलहाल पानी की आपूर्ति रोककर सफाई प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि “अगर नल के पानी में बदबू या धुंधलापन दिखे, तो तुरंत शिकायत करें और तब तक उसका उपयोग न करें।”
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का संदेश
जनस्वास्थ्य विभाग ने इस घटना को चेतावनी मानते हुए सलाह दी है कि बरसों से चल रही पानी की पाइपलाइन और टंकी की नियमित जांच जरूरी है। कई बार जंग लगे पाइपों में बैक्टीरिया पनप जाते हैं, जो धीरे-धीरे संक्रमण फैला सकते हैं।

