दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक बार फिर तनावपूर्ण माहौल बन गया है। छात्रसंघ (JNUSU) के प्रस्तावित ‘लॉन्ग मार्च’ ने कैंपस को गरमा दिया, जहां 400-500 छात्र शिक्षा मंत्रालय तक पहुंचने पर अड़े रहे। आधी रात के हिंसक बवाल, पुलिस हिरासत और नकाबपोशों की मौजूदगी ने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया।

यह विवाद कुलपति संतिश्री धुलिपुडी पंडित के कथित जातिवादी बयानों से शुरू हुआ, जो अब छात्र निष्कासन, फंडिंग कटौती और UGC नियमों पर केंद्रित हो गया। आइए जानते हैं JNU मार्च विवाद 2026 की पूरी टाइमलाइन, कारण, प्रभाव और राजनीतिक रंग।

JNU मार्च का बैकग्राउंड: कैसे भड़का विवाद?

JNU का इतिहास हमेशा से छात्र आंदोलनों का गढ़ रहा है। 2026 में कुलपति संतिश्री धुलिपुडी पंडित के एक इंटरव्यू में दिए बयान को छात्रों ने जातिवादी टिप्पणी करार दिया। उन्होंने रोहित वेमुला एक्ट और दलित आरक्षण पर सवाल उठाए, जिससे वामपंथी संगठन (जैसे AISA, SFI) भड़क उठे।

JNUSU ने मांग रखी- कुलपति का इस्तीफा, निष्कासन आदेश रद्द, छात्रावास सुधार, वाई-फाई बहाली, पुस्तकालय निर्माण और UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 लागू करना। 15 फरवरी से धरने शुरू हुए, जो 26 फरवरी को मार्च में बदल गए। प्रशासन ने कैंपस से बाहर प्रदर्शन की मनाही की, लेकिन छात्रों ने बैरिकेड तोड़ दिए।

पिछले हफ्तों में ABVP और लेफ्ट गुटों के बीच वैचारिक टकराव बढ़ा। 22 फरवरी को ‘समता जुलूस’ के दौरान पहली झड़प हुई, जहां पथराव और लाठियां चलीं। यह JNU हिंसा 2026 की शुरुआत थी।

26 फरवरी: मार्च का ऐलान और शुरुआती टकराव

26 फरवरी सुबह JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने घोषणा की- “शिक्षा मंत्रालय तक लॉन्ग मार्च, कुलपति हटाओ!” लगभग 500 छात्र कैंपस गेट पर जमा हुए। पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगाई, लेकिन दोपहर 2 बजे छात्र आगे बढ़े। वीडियो वायरल हुए जहां छात्र बैरिकेड तोड़ते दिखे।

दिल्ली पुलिस ने पानी की बौछारें और हल्का बल प्रयोग किया। छात्रों का आरोप- महिलाओं पर अत्याचार। पुलिस का दावा- प्रदर्शनकारी हिंसक थे। शाम तक 50+ छात्र हिरासत में, लेकिन रात में बवाल चरम पर पहुंचा।

आधी रात का बवाल: नकाबपोशों का रहस्य

रात 1:30 बजे कैंपस में अंधेरा छंटा नहीं था। लेफ्ट छात्र ‘समता मार्च’ कर रहे थे कि नकाबपोश लोग घुसे। लाठियां, डंडे, पत्थरबाजी शुरू। ABVP ने लेफ्ट पर हमला किया, जबकि SFI ने ABVP को दोषी ठहराया। कई छात्र घायल, भगदड़ मची।​

सीसीटीवी फुटेज में नकाबपोश दिखे, जिनकी पहचान नहीं हो सकी। JNU प्रशासन ने बयान जारी- “अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं।” घायलों को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। यह JNU आधी रात बवाल 2026 सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा।

वामपंथी संगठनों ने कहा, “ABVP गुंडों ने आंदोलन तोड़ने की साजिश रची।” ABVP का जवाब- “लेफ्ट ने हिंसा भड़काई।” नकाबपोशों की मौजूदगी ने साजिश के सवाल उठाए।

पुलिस कार्रवाई: 51 हिरासत, FIR और घायल पुलिसकर्मी

27 फरवरी सुबह तक 51 छात्र हिरासत में, जिनमें अदिति मिश्रा शामिल। ACP समेत 25 पुलिसकर्मी घायल। दिल्ली पुलिस ने BNS की 7 धाराओं (115(2), 126(2), 191(2) आदि) और PDP एक्ट में FIR दर्ज की।

पुलिस डीसीपी ने कहा, “छात्रों ने बैरिकेड तोड़े, थाने घेरा।” छात्रसंघ ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” बताया। हिरासत वाले छात्रों को बाद में रिहा किया गया, लेकिन तनाव बरकरार।

JNU प्रशासन ने कक्षाएं सामान्य रखीं, लेकिन कैंपस सील। बाहर राजनीतिक दलों ने बयानबाजी शुरू कर दी।

छात्र मांगें: गहराई से समझें विवाद के केंद्र

  • कुलपति इस्तीफा: जातिवादी बयान पर माफी न मिलने से नाराजगी।
  • निष्कासन रद्द: JNUSU पदाधिकारियों पर आदेश।
  • रोहित एक्ट लागू: दलित छात्रों के लिए सुरक्षा।
  • UGC नियम: इक्विटी रेगुलेशन 2026।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर: छात्रावास, मेस, वाई-फाई, लाइब्रेरी।

ये मांगें पिछले एक महीने से चल रही हैं। छात्र कहते हैं, “प्रशासन तानाशाही चला रहा।” प्रशासन का पक्ष- “नियमों का पालन जरूरी।”

राजनीतिक रंग: लेफ्ट vs राइट की जंग

JNU हमेशा राजनीति का केंद्र। ABVP (RSS से जुड़े) और लेफ्ट (CPI, AISA) के बीच पुरानी दुश्मनी। विपक्ष ने पुलिस पर निशाना साधा, सत्ताधारी पक्ष ने छात्रों को फर्जी आंदोलनकारी कहा। कांग्रेस, AAP ने समर्थन जताया।

कुलपति पंडित पर BJP समर्थन के आरोप। यह JNU राजनीतिक विवाद 2026 बन गया। सोशल मीडिया पर #JNUSolidarity vs #StopJNUViolence ट्रेंड।​

JNU का ऐतिहासिक संदर्भ: पुराने आंदोलनों से सबक

2019 का CAA विरोध, 2020 की फीस हाइक, अब 2026 का मार्च। JNU हमेशा बुद्धिजीवी बहस का मैदान। लेकिन हिंसा बढ़ रही- 2019 में कट्टे चले, 2026 में नकाबपोश। प्रशासन सख्ती बरत रहा।

शिक्षा मंत्री ने बयान- “शांति बनाए रखें।” लेकिन छात्रसंघ मार्च जारी रखने को तैयार।

प्रभाव: कैंपस लाइफ पर असर

कक्षाएं प्रभावित, परीक्षाएं टालीं। छात्र भयभीत, अभिभावक चिंतित। ऑनलाइन क्लासेस शुरू। JNU रैंकिंग पर असर का डर। आर्थिक नुकसान- सुरक्षा पर खर्च।

महिला छात्राओं ने #MeTooJNU शुरू किया, पुलिस बल प्रयोग पर।

आगे क्या? संभावित परिणाम

  • जांच समिति: प्रशासन नकाबपोशों की तलाश में।
  • कोर्ट केस: छात्र हिरासत को चुनौती।
  • आंदोलन तेज: JNUSU नया मार्च प्लान।
  • सरकारी हस्तक्षेप: शिक्षा मंत्रालय नोटिस।

विशेषज्ञ कहते हैं, संवाद ही समाधान। लेकिन JNU में टकराव की परंपरा गहरी।

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