कानपुर, 13 अप्रैल 2026 : उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने रैकेट के मुख्य सरगना रोहित को गिरफ्तार कर लिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि खुद को एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट बताने वाला रोहित असल में सिर्फ 12वीं पास है।

इस अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट ने सैकड़ों गरीब लोगों की किडनी चुराकर अमीर मरीजों को बेचने का धंधा चला रखा था। कानपुर पुलिस की सतर्कता से इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ, जो न केवल UP बल्कि दिल्ली, लखनऊ समेत कई शहरों तक फैला था। इस खबर ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है।

कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पूरा खुलासा: कैसे शुरू हुआ यह काला कारोबार?

कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जड़ें 3 साल पहले की हैं। रोहित नामक 28 वर्षीय युवक ने कानपुर के एक छोटे से इलाके से अपना धंधा शुरू किया। वह खुद को प्रोफेशनल एनेस्थीसिया डॉक्टर बताता था, लेकिन हकीकत में उसकी शिक्षा सिर्फ 12वीं कक्षा तक सीमित थी। पुलिस जांच के अनुसार, रोहित ने इंटरनेट से बेसिक मेडिकल नॉलेज सीखी और फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए।

इस रैकेट में शामिल सदस्यों ने गरीब मजदूरों, रिक्शा चालकों और ग्रामीण इलाकों के लोगों को निशाना बनाया। उन्हें झूठे वादों से लालच दिया जाता था। प्रति किडनी 5-8 लाख रुपये का लालच दिखाकर उनकी किडनी खरीदी जाती थी, जबकि अमीर मरीजों को यही किडनी 20-25 लाख में बेची जाती। पिछले 2 वर्षों में इस गिरोह ने कम से कम 150 अवैध ट्रांसप्लांट कर चुका था।

कानपुर पुलिस के एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने बताया, “रोहित ने कानपुर के 4 प्राइवेट हॉस्पिटलों के साथ मिलकर यह रैकेट चलाया। उसके पास से 50 फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट, 20 लीटर एनेस्थीसिया दवाएं और किडनी स्टोरेज के उपकरण बरामद हुए हैं।”

रोहित कौन है? 12वीं पास से फर्जी डॉक्टर बनने की पूरी कहानी

रोहित कानपुर के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखता है। 12वीं के बाद उसने मेडिकल लाइन में दाखिला लेने की कोशिश की, लेकिन फेल हो गया। फिर उसने छोटे-मोटे मेडिकल स्टोर पर काम शुरू किया। धीरे-धीरे उसने अवैध दवाओं का कारोबार चालू कर दिया।

पुलिस पूछताछ में रोहित ने कबूल किया:

  • “मैंने यूट्यूब और ऑनलाइन कोर्स से एनेस्थीसिया इंजेक्शन लगाना सीखा।”

  • “कोई मरीज जाग न जाए, इसके लिए मैं सस्ती दवाएं इस्तेमाल करता था।”

  • “गरीबों को 5 लाख देकर चुप करा दिया जाता था।”

रोहित के गिरोह में 12 सदस्य थे, जिनमें 2 रिटायर्ड नर्सें और 3 ड्राइवर शामिल थे। वे कानपुर के अलावा लखनऊ, आगरा और दिल्ली के हॉस्पिटलों में ऑपरेशन करवाते थे। रोहित की कमाई इतनी थी कि उसने कानपुर में 2 लग्जरी फ्लैट और 3 लग्जरी कारें खरीद लीं।

रैकेट की कार्यप्रणाली: स्टेप बाय स्टेप तरीके से धोखाधड़ी

कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट बेहद सोचा-समझा था। यहां इसका पूरा फ्लोचार्ट है:

  1. डोनर की तलाश: गरीब इलाकों में एजेंट घूमते और 3-5 लाख के लालच से लोगों को लुभाते।

  2. फर्जी डॉक्यूमेंटेशन: आधार कार्ड और फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनाकर डोनर को ‘रिश्तेदार’ दिखाया जाता।

  3. ऑपरेशन: कानपुर या लखनऊ के छोटे हॉस्पिटलों में रोहित एनेस्थीसिया देता, जबकि असली सर्जन बाहर से बुलाए जाते।

  4. ट्रांसप्लांट: अमीर मरीज (ज्यादातर गुजरात और महाराष्ट्र से) को किडनी ट्रांसप्लांट की जाती।

  5. पैसे का बंटवारा: 50% रोहित, 20% हॉस्पिटल, बाकी एजेंटों में।

इस रैकेट से कानपुर पुलिस को 2 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन के सबूत मिले हैं। कई डोनर अब किडनी फेलियर से जूझ रहे हैं।

कानपुर पुलिस की साहसी कार्रवाई: कैसे पकड़ा गया सरगना?

12 अप्रैल को एक डोनर की शिकायत पर पुलिस हरकत में आई। कानपुर के लालबंगला थाने की टीम ने 48 घंटे की सतर्कता बरतकर रोहित को उसके फार्म हाउस से धर दबोचा।

  • बरामद सामान: 15 नकली पासपोर्ट, 10 लाख कैश, 5 किडनी स्टोरेज कंटेनर।

  • अब तक 7 गिरफ्तारियां।

  • 20 मरीजों से पूछताछ शुरू।

उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने कानपुर पुलिस को बधाई दी और全省 में ऐसे रैकेट्स की जांच के आदेश दिए।

किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का बड़ा खतरा: स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय

डॉ. राजेश कुमार, कानपुर के प्रमुख नेफ्रोलॉजिस्ट ने कहा, “अवैध ट्रांसप्लांट से 70% डोनर 5 साल में किडनी फेल हो जाते हैं। रोहित जैसे फर्जी डॉक्टर जानलेवा साबित होते हैं।”

एनएचएम के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल 1 लाख किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत है, लेकिन सिर्फ 5 हजार लीगल होते हैं। बाकी अवैध रैकेट्स में। UP में पिछले 5 सालों में 200 ऐसे केस दर्ज हुए।

रोहित गिरफ्तारी के बाद प्रभाव:

  • कानपुर के हॉस्पिटल्स पर छापे।

  • किडनी डोनेशन नियम सख्त।

  • गरीब डोनर्स को मुआवजा प्लान।

अन्य शहरों में किडनी रैकेट: कानपुर केस से सबक

यह पहला केस नहीं। दिल्ली के संगम विहार (2024), कोलकाता (2023) और चेन्नई में ऐसे रैकेट पकड़े गए। कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट सबसे बड़ा लग रहा है। केंद्र सरकार ने ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एक्ट में सख्ती की है।

किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट से बचाव के उपाय: जनता के लिए गाइड

  • हमेशा सरकारी या NABH सर्टिफाइड हॉस्पिटल चुनें।

  • डोनर-रिसीवर का रिश्ता साबित करें।

  • NOTTO पोर्टल से चेक करें।

  • संदिग्ध डॉक्टर से बचें।

FAQ: कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट से जुड़े सवाल

Q1: रोहित की सजा क्या होगी?
A: ट्रांसप्लांट एक्ट के तहत 10 साल जेल और 5 लाख जुर्माना।

Q2: कितने डोनर प्रभावित?
A: कम से कम 150, जांच जारी।

Q3: रिपोर्ट कैसे करें?
A: 112 हेल्पलाइन या लोकल पुलिस।

यह कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पूरा मामला है। अगर आपको या आपके जानने वाले को ऐसी समस्या हो, तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें। स्वास्थ्य रहें, सावधान रहें!

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