प्योंगयांग, 29 मार्च 2026: उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन ने एक बार फिर वैश्विक पटल पर अपनी सैन्य ताकत का जोरदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने उच्च क्षमता वाले ‘सुपर पावर’ मिसाइल इंजन का सफल ग्राउंड जेट परीक्षण किया, जो कथित तौर पर पूरे अमेरिकी महाद्वीप को निशाने में लेने की क्षमता रखता है। यह इंजन 2500 किलोटन थ्रस्ट वाला ठोस ईंधन आधारित है, जो उत्तर कोरिया की ICBM क्षमताओं को नई ऊंचाई प्रदान कर सकता है।

उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी KCNA के अनुसार, किम जोंग-उन ने खुद परीक्षण स्थल पर पहुंचकर इसकी निगरानी की। यह परीक्षण देश के पांच वर्षीय सैन्य विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सामरिक हमले के साधनों को मजबूत बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इंजन हाइपरसोनिक स्पीड वाली मिसाइलों के लिए डिजाइन किया गया है, जो अमेरिका के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकता है।

मिसाइल इंजन की तकनीकी खासियतें और क्षमताएं

नया ‘सुपर पावर’ इंजन कंपोजिट कार्बन फाइबर सामग्री से निर्मित है, जो इसे पहले के इंजनों से कहीं अधिक शक्तिशाली बनाता है। पिछले सितंबर में हुए एक समान परीक्षण में थ्रस्ट 1971 किलोटन था, लेकिन इस बार यह 2500 किलोटन तक पहुंच गया। परीक्षण के दौरान इंजन ने लगातार 10 मिनट से अधिक समय तक जलाया रखा, जो इसकी स्थिरता और विश्वसनीयता को प्रमाणित करता है।

यह सॉलिड-फ्यूल इंजन है, जिसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी गुप्तता है। लॉन्च से ठीक पहले इसे पहचानना लगभग असंभव होता है, क्योंकि इसमें लिक्विड फ्यूल की तरह पहले से ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ती। विशेषज्ञों के अनुसार, इस इंजन से लैस ICBM की रेंज 10,000 से 15,000 किलोमीटर हो सकती है, जो न केवल अमेरिका के मुख्यभूमि को बल्कि गुआम और अलास्का जैसे क्षेत्रों को भी निशाना बना सकती है।

उत्तर कोरिया ने हाल के वर्षों में हासोंग-17 जैसी ICBM का परीक्षण किया है, जिनकी रेंज भी इसी स्तर की है। यह इंजन उन मिसाइलों को अपग्रेड करने में सक्षम है, जिससे परमाणु हथियारों को ले जाने की क्षमता बढ़ जाएगी। किम जोंग-उन ने इसे ‘राष्ट्रीय गौरव’ और ‘सामरिक विजय’ का प्रतीक बताया है।

किम जोंग-उन का सैन्य कार्यक्रम: पृष्ठभूमि

किम जोंग-उन का शासनकाल उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम का स्वर्ण युग रहा है। 2017 से अब तक दर्जनों ICBM, SLBM (सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल) और हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण हो चुका है। मार्च 2026 में ही उत्तर कोरिया ने 5000 टन के विध्वंसक युद्धपोत से क्रूज मिसाइलें दागीं और परमाणु क्षमता वाले रॉकेट लॉन्चर का परीक्षण किया।

पिछले साल अक्टूबर में हासोंग-17 का परीक्षण अमेरिका तक परमाणु हमला करने की क्षमता दिखा चुका था। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह नया परीक्षण रणनीतिक समय पर हुआ है। किम ने इसे ‘दुश्मनों को सबक सिखाने’ वाला हथियार कहा, जो अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान को चेतावनी देता है।

उत्तर कोरिया का पांच वर्षीय योजना सामरिक हमले के साधनों पर केंद्रित है। इसमें मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (MRLS) जैसे 600 mm कैलिबर वाले हथियार भी शामिल हैं, जिनका हाल ही में परीक्षण किम और उनकी बेटी जू ए ने देखा। ये कदम देश की अर्थव्यवस्था पर निर्भरता के बावजूद सैन्य प्राथमिकता को दर्शाते हैं।

अमेरिका और सहयोगियों की प्रतिक्रिया

अमेरिका ने इस परीक्षण को ‘खतरनाक उकसावा’ करार दिया है। व्हाइट हाउस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आपात बैठक बुलाने की मांग की, जबकि पेंटागन ने अपनी मिसाइल डिफेंस प्रणालियों की समीक्षा शुरू कर दी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इसे ईरान युद्ध के संदर्भ में गंभीर बताया।

दक्षिण कोरिया ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा और जापान के साथ संयुक्त अभ्यास तेज कर दिए। दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसी ने अनुमान लगाया कि उत्तर कोरिया ने हाल ही में 10 बैलिस्टिक मिसाइलें जापान सागर में दागी थीं। जापान ने भी अपनी पीडीएस (पेट्रियट डिफेंस सिस्टम) सक्रिय की।

विशेषज्ञों का कहना है कि सॉलिड-फ्यूल इंजन अमेरिकी THAAD और Aegis सिस्टम के लिए चुनौती हैं, क्योंकि इन्हें ट्रैक करना कठिन होता है। कोरिया एयरोस्पेस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर चांग यंग कियुन ने कहा कि यह हाइपरसोनिक मिसाइलें 6200 किमी/घंटा की रफ्तार से कम ऊंचाई पर उड़ सकती हैं।

वैश्विक प्रभाव और भू-राजनीतिक तनाव

यह परीक्षण एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव को चरम पर ले जा रहा है। रूस और चीन ने टिप्पणी से इनकार किया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सहयोग जारी है। ईरान के हाइपरसोनिक दावों के बाद उत्तर कोरिया का कदम ‘एक्सिस ऑफ एविल’ की याद दिलाता है।

संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया अपनी मिसाइल महत्वाकांक्षाओं पर कायम है। अमेरिका ने नए प्रतिबंधों की धमकी दी, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्यक्रम रोकना मुश्किल है। वैश्विक शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा गया, खासकर रक्षा क्षेत्र में।

भविष्य में और परीक्षण संभावित हैं। यदि यह इंजन हथियारीकृत हो गया, तो वैश्विक शक्ति संतुलन बदल सकता है। भारत जैसे देश भी कोरियाई प्रायद्वीप पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इससे एशियाई स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

उत्तर कोरिया की सैन्य रणनीति का विश्लेषण

उत्तर कोरिया की रणनीति ‘डिटरेंस बाय फियर’ पर आधारित है। किम जोंग-उन ने पिता किम जोंग-इल की नीतियों को आगे बढ़ाया है। सॉलिड-फ्यूल तकनीक रूस और ईरान से प्रेरित लगती है। हाल के परीक्षणों में क्रूज मिसाइलें, तोपखाने और नौसैनिक हथियार शामिल हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, यह इंजन मिरव (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) के साथ जोड़ा जा सकता है, जो एक मिसाइल से कई टारगेट हिट करने की क्षमता देगा। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स में चेतावनी दी गई है कि उत्तर कोरिया 50-60 परमाणु हथियार रखता है।

विशेषज्ञों की राय और भविष्यवाणियां

प्रोफेसर चांग यंग कियुन ने कहा, “यह इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों को ICBM में बदलने की दिशा है।” अमेरिकी थिंक टैंक CSIS ने अनुमान लगाया कि 2027 तक उत्तर कोरिया पूरी तरह परिपक्व ICBM तैनात कर सकता है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने इसे ‘अमानवीय कृत्य’ कहा।

क्या यह परीक्षण केवल दिखावा है? नहीं, तकनीकी डिटेल्स वास्तविकता दर्शाते हैं। अगले महीनों में समुद्री परीक्षण हो सकते हैं। वैश्विक समुदाय को कूटनीति पर जोर देना चाहिए।

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