भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए गैरी कर्स्टन का नाम विश्व कप‑विजेता कोच के रूप में हमेशा याद रहेगा। 2011 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने वनडे वर्ल्ड कप जीता था और इस जीत के पीछे ज़्यादातर विशेषज्ञ कोचिंग सिर्फ एक ही नाम से जुड़ी है – दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज़ व इंटरनेशनल‑क्लास कोच गैरी कर्स्टन। उनकी कोचिंग‑स्टाइल, टीम प्रोसेस और खिलाड़ियों पर भरोसे पर आधारित विश्वास भारत के

भीतर लंबे समयतक बना रहा। 

2024 में इसी गैरी कर्स्टन को पाकिस्तान क्रिकेट टीम का मुख्य कोच (व्हाइट‑बॉल) बनाया गया, लेकिन महज़ 6 महीने बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अब उन्होंने खुलकर कहा है कि पाकिस्तान छोड़ने का फैसला “बाहरी दखलअंदाज़ी” और “जहरीला वर्क कल्चर” की वजह से ही ज़रूरी हुआ।

कर्स्टन को पाकिस्तान में क्या भरोसा दिया गया था?

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने गैरी कर्स्टन को 2024 में दो साल की अवधि के लिए “हेड कोच” घोषित किया था, जिसमें वनडे और टी20 टीम की ज़िम्मेदारी शामिल थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, PCB की तरफ से यह दावा भी किया गया था कि टीम‑मैनेजमेंट और चयन में उन्हें पूरी आज़ादी दी जाएगी ताकि वह भारत की तरह ही टीम को लंबे समय तक लगातार बना सकें।

लेकिन कर्स्टन ने अब माना है कि असलियत उस वादे से बिल्कुल अलग थी। वह कुछ ही हफ्तों में यह समझ गए थे कि पाकिस्तान में “कोच‑फर्स्ट” दृष्टिकोण नहीं, बल्कि “बोर्ड‑फर्स्ट” और “पॉलिटिकल‑इमेज‑फर्स्ट” दृष्टिकोण चलता है।

क्यों छोड़ा पाकिस्तान का साथ? मुख्य कारण

गैरी कर्स्टन ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें पाकिस्तान में इतना बाहरी दखल देखकर सदमा हुआ, जिसे वह अपने पूरे कोचिंग करियर में शायद पहले कभी नहीं झेल पाए थे। उन्होंने कहा कि टीम के चयन, रणनीति, आराम‑समय और यहां तक कि प्रेस कॉन्फ्रेंस टोन तक पर बोर्ड और बाहरी लोगों का इतना अधिक नियंत्रण था कि कोच की आवाज़ वास्तव में दब जाती थी।

इन्हीं हालातों में गैरी ने अक्टूबर 2024 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि उनका कार्यकाल दो साल का होना था। उन्होंने यह भी कहा कि फिर चयन पैनल से हटने के बाद उन्हें एहसास हो गया कि टीम पर अब उनकी नीतिगत या तकनीकी जानकारी का कोई बड़ा असर नहीं रहेगा, जिससे वह खुद को खुला निशाना बनते देखने लगे।

मोहसिन नकवी और PCB पर क्या खुलासा?

गैरी कर्स्टन ने बिना नाम लिए भी जाहिर किया कि पाकिस्तान क्रिकेट की “टॉप‑लेवल लीडरशिप”, यानी चेयरमैन मोहसिन नकवी के नेतृत्व वाले PCB की वर्क कल्चर ने उन्हें सबसे ज़्यादा परेशान किया। उन्होंने कहा कि जहां तकनीकी फैसलों को लेकर उन्हें मानने की बजाय बाहरी दबाव और इमेज‑मैनेजमेंट को ज़्यादा प्राथमिकता दी जाती है, वहां कोच की भूमिका महज़ नाममात्र की रह जाती है।

इसी कारण उन्होंने पाकिस्तान के वर्क कल्चर को “टॉक्सिक” और “बहुत ज़्यादा इंटरफेरेंस‑वाला” बताया है। उनका दावा है कि वह खुद खिलाड़ियों के साथ काम करने में खुश थे, लेकिन बोर्ड और बाहरी दबाव की वजह से टीम के अंदर एक स्थिर और लंबे समय तक चलने वाला वातावरण बनाना मुमकिन नहीं था।

नकवी एंड कंपनी की क्या भूमिका?

मोहसिन नकवी के नेतृत्व में PCB की कार्यप्रणाली पर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं, चाहे वह कप्तान‑बदलाव, टीम‑चयन या इवेंट‑वेन्यू विवाद हों। इनमें से कुछ मामलों में नकवी पर आरोप लग चुका है कि वह इमेज बनाने के लिए मीडिया‑ड्रामा और बयानबाज़ी का भरपूर उपयोग करते हैं, जबकि टीम की लंबे समय की योजना गौण रहती है।

कर्स्टन ने यह नहीं खास तौर पर कहा कि नकवी ने उन्हें बाहर कराया, लेकिन उन्होंने यह ज़रूर कहा कि जिस ढंग से बोर्ड और टॉप‑लेवल निर्णयकर्ताओं ने टीम‑मैनेजमेंट में दखल दिया, उससे उन्हें लगा कि “मैं जो भी करूंगा, उसका ज़िम्मेदारी दिखाने के लिए मुझे बनाया जाएगा, ना कि उस निर्णय को लेने वालों को.”

“दखलअंदाज़ी का स्तर बहुत ज़्यादा” – कर्स्टन का विस्फोट

गैरी कर्स्टन ने अपने इंटरव्यू में साफ‑साफ कहा – “दखलअंदाज़ी का स्तर बहुत ज़्यादा था, जिसने मुझे परेशान किया। मुझे नहीं लगता कि मैंने अपने पूरे करियर में इतने ज़्यादा बाहरी दबाव का अनुभव पहले किया हो.” उन्होंने यह भी कहा कि जब टीम के अंदर नेता और कोच को खुलकर बोलने की आज़ादी नहीं होती, तो खिलाड़ियों के लिए भी लंबे समय तक विकास का सही माहौल बन ही नहीं पाता।

इन बातों के साथ उन्होंने एक दिलचस्प सवाल भी उठाया – “अगर चयन, टीम‑स्ट्रक्चर और प्रोटोकॉल पहले ही ऊपर‑से तय कर दिए जाते हैं, तो फिर बाद में कोच को बनाया ही क्यों जाता है

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