कीर्ति वर्धन सिंह का बयान: प्रदूषण से बीमारियां बढ़ती हैं, लेकिन सीधा प्रमाण नहीं मिला

संसद के शीतकालीन सत्र में वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि उच्च AQI (Air Quality Index) और फेफड़ों की बीमारियों के बीच सीधा संबंध साबित करने वाला कोई ठोस वैज्ञानिक डेटा मौजूद नहीं है।

सांसद के सवाल पर आई प्रतिक्रिया
बीजेपी सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने मंत्री से सवाल पूछा कि क्या सरकार के पास कोई ऐसा अध्ययन या रिपोर्ट है जो बढ़ते प्रदूषण और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के बीच सीधे संबंध को दर्शाती हो?
इस पर मंत्री ने कहा कि फिलहाल केंद्र सरकार के पास ऐसा कोई निर्णायक डेटा नहीं है जो दोनों के बीच सीधे संबंध को सिद्ध करे।
वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर असर
हालांकि मंत्री ने यह माना कि वायु प्रदूषण सांस संबंधी बीमारियों को और गंभीर बना सकता है, विशेष रूप से बच्चों, बुज़ुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर इसका नकारात्मक प्रभाव देखा गया है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार लगातार कई कदम उठा रही है, जिनमें “राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP)” प्रमुख है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकारी पहल
- औद्योगिक उत्सर्जन पर निगरानी बढ़ाई गई है।
- ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बीएस-6 मानकों को लागू किया गया है।
- शहरी क्षेत्रों में धूल और कचरा प्रबंधन के लिए स्थानीय निकायों को निर्देश जारी किए गए हैं।
- प्रदूषण के स्तर पर निगरानी के लिए पूरे देश में सेंसर आधारित मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि चाहे सीधा वैज्ञानिक सबूत सीमित हो, लेकिन बढ़ता PM2.5 और PM10 स्तर फेफड़ों और हृदय के स्वास्थ्य को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर देते हैं कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में वायु गुणवत्ता सुधार को प्राथमिकता देना जरूरी है।

