भारतीय पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति हर साल तब मनाई जाती है जब सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। यह संक्रमण काल सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक माना जाता है। इस दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं, जो प्रकृति में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देते हैं।


साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश सुबह लगभग 7:43 बजे होगा। धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान और सूर्य उपासना करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

इस बार विशेष क्यों है मकर संक्रांति 2026

मकर संक्रांति 2026 केवल सूर्य के मकर में प्रवेश का पर्व नहीं, बल्कि इस बार शुक्र ग्रह का गोचर भी इसी समय होने जा रहा है। शुक्र देवता प्रेम, संबंधों, भौतिक सुख और धन के कारक ग्रह माने जाते हैं। जब वे कुंडली में शुभ स्थिति में होते हैं, तो जीवन में समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है।
ज्योतिष के अनुसार, शुक्र इस दिन मकर से कुंभ राशि की ओर गोचर करेंगे। यह परिवर्तन कई लोगों के जीवन में नए अवसर, खुशियाँ और ऊर्जा लेकर आएगा। कुल मिलाकर, यह मकर संक्रांति “दोहरे शुभ योग” का समय मानी जा रही है।
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किन राशियों पर बरसेगी शुक्र की कृपा?

जब किसी ग्रह का गोचर संक्रांति के समय होता है, तो उसका प्रभाव विशेष रूप से उन राशियों पर अधिक पड़ता है जिनसे वह अनुकूल स्थिति में संबंधित होता है। इस बार वृषभ, कन्या और मकर राशि के जातकों पर शुक्र देवता की विशेष कृपा बरसेगी। इन तीन राशियों के लिए आने वाले हफ्ते और महीने बेहद लाभदायक साबित हो सकते हैं।

वृषभ राशि: तरक्की और धन लाभ के योग

वृषभ राशि, शुक्र की स्वामिनी राशि है, इसलिए इन जातकों के लिए यह संक्रांति अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शुक्र का ऐसा गोचर वृषभ जातकों के आर्थिक क्षेत्र में बड़ा सुधार लाएगा।
जो लोग नौकरी या व्यापार से जुड़े हैं, उन्हें धन लाभ और प्रमोशन के संकेत मिल सकते हैं। आपकी मेहनत का फल अब सामने आएगा। वहीं, जो लोग कला, फैशन, डिज़ाइन या मीडिया से जुड़े हैं, उनके लिए यह समय नई ऊँचाइयों का आरंभ हो सकता है।
प्रेम जीवन में भी स्थिरता और समरसता दिखाई देगी। अविवाहित जातकों को विवाह के प्रस्ताव मिल सकते हैं। वहीं परिवार के साथ बिताया गया समय मानसिक शांति देगा।

उपाय: शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी और शुक्र देव की पूजा करें, सफेद वस्त्र धारण करें और गरीबों को खीर या चाँदी का दान करें।

कन्या राशि: कार्यक्षेत्र में प्रगति और पहचान

कन्या राशि वालों के लिए यह संक्रांति नई ऊर्जा लेकर आएगी। शुक्र के गोचर से आपके करियर में तेजी से बदलाव होंगे। लंबे समय से रुका हुआ कोई कार्य पूरा होगा और वरिष्ठों की नज़र में आपकी मेहनत की सराहना होगी।
यदि आप बिज़नेस में हैं, तो नए निवेशक जुड़ सकते हैं या पुराना प्रोजेक्ट सफल हो सकता है। वित्तीय मामलों में पहले से अधिक स्थिरता देखने को मिलेगी। साथ ही, विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता के योग हैं।
प्रेम और दांपत्य जीवन में भी सुधार दिखेगा। रिश्तों में मधुरता आएगी और संवाद बेहतर होगा।

उपाय: बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए हरे मूंग का दान करें, माँ लक्ष्मी की पूजा करें और शुक्रवार को गुलाब का इत्र लगाएं।

मकर राशि: सफलता और सम्मान का समय

इस संक्रांति का केंद्र ही ‘मकर’ राशि है, इसलिए मकर जातकों के लिए यह समय आत्मविश्वास और उपलब्धियों का रहेगा। सूर्यदेव के आपकी राशि में प्रवेश करने से ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी। वहीं शुक्र का गोचर आपको आकर्षण और भाग्य दोनों देगा।
जो लोग सरकारी सेवा, प्रशासन या शिक्षा से जुड़े हैं, उन्हें उच्च पद या सम्मान प्राप्त हो सकता है। युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के संकेत हैं। व्यापारियों के लिए यह समय विस्तार का है—नई योजनाओं में निवेश लाभदायक रहेगा।
साथ ही, स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक सुकून की प्राप्ति होगी।

उपाय: इस दिन तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ रहेगा। गाय को हरी घास खिलाएँ और सूर्योदय के समय सूर्यदेव को जल चढ़ाएँ।

बाकी राशियों पर क्या रहेगा असर

हालांकि मुख्य रूप से वृषभ, कन्या और मकर राशियाँ इस संक्रांति से लाभान्वित होंगी, लेकिन अन्य राशियों पर भी इसका प्रभाव देखने योग्य रहेगा।

  • मेष: कार्यों में सकारात्मक रफ्तार, नई योजनाओं की शुरुआत।
  • मिथुन: मानसिक शांति और पुराने विवादों का समाधान।
  • कर्क: पारिवारिक जीवन में मिठास, पर खर्चों में संयम रखें।
  • सिंह: आत्मविश्वास में बढ़ोतरी, पर भावनात्मक फैसलों से बचें।
  • तुला: संपत्ति या भूमि से जुड़ा लाभ संभव।
  • धनु: यात्रा के योग, पर स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
  • कुंभ: प्रेम संबंधों में मजबूती, पर क्रोध से बचें।
  • मीन: करियर में नई दिशा, भाग्य का साथ।

मकर संक्रांति के धार्मिक महत्व और परंपराएँ

भारत में मकर संक्रांति केवल ज्योतिषीय घटना ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव भी है। इस दिन लोग तिल–गुड़ से बने पकवान खाते हैं, पतंग उड़ाते हैं और गंगा स्नान करते हैं। उत्तर भारत में इसे खिचड़ी पर्व, जबकि दक्षिण भारत में पोंगल और पश्चिम भारत में उत्तरायण के रूप में मनाया जाता है।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया दान सौ गुना फल देता है। इसीलिए लोग गरीबों को तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान करते हैं।

ज्योतिषीय सलाह

मकर संक्रांति 2026 के मौके पर सभी राशियों के लिए यह सलाह दी जाती है कि सूर्यदेव को अर्घ्य दें, “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें और तिल एवं गुड़ का दान करें। देवी लक्ष्मी और शुक्र देव की आराधना से आर्थिक स्थितियाँ मजबूत होंगी और आने वाला समय शुभ रहेगा।
इस दिन किसी भी शुभ कार्य या नए कार्य की शुरुआत करना विशेष फलदायी रहेगा।

शुभ ज्योतिषीय योग
मकर संक्रांति 2026 एक अत्यंत शुभ ज्योतिषीय योग लेकर आ रही है। सूर्य और शुक्र दोनों के प्रभाव से जीवन में ऊर्जा, आकर्षण और समृद्धि बढ़ेगी। खासकर वृषभ, कन्या और मकर राशि के जातकों के लिए यह समय जीवन में नई सफलता और खुशियाँ लेकर आएगा।

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