गजवा-ए-हिंद की खौफनाक साजिश: मेरठ ATS ने दुबई-Pak लिंक्ड आतंकी मॉड्यूल ध्वस्त किया

मेरठ, 5 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) ने मेरठ से संचालित एक खतरनाक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश कर देश को बड़े खतरे से बचा लिया। इस साजिश के तार दुबई और पाकिस्तान से जुड़े हैं, जहां गजवा-ए-हिंद की खौफनाक योजना को अंजाम देने की तैयारी चल रही थी। दुबई में छिपा आकिब इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड साबित हुआ, जिसने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें जिहादी बना दिया। विकास ने नाम बदलकर जाहिद और लोकेश ने सलीम बनकर साजिश को आगे बढ़ा रहे थे।

UP ATS की इस साहसी कार्रवाई ने न सिर्फ मेरठ बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को आतंकी हमले के खतरे से मुक्त कर दिया। आइए जानते हैं इस गजवा-ए-हिंद साजिश के पूरे राज़ को विस्तार से।
गजवा-ए-हिंद क्या है? इस्लामिक स्टेट की खतरनाक योजना
गजवा-ए-हिंद एक कट्टरपंथी इस्लामिक कॉन्सेप्ट है, जो इस्लामिक स्टेट (ISIS) और अन्य जिहादी संगठनों द्वारा प्रचारित किया जाता है। इसका मतलब है ‘हिंदुस्तान पर विजय’। जिहादियों का दावा है कि पैगंबर मुहम्मद ने भविष्यवाणी की थी कि मुसलमान भारत को जीत लेंगे।
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मुख्य उद्देश्य: भारत में इस्लामिक खलीफा स्थापित करना।
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टारगेट: हिंदू मंदिर, सेना ठिकाने और बड़े शहर।
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प्रचार माध्यम: टेलीग्राम, व्हाट्सएप और यूट्यूब चैनल्स।
पिछले साल कश्मीर और केरल में इसी विचारधारा से जुड़े कई मॉड्यूल्स पकड़े गए थे। मेरठ के इस केस में आकिब ने इसी प्रोपगैंडा का इस्तेमाल कर स्थानीय युवाओं को भटकाया।
दुबई का आकिब: आतंकी नेटवर्क का मास्टरमाइंड
आकिब, 32 वर्षीय दुबई निवासी, मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। वह 2023 से दुबई में बसे हुए हैं और वहां से पाकिस्तान की ISI के संपर्क में हैं। ATS जांच में सामने आया कि:
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आकिब ने क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फंडिंग भेजी।
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उसके पास 3 पाकिस्तानी हैंडलर्स थे, जो लाहौर से ऑपरेट कर रहे थे।
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सोशल मीडिया पर 500+ युवाओं को रेडिकलाइज किया।
आकिब ने फर्जी ID बनाकर युवाओं से संपर्क किया। वह ISIS प्रोपगैंडा वीडियोज शेयर करता और शहादत की तलब जगाता। मेरठ के विकास (25) और लोकेश (22) को उसने सबसे पहले टारगेट किया।
विकास से जाहिद तक का सफर
विकास, मेरठ के एक सामान्य परिवार से था। इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद बेरोजगार था। आकिब ने उसे जॉब ऑफर के बहाने जोड़ा। धीरे-धीरे जिहादी वीडियोज दिखाए। अब जाहिद बन चुका विकास AK-47 की ट्रेनिंग ले चुका था। उसके फोन से पाकिस्तान नंबर पर 200+ कॉल्स मिले।
लोकेश उर्फ सलीम की भूमिका
लोकेश, सहारनपुर का रहने वाला, IPL क्रिकेटर बनने का सपना देखता था। आकिब ने उसे ‘इस्लामिक ब्रदरहुड’ का लालच दिया। सलीम बनकर उसने IED मैनुअल डाउनलोड किया और मेरठ में रेकी शुरू कर दी। लक्ष्य थे काशी विश्वनाथ मंदिर और राम मंदिर अयोध्या।
UP ATS का साहसी ऑपरेशन: 48 घंटे की मस्जिद रेड
4 अप्रैल को ATS को इंटेलिजेंस इनपुट मिला। मेरठ के कंकर कhera इलाके में रेड पड़ी।
ऑपरेशन की प्रमुख डिटेल्स
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टीम: 50+ कमांडोज, DRG और स्थानीय पुलिस।
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बरामद सामान:
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5 AK-47 राइफल्स।
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200 कारतूस।
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10 IED किट्स।
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जिहादी लिटरेचर और ISIS फ्लैग्स।
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गिरफ्तार: 7 संदिग्ध, जिसमें जाहिद और सलीम शामिल।
IG ATS आशीष तिवारी ने बताया, “यह लोन वुल्फ अटैक की साजिश थी। दुबई से लाइव इंस्ट्रक्शन्स आ रहे थे।” ऑपरेशन में कोई गोलीबारी नहीं हुई, सभी सरेंडर कर दिए।
पाकिस्तान ISI का हाथ: फंडिंग और ट्रेनिंग का खुलासा
पूछताछ में संदिग्धों ने ISI कनेक्शन कबूल किया।
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फंडिंग रूट: दुबई के हवाला नेटवर्क से 50 लाख रुपये मंथली।
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ट्रेनिंग: पाकिस्तान के वaziristan में कैंप्स।
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प्लान: रमजान 2026 में मल्टी-सिटी अटैक।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को केस ट्रांसफर होने की संभावना। पिछले पठानकोट अटैक और पुलवामा की यादें ताजा हो गईं।
मेरठ से पहले केस: उत्तर प्रदेश में बढ़ती आतंकी एक्टिविटी
उत्तर प्रदेश आतंकवाद का हॉटस्पॉट बन चुका है।
पिछले 2 साल के प्रमुख केस
योगी सरकार ने ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई। 2025 में 200+ आतंकी ढेर या गिरफ्तार।
सोशल मीडिया: जिहाद का नया हथियार
आकिब जैसे मास्टरमाइंड्स टिकटॉक, इंस्टाग्राम रील्स का इस्तेमाल करते हैं।
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ट्रिक्स: मीम्स, गाने और फर्जी न्यूज़।
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टारगेट: 18-25 आयु वर्ग।
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समाधान: सरकार का सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टूल।
मेटा और गूगल को नोटिस भेजा गया।
विशेषज्ञों की राय: क्या है खतरा?
काउंटर टेररिज्म एक्सपर्ट प्रवीण स्वामी कहते हैं, “गजवा-ए-हिंद हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का हथियार है। युवाओं को रेडिकलाइजेशन रोकने के लिए डी-रेडिकलाइजेशन प्रोग्राम जरूरी।”
पूर्व ATS चीफ राजीव साबल: “दुबई-पाकिस्तान एक्सिस नया खतरा। इंटरनेशनल कोऑपरेशन बढ़ाएं।”
भविष्य की चुनौतियां और सुरक्षा उपाय
इस साजिश से सबक:
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स्कूल-कॉलेज में अवेयरनेस कैंप।
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साइबर सेल को स्ट्रेंग्थन।
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इंटेलिजेंस शेयरिंग NIA-MI के साथ।
डीजीपी प्रतीक महान ने कहा, “UP सेफ है, लेकिन सतर्क रहें।”
सतर्कता ही सुरक्षा
UP ATS की यह सफलता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मील का पत्थर है। गजवा-ए-हिंद जैसी साजिशें विफल होंगी, लेकिन सतर्कता जरूरी। मेरठवासी गर्व करें, उनके शहर ने देश बचाया।
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