मुंबई, 11 जनवरी 2026। मुंबई पुलिस ने एक बार फिर अपनी डिजिटल ट्रैकिंग तकनीक का जादू दिखाया है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ से 1,650 चोरी के मोबाइल फोन बरामद हो गए, जिनकी कुल कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह सफलता साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त ऑपरेशन का नतीजा है। IMEI ट्रैकिंग और साइबर फॉरेंसिक टूल्स ने चोरों के अंतरराज्यीय नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया।

इस कार्रवाई से न सिर्फ चोरी का माल बरामद हुआ, बल्कि दो मुख्य आरोपी भी गिरफ्त में आ गए। पुलिस का दावा है कि ये मोबाइल मुंबई के व्यस्त बाजारों, लोकल ट्रेनों और पार्किंग एरिया से चुराए गए थे। अब मालिकों को फोन लौटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

चोरी की शुरुआत: मुंबई के व्यस्त इलाकों से

मुंबई, भारत का आर्थिक राजधानी होने के नाते, मोबाइल चोरी का हॉटस्पॉट बन चुका है। दादर, ठाणे, अंधेरी और बोरीवली जैसे इलाकों में रोजाना दर्जनों शिकायतें दर्ज होती हैं। इस केस में बरामद फोन ज्यादातर आइफोन, सैमसंग गैलेक्सी और वनप्लस मॉडल्स के थे।

पुलिस जांच में पता चला कि चोर छोटे-छोटे गैंग्स में काम करते थे। वे भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेनों में झटपट चोरी करते और फोन को तुरंत ‘कांटा’ (चोरी का सामान) डीलर्स को बेच देते। ये डीलर फोन को यूपी भेजते, जहां रीफर्बिशिंग के बाद इन्हें सस्ते दामों पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बेचा जाता। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “यह एक ऑर्गनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट था, जो सालाना 10 करोड़ से ज्यादा का टर्नओवर कर रहा था।”

डिजिटल ट्रैकिंग: कैसे काम किया कमाल?

मुंबई पुलिस की डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम CEIR (Central Equipment Identity Register) पर आधारित है। जब कोई मोबाइल चोरी होता है, तो मालिक CEIR पोर्टल पर IMEI नंबर ब्लॉक करवा सकता है। पुलिस इसी डेटाबेस का इस्तेमाल करके लोकेशन ट्रेस करती है।

इस केस में:

  • IMEI मैपिंग: 500 से ज्यादा ब्लॉक IMEI नंबर यूपी के एक इलाके में एक्टिव मिले।
  • साइबर सर्विलांस: Google लोकेशन डेटा और टेलीकॉम रिकॉर्ड्स से गोदाम की पिनपॉइंट लोकेशन पता चली।
  • ड्रोन और CCTV इंटीग्रेशन: छापेमारी से पहले ड्रोन से रेकी की गई।

डीसीपी (साइबर) ने कहा, “हमारी नई AI-बेस्ड ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर ने 48 घंटों में लोकेशन फाइनल की। यह तकनीक चोरों के लिए वरदान बन गई है—नहीं, उनके लिए अभिशाप!”। पिछले साल मुंबई पुलिस ने इसी तकनीक से 5,000 से ज्यादा फोन बरामद किए थे।
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यूपी छापेमारी: धर दबोचे गए आरोपी

10 जनवरी की रात को मुंबई पुलिस की स्पेशल टीम यूपी पहुंची। लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में एक गोदाम पर रेड पड़ी। वहां 1,650 मोबाइल फॉन मिले—नए-पुराने मिक्स। गोदाम में रीफर्बिशिंग मशीनें, फर्जी बॉक्स और IMEI क्लोनिंग टूल्स भी बरामद हुए।

गिरफ्तार आरोपी:

  • राहुल सिंह (मुख्य डीलर): यूपी का निवासी, मुंबई कनेक्शन।
  • अजय वर्मा (लॉजिस्टिक्स इंचार्ज): फोन ट्रांसपोर्ट करता था।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह दिल्ली, गुजरात और बिहार तक फैला था। पुलिस अब अन्य राज्यों में भी सर्च ऑपरेशन चला रही है।

मोबाइल चोरी का बड़ा ब्लैक मार्केट: आंकड़े चौंकाने वाले

भारत में मोबाइल चोरी का बाजार सालाना 20,000 करोड़ रुपये का है। NCRB डेटा के अनुसार:

  • 2025 में 2.5 लाख चोरी के केस दर्ज।
  • मुंबई में औसतन 50 चोरी प्रतिदिन।
  • 70% चोरी के फोन अंतरराज्यीय ट्रैफिकिंग का शिकार।
शहरसालाना चोरी के फोनबरामद प्रतिशत
मुंबई18,00025%
दिल्ली22,00020%
बेंगलुरु15,00018%
कोलकाता12,00022%

यह टेबल दिखाता है कि डिजिटल ट्रैकिंग से बरामदी रेट बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 5G और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स से ट्रैकिंग और आसान हो जाएगी।

विशेषज्ञों की राय: तकनीक vs क्राइम

क्रिमिनोलॉजिस्ट डॉ. रवि शर्मा कहते हैं, “डिजिटल ट्रैकिंग ने चोरी को 30% कम किया है, लेकिन चोर अब VPN और IMEI क्लोनिंग का सहारा ले रहे। पुलिस को AI मॉनिटरिंग बढ़ानी चाहिए।”

साइबर एक्सपर्ट नेहा कपूर ने जोड़ा, “CEIR पोर्टल का इस्तेमाल 50% यूजर्स भी नहीं करते। अवेयरनेस कैंपेन जरूरी है।” मुंबई पुलिस अब स्कूलों और कॉलेजों में वर्कशॉप कर रही है।

आम नागरिकों के लिए प्रिवेंशन टिप्स

चोरी से बचने के लिए ये सुझाव अपनाएं:

  • IMEI नोट करें: फोन बॉक्स पर लिखा नंबर सेव रखें।
  • CEIR रजिस्टर करें: चोरी होते ही sanchar-saathi.gov.in पर रिपोर्ट।
  • ट्रैकिंग ऐप्स यूज करें: Find My Device (Android) या Find My iPhone।
  • बीमा करवाएं: मोबाइल इंश्योरेंस से 80% रिकवर हो जाता है।
  • भीड़ से सावधान: ट्रेन/बाजार में फोन जेब से निकालें नहीं।

इन स्टेप्स से 40% चोरी रोकी जा सकती है।

भविष्य की चुनौतियां और पुलिस की रणनीति

मोबाइल चोरी अब साइबर क्राइम से जुड़ रही है—फोन हैकिंग, डेटा थेफ्ट। मुंबई पुलिस 2026 में:

  • 100 नई डिजिटल लैब्स स्थापित करेगी।
  • अंतरराज्यीय टास्क फोर्स बनेगी।
  • AI प्रेडिक्टिव पोलिसिंग शुरू होगी।

यह केस अन्य शहरों के लिए मिसाल है। डीजीपी महाराष्ट्र ने कहा, “टेक्नोलॉजी हमारा सबसे बड़ा हथियार है।”

प्रभावित मालिकों की खुशी, पुलिस को सलाम

बरामद फोन मालिकों को लौटाए जा रहे हैं। एक शिकायतकर्ता ने कहा, “मेरा 6 महीने पुराना आइफोन वापस मिला, धन्यवाद मुंबई पुलिस!” सोशल मीडिया पर #MumbaiPoliceRocks ट्रेंड कर रहा है।

यह घटना साबित करती है कि डिजिटल इंडिया अभियान क्राइम कंट्रोल में कितना कारगर है। उम्मीद है, ऐसी सफलताएं बढ़ेंगी।
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