भारत सरकार ने PM E‑Drive (Prime Minister Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement) योजना के तहत इलेक्ट्रिक टू‑व्हीलर, ई‑रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलने वाली सब्सिडी के नियमों में बदलाव कर दिया है।

अब सब्सिडी न केवल समय‑सीमा से बंधी है, बल्कि यह भी तय हो गया है कि स्कीम के तहत कुल 10,900 करोड़ रुपये तक ही राशि खर्च की जा सकती है, यानी फंड‑लिमिटेड स्कीम बन गई है। इस बदलाव से उपभोक्ता, ऑटोमेकर और मार्केट तीनों पर सीधा असर पड़ेगा।

PM E‑Drive स्कीम से जुड़ी मुख्य जानकारी

क्या है और इसका उद्देश्य

PM E‑Drive भारत सरकार की एक केंद्रीय योजना है, जिसे भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) के तहत चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को सस्ता और पहुँचने योग्य बनाकर देश में EV की भीड़ बढ़ाना है, ताकि प्रदूषण कम हो और ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटे।

  • योजना का कुल बजट 10,900 करोड़ रुपये है, जिसे EV प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जा रहा है।

  • शुरुआत में लगभग पाँच लाख से ज्यादा पात्र EV (दोपहिया और तिपहिया) को सब्सिडी जारी करने का टार्गेट रखा गया है।

  • PM E‑Drive पोर्टल और ऑथोराइज्ड डीलर नेटवर्क के जरिए ऑनलाइन आवेदन और अनुमोदन प्रक्रिया संचालित होती है।

इस योजना के जरिए सरकार ने GST दर 5% रखी है, जिससे EV और उनके लिए चार्जर/इंफ्रास्ट्रक्चर की कीमत में और कमी आई है।

नए नियमों में क्या बदलाव हुआ है?

सरकार ने PM E‑Drive के नियमों में दो तरह के बड़े बदलाव किए हैं: समय‑सीमा (डेडलाइन) और फंड‑लिमिटेड स्कीम की घोषणा। इनका असर नीचे दिए गए तालिका में साफ दिखाई देता है।

वाहन प्रकार पुरानी स्थिति नई स्थिति (2026‑27 अधिसूचना के अनुसार)
इलेक्ट्रिक टू‑व्हीलर (2W) 31 मार्च 2026 तक लागू अब 31 जुलाई 2026 तक सब्सिडी उपलब्ध
इलेक्ट्रिक तीन‑पहिया (3W, ई‑रिक्शा/ई‑कार्ट) मार्च 2028 तक वैध अब भी 31 मार्च 2028 तक जारी
योजना का प्रकार ओपन‑एंडेड थी अब फंड‑लिमिटेड (10,900 करोड़)

इसके अलावा, सब्सिडी की राशि भी एक्स‑फैक्ट्री प्राइस के अधिकतम 15% तक सीमित रखी गई है, ताकि बहुत महंगी EV पर अत्यधिक सरकारी सब्सिडी न जाए।

इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए नई सब्सिडी सीमाएँ

दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन (ई‑स्कूटर/बाइक)

PM E‑Drive के नए नियमों के अनुसार, इलेक्ट्रिक टू‑व्हीलर पर:

  • सब्सिडी की अधिकतम सीमा अब एक्स‑फैक्ट्री प्राइस का 15% है, लेकिन यह उसी केस में अप्लाई होती है जब वाहन की कीमत 1.5 लाख रुपये तक हो।

  • इस श्रेणी में 24.79 लाख से ज्यादा EV के लिए सब्सिडी अलग से तय क्वाटा के तहत दी जाएगी, जिसके बाद योजना वापस बंद हो सकती है, चाहे 31 जुलाई 2026 तारीख न पहुँची हो।

इसका मतलब है कि जो उपभोक्ता अभी ई‑स्कूटर खरीदने जा रहे हैं, उनके लिए जल्दी ऑर्डर बुक करना फायदेमंद है, क्योंकि फंड खत्म होने से योजना जल्दी बंद हो सकती है।

तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहन (ई‑रिक्शा, ई‑कार्ट)

ई‑रिक्शा और छोटे इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों पर भी सरकार ने अलग से नियम घोषित किए हैं:

  • ई‑रिक्शा और ई‑कार्ट के लिए अधिकतम शोरूम प्राइस 2.5 लाख रुपये तक को सब्सिडी के लिए पात्र माना गया है।

  • इन वाहनों के लिए सब्सिडी की समय‑सीमा 31 मार्च 2028 तक बनी हुई है, जो टू‑व्हीलर की तुलना में काफी लंबी है।

  • योजना के तहत लगभग 39,034 तिपहिया EV के लिए अलग से कोटा तय किया गया है, जिसके बाद भी लाभ रुक सकता है।

यह व्यवस्था ढाल‑हाफ वाले रिक्शा चालकों और छोटे ट्रांसपोर्टर्स के लिए और ज्यादा फायदेमंद है, क्योंकि उनकी लागत और ऑपरेटिंग खर्च दोनों कम होते हैं।

नए नियमों के मुख्य फायदे और चुनौतियाँ

उपभोक्ताओं के लिए फायदे

नए नियमों से सीधा लाभ इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले उपभोक्ताओं को मिलेगा:

  • सब्सिडी की डेडलाइन बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 तक करने से ग्राहकों के पास और समय मिलेगा, जिससे जल्दी‑जल्दी भाग‑दौड़ नहीं करनी पड़ेगी और वे अपनी पसंद का वाहन शांति से चुन सकेंगे।

  • GST 5% और इलेक्ट्रिक वाहनों पर दी जा रही छूट के साथ मिलाकर, EV की असली कीमत में 15–25% तक बचत हो सकती है, खासकर दिल्ली‑NCR जैसे शहरों में जहाँ प्रदूषण सबसे ज्यादा है।

  • रिक्शा चालक और टैक्सी ड्राइवर जैसे व्यवसायी लंबे समय तक ई‑वाहन पर चलने से फ्यूल बचत के साथ‑साथ महीने का ईएमआई लोड भी कम कर सकेंगे।

  • इसके अलावा, PM E‑Drive पोर्टल पर ट्रैकिंग सिस्टम से ग्राहक सब्सिडी की स्टेटस आसानी से चेक कर सकते हैं, जिससे भ्रष्टाचार, देरी या दूसरे गड़बड़ियों की आशंका कम होगी और पूरी प्रक्रिया और पारदर्शी रहेगी।

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