“गाजा में शांति प्रयास निर्णायक” ट्रंप के पीस प्लान का PM मोदी ने किया खुलकर समर्थन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाजा विवाद को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति योजना का खुलकर समर्थन किया है और इसे दीर्घकालिक, न्यायसंगत तथा स्थायी शांति का एक व्यावहारिक रास्ता बताया है. मोदी ने कहा कि शांति प्रयासों के तहत बंधकों की रिहाई के संकेत एक “महत्वपूर्ण कदम” हैं और भारत “स्थायी और न्यायसंगत शांति” के लिए हर प्रयास का जोरदार समर्थन करता रहेगा.

मोदी का समर्थन और आधिकारिक बयान
- पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा: “हम राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व का स्वागत करते हैं क्योंकि गाजा में शांति प्रयास निर्णायक प्रगति कर रहे हैं। बंधकों की रिहाई के संकेत एक महत्वपूर्ण कदम हैं। भारत किसी भी प्रकार की स्थायी और न्यायसंगत शांति के प्रयासों का पूरा समर्थन करता रहेगा।”
- ट्रंप की शांति योजना के बारे में मोदी ने पहले ही सप्ताह में कहा था कि यह इस क्षेत्र के लिए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, सुरक्षा और विकास की ओर ले जाने वाला एक ‘व्यवहारिक रास्ता’ है.
- ट्रंप के प्लान के तहत गाजा में संघर्ष विराम, बंधकों की रिहाई, हमास का निरस्त्रीकरण, और गाजा से इजरायल की वापसी जैसी शर्तें शामिल हैं.
ट्रंप का गाजा पीस प्लान: मुख्य बिंदु
- 20-पॉइंट शांति योजना: तत्काल संघर्ष विराम, बंधकों की रिहाई, मानवीय सहायता, हमास की निरस्त्रीकरण, और क्षेत्रीय सरकार का गठन.
- इजरायल और फलस्तीन दोनों के लिए दीर्घकालिक स्थायित्व और विकास को प्रोत्साहित करना.
- योजना का समर्थन प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी किया.
भारत की नीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- भारत पारंपरिक रूप से मध्य-पूर्व में स्थायी एवं न्यायसंगत शांति के प्रति प्रतिबद्ध रहा है.
- मोदी का बयान क्षेत्र की स्थिरता, शांति और संवाद पर भारत की प्राथमिकता को दोहराता है.
- ट्रंप ने भी मोदी के समर्थन को अपनी सोशल मीडिया पर साझा किया, जिससे अमेरिका-भारत संबंधों में सकारात्मक संदेश गया.
इस प्रकार पीएम मोदी ने ट्रंप की गाजा शांति योजना का स्पष्ट समर्थन करते हुए, वैश्विक मंच पर शांति, संवाद और स्थायित्व की दिशा में भारत की सक्रिय भूमिका को मजबूत किया है
भारत के समर्थक बयान पर विपक्ष का क्या रिएक्शन रहा
भारत सरकार द्वारा ट्रंप के गाजा शांति योजना को समर्थन देने पर विपक्ष ने तीखी आलोचना की है और इस पॉलिसी को भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति एवं संवेदनशीलता के खिलाफ बताया है.
विपक्ष की मुख्य आपत्तियां
- कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का ट्रंप और नेतन्याहू की तरफ झुकाव “मूल्यहीनता” और “भयावह नैतिक कायरता” है. उन्होंने पूछा कि इस योजना में गाजा के लोगों की भूमिका कहां है, फिलिस्तीनी राज्य की स्पष्ट रोडमैप का क्या हुआ, और “जनसंहार” के लिए जवाबदेही कहाँ है।
- कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने “निर्दोष नागरिकों के जनसंहार” और भारत के “नैतिक मार्गदर्शन” से हटने पर गहरा दुःख प्रकट किया।
- प्रियंका गांधी ने कहा कि भारत की मौन नीति इसकी “औपनिवेशिक विरासत और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ” है और भारत को वैश्विक मानवता के नियमों की रक्षा करनी चाहिए।
विपक्ष का समग्र तर्क
- विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी ने आरोप लगाया है कि सरकार, फिलिस्तीन के अधिकारों और उनकी रक्षा की पारंपरिक नीति से हट रही है.
- यह भी कहा गया कि भारत सरकार की मौजूदा नीति उसे एक “मूक दर्शक” बना रही है, जो कि देश की ऐतिहासिक छवि नहीं रही.
इस तरह, मोदी सरकार के बयान को विपक्ष ने न केवल अस्वीकार किया, बल्कि इसे नैतिक, संवैधानिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी गलत ठहराया है.ट्रंप के गाजा पीस प्लान पर भारत के खुले समर्थन को लेकर विपक्ष ने काफी तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार की नीति की आलोचना करते हुए इसे भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति और नैतिकता के खिलाफ बताया।
विपक्ष के बयान की मुख्य बातें
- कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि पीएम मोदी का ट्रंप और नेतन्याहू के समर्थन में बयान रवैये को “नैतिक कायरता” और “भारत की ऐतिहासिक छवि से गहरा विश्वासघात” बताया।
- विपक्ष ने सवाल किया कि ट्रंप की योजना में गाजा की जनता की भूमिका कहां है, और भारत सरकार ने “जनसंहार” पर इतनी चुप्पी क्यों साधी हुई है।
- कांग्रेस ने पीएम मोदी पर “दोस्तों को खुश करने” का आरोप लगाया और कहा कि सरकार ने हमेशा के लिए फिलिस्तीन के समर्थन में रही नीति को छोड़ दिया है।
- प्रियंका गांधी और कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने भारत के “सांवेधानिक मानवीय मूल्यों” और “स्वतंत्रता संग्राम की विरासत” का हवाला देते हुए, मौजूदा नीति को शर्मनाक और निराशाजनक बताया।
विपक्ष की समग्र मांग
- विपक्ष और सिविल सोसाइटी ने मांग की है कि भारत सरकार फिर से फिलिस्तीन के पक्ष में स्पष्ट और सक्रिय नीति अपनाए।
- सरकार के हालिया स्टैंड को ‘मूकदर्शी’ बताकर देश की नैतिक साख पर सवाल खड़े किए गए हैं।
विपक्ष ने मोदी सरकार के रुख की खुलकर निंदा की और उसे बदलने की मांग रखी है।
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