प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर से मुलाकात के दौरान खालिस्तानी कट्टरपंथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की है। मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में कट्टरपंथ और हिंसक उग्रवाद के लिए कोई जगह नहीं होती और जो लोग लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं का दुरुपयोग करके आतंकवाद फैलाते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने ब्रिटेन से खालिस्तानी चरमपंथ के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की ताकि यह न केवल भारत बल्कि ब्रिटेन और दोनों देशों के नागरिकों के लिए भी एक सुरक्षित समाज सुनिश्चित किया जा सके। यह अपील भारत-यूके के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने के प्रयासों के बीच हुई है, जिसमें व्यापार, रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी शामिल हैं। दोनों नेताओं ने आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है.

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक समाजों में की गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है, और इसके जरिए लोकतंत्र को कमजोर करने वालों को कानून के तहत कठोर कार्रवाई का सामना करना चाहिए.

इस चर्चा के पीछे भारतीय सरकार की नीतिगत प्राथमिकता है कि ब्रिटेन में सक्रिय खालिस्तानी समूहों की गतिविधियों को रोका जाए ताकि दोनों देशों के बीच बढ़ते हुए सहयोग को कोई नुकसान न पहुंचे.

कौन से कानूनी कदम भारत ने ब्रिटेन से मांगें
भारत ने ब्रिटेन से खालिस्तानियों के खिलाफ जिन कानूनी कदमों की मांग की है, वे निम्न हैं:

  • खालिस्तानी उग्रवादियों के खिलाफ कानूनी दायरे में सख्त कदम उठाना, जो लोग लोकतंत्र का फायदा उठाकर भारत के खिलाफ साजिशें रचते हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए।
  • ब्रिटेन में एक्टिव उग्रवादियों और उनके समूहों की निगरानी तेज़ करना।
  • हिंसा या नफरत भड़काने में शामिल लोगों की पहचान कर उन पर व्यावहारिक कानूनी कार्रवाई करना।
  • यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ भारत में मामले या आरोप हैं तो उनका प्रत्यर्पण करने में सहयोग देना।
  • भारतीय मिशनों और डिप्लोमैट्स की सुरक्षा को सुनिश्चित करना, क्योंकि कुछ स्थानों पर ब्रिटेन में भारतीय मिशनों के बाहर खालिस्तानी झंडों के साथ प्रदर्शन और उत्पात की घटनाएं हुई हैं।
  • ब्रिटिश कानून के तहत खालिस्तानी समर्थक तत्वों पर सख्ती से नियंत्रण लगाना, जिसमें रजिस्ट्रेशन की शर्तें, फंडिंग और ट्रांसफर की जांच शामिल है।
  • आपराधिक मुकदमों में सहयोग देना और दूतावासों के बाहर हो रहे उत्पात पर कार्रवाई करना।

भारत की यह मांग इसलिए भी अहम है क्योंकि ब्रिटेन में खालिस्तानी तत्व सामाजिक-सांस्कृतिक मंचों का दुरुपयोग करके हिंसा भड़काने और भारत विरोधी गतिविधियां तिबहका रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है और भारतीय डिप्लोमैट्स की सुरक्षा खतरे में है.

भारत-ब्रिटेन सुरक्षा सहयोग पर नए समझौते हुए
भारत और ब्रिटेन के बीच सुरक्षा सहयोग पर 2025 में कई नए समझौते हुए हैं जो दोनों देशों के रक्षा और तकनीकी सहयोग को मजबूत करेंगे। प्रमुख समझौतों में शामिल हैं:

  • दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच संयुक्त अभ्यासों, प्रशिक्षण, और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने पर सहमति हुई है।
  • भारतीय वायु सेना के योग्य उड़ान प्रशिक्षकों को ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स के प्रशिक्षण में शामिल किया जाएगा।
  • इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) के तहत रीजनल मैरिटाइम सिक्योरिटी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (RMSCE) स्थापित किया जाएगा, जो समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा।
  • भारतीय नौसेना के लिए समुद्री इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करने के लिए एक अंतर-सरकारी समझौते (IGA) को अंतिम रूप दिया गया है, जिसमें ब्रिटिश कंपनियां जुटेंगी। यह सिस्टम नौसेना के जहाजों को ज्यादा तेज, शांत, और ईंधन-कुशल बनाएगा।
  • ब्रिटेन भारतीय सेना को लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल (LMM) सप्लाई करेगा, जो सीमा पर हवाई सुरक्षा को कड़ा करेगा।
  • दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है।
  • रक्षा सह-उत्पादन को बढ़ावा देने और दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को जोड़ने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।

ये समझौते भारत-ब्रिटेन के व्यापक रणनीतिक और तकनीकी सहयोग का हिस्सा हैं और दोनों देशों के बीच रक्षा, नवाचार और समुद्री सुरक्षा क्षेत्रों में साझेदारी को नई ऊंचाई देंगे। यह ‘विजन 2035’ के तहत भारत-ब्रिटेन सुरक्षा एवं आर्थिक सहयोग को मजबूत करने का व्यापक रोडमैप है.


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