लखनऊ में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है जहां डॉ. विवेक मिश्रा नाम के व्यक्ति ने खुद को 2014 बैच का गुजरात कैडर का IAS अधिकारी बताया और 150 से ज्यादा लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 80 करोड़ रुपये ठगे। वह सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लड़कियों को शादी का झांसा देकर उनके परिवारों से संपर्क करता था और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर भारी रकम वसूलता था। विवेक ने फर्जी नियुक्ति पत्र भी बांटे, जिनमें डिप्टी एसपी और जनसंपर्क अधिकारी जैसे पद शामिल थे।

यह ठगी का जाल दिल्ली, यूपी, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों में फैला हुआ था और छह साल से CID टीम उसकी तलाश कर रही थी। इस केस की शुरुआत 2019 में सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉ. आशुतोष मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में जांच आर्थिक अपराध शाखा से सीबीसीआईडी को सौंपी गई। विवेक को लखनऊ के कमता तिराहे के पास से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब उसके बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की जाँच कर रही है। आरोपित की दो बहनें भी फर्जी IPS अधिकारी बताई जा रही हैं, जिनकी भूमिका की जांच चल रही है। इस मामले में स्टिंग ऑपरेशन से ठगी का पर्दाफाश हुआ था।

संक्षेप में यह मामला एक बड़े और लंबे समय से चल रहे फर्जीवाड़े का है, जिसमें विवेक मिश्रा ने सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की, और वर्तमान में उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस की कार्रवाई जारी है और जांच में कई अन्य पहलू सामने आ रहे हैं।

इस मामले का पीड़ितों का विस्तृत अनुभव

लखनऊ में फर्जी IAS अधिकारी विवेक मिश्रा के द्वारा ठगी के शिकार हुए पीड़ितों के अनुभव बेहद दुखद और धोखे से भरे हैं। विवेक मिश्रा ने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के माध्यम से खासकर युवतियों को शादी का झांसा देकर उनके परिवारों से करीब 2 से 5 लाख रुपए तक लेकर सरकारी नौकरी दिलाने का वादा किया। पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने इस जालसाजी पर भरोसा इसलिए किया क्योंकि विवेक ने फर्जी नियुक्ति पत्र और सरकारी विभागों के लगाए गए नकली मुहर वाले दस्तावेज भी दिए।

ऐसे कई परिवारों ने बड़ी रकम जमा की, लेकिन बाद में पता चला कि नौकरी का कोई भी ठोस आधार नहीं था और सारे कागजात फर्जी थे। एक पीड़ित ने बताया कि विवेक ने अपने रिश्तेदारों और जानकारों को भी फंसा रखा था, जिससे जब कोई सवाल उठता तो वह अन्य लोगों के दबाव में आ जाता था। इस कारण पीड़ित मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई ने तो अपने बच्चों के लिए रखी गई आर्थिक बचत इसी धोखे में खर्च कर दी।

कुल मिलाकर, पीड़ितों को धोखा देकर उनकी उम्मीदों, मेहनत और पैसों को ठग लिया गया है, जिससे उनकी जिंदगी में गहरा शर्मिंदगी, आर्थिक संकट और तनाव पैदा हुआ है। आरोपी पर मुकदमा दर्ज हो चुका है और लखनऊ पुलिस उसकी जांच तथा राहत कार्य में लगी है।

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