ब्रेकिंग: प्रतीक यादव का अपर्णा पर तलाक का बम, “परिवार बर्बाद किया” – यादव परिवार में भूचाल

लखनऊ, 19 जनवरी 2026: समाजवादी पार्टी से जुड़े प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी अपर्णा यादव पर परिवार तोड़ने का संगीन आरोप लगाते हुए तलाक का ऐलान कर दिया है। इंस्टाग्राम पर शेयर की गई इस पोस्ट ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। अपर्णा, जो भाजपा की नेता हैं, ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है ।

प्रतीक यादव की वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट का पूरा खुलासा
प्रतीक यादव ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट @iamprateekyadav से एक लंबी पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने अपर्णा को “स्वार्थी और मतलबी औरत” बताया। पोस्ट में लिखा, “मैं इस स्वार्थी औरत से जल्द से जल्द तलाक लेने जा रहा हूं। उसने मेरे परिवार को बर्बाद कर दिया।” यह पोस्ट सोमवार सुबह से ही वायरल हो रही है, जिसमें 50,000 से अधिक व्यूज और हजारों कमेंट्स आ चुके हैं ।
- मुख्य आरोप: अपर्णा ने पारिवारिक रिश्तों को तोड़ा और स्वार्थ के लिए परिवार को नुकसान पहुंचाया।
- पोस्ट का समय: 19 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजे के करीब।
- रिएक्शन: सोशल मीडिया पर #PrateekAparnaDivorce ट्रेंड कर रहा है, ज्यादातर लोग शॉक में हैं।
यह पोस्ट राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि यादव परिवार की इस आंतरिक कलह से सपा-भाजपा संबंधों पर असर पड़ सकता है ।
अपर्णा यादव की चुप्पी और भाई का हैकिंग दावा
अपर्णा यादव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि, उनके भाई ने दावा किया कि प्रतीक का अकाउंट हैक हो गया था और उन्होंने इंस्टाग्राम को रिपोर्ट कर दिया है। अपर्णा, मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू, भाजपा में सक्रिय हैं और लखनऊ से विधायक रह चुकी हैं ।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह पारिवारिक विवाद अपर्णा के भाजपा में शामिल होने से उपजे पुराने तनाव का नतीजा है। अपर्णा ने 2019 में सपा छोड़कर भाजपा जॉइन की थी, जिससे परिवार में दरार आ गई थी ।
प्रतीक-अपर्णा शादी का 15 साल पुराना इतिहास
प्रतीक यादव, अखिलेश यादव के चचेरे भाई और मुलायम सिंह के भतीजे, की अपर्णा से शादी 2010 में हुई थी। अपर्णा मुलायम की भाई रतन सिंह यादव की बेटी हैं। शादी के शुरुआती साल खुशहाल रहे, लेकिन राजनीतिक मतभेदों ने रिश्ते खराब कर दिए ।
- शादी की तारीख: मई 2010, लखनऊ में धूमधाम से।
- बच्चे: एक बेटी, जो अब 12 साल की है।
- पहले विवाद: 2017 में अपर्णा के सपा से नाराजगी के संकेत मिले थे।
2022 विधानसभा चुनावों में अपर्णा ने भाजपा से लखनऊ कैंट सीट लड़ी, जहां प्रतीक ने उनका खुलकर समर्थन किया था। लेकिन हाल के महीनों में निजी जीवन में तनाव बढ़ गया ।
यह भी पढ़ें:https://thedbnews.in/gulgulia-gang-busted-12-innocent-children-rescued-16-human-traffickers-arrested/
राजनीतिक प्रभाव: सपा-भाजपा में नया टकराव?
यह तलाक घोषणा उत्तर प्रदेश की सियासत को प्रभावित कर सकती है। प्रतीक सपा के वफादार हैं, जबकि अपर्णा भाजपा की ब्राह्मण वोट बैंक जोड़ने वाली नेता। यादव परिवार की एकता पहले ही कमजोर हो चुकी है—मुलायम सिंह के निधन के बाद अखिलेश ने परिवार को एकजुट रखने की कोशिश की, लेकिन यह विवाद नई चुनौती है ।
विश्लेषकों का कहना है:
- सपा के लिए नुकसान: परिवारिक कलह से कार्यकर्ताओं में निराशा।
- भाजपा का फायदा: अपर्णा को और मजबूत करने का मौका।
- 2027 चुनावों पर असर: यूपी में यादव वोट बैंक बंट सकता है।
सपा नेताओं ने चुप्पी साध रखी है, जबकि भाजपा ने भी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया ।
सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रियाएं
ट्विटर और फेसबुक पर पोस्ट वायरल होने से मीम्स, डिबेट्स और समर्थन की बाढ़ आ गई। कुछ यूजर्स ने प्रतीक का साथ दिया, तो कुछ ने अपर्णा को महिलाओं के अधिकारों का प्रतीक बताया।
| प्लेटफॉर्म | व्यूज | मुख्य कमेंट्स |
|---|---|---|
| इंस्टाग्राम | 1 लाख+ | “परिवार बचाओ”, “राजनीति ने बर्बाद किया” |
| ट्विटर | 50K रीट्वीट्स | #AparnaVsPrateek ट्रेंडिंग |
| फेसबुक | 20K शेयर्स | महिलाओं के समर्थन में पोस्ट्स |
यह विवाद डिजिटल दुनिया में 24 घंटे में ही नेशनल न्यूज बन गया।
यादव परिवार की पुरानी कलहें: एक नजर
यादव परिवार लंबे समय से आंतरिक विवादों से जूझ रहा है। मुलायम सिंह के दो बेटों—मुलायम और शिवपाल—के बीच 2016 में फूट पड़ी थी। अपर्णा का भाजपा जाना भी इसी चेन का हिस्सा था। प्रतीक ने पहले भी परिवार के फैसलों का समर्थन किया, लेकिन निजी जीवन अलग रहा ।
- 2016: सपा में भाई-भतीजावाद विवाद।
- 2019: अपर्णा भाजपा में।
- 2024: लोकसभा चुनावों में परिवारिक समर्थन बंटा।
यह तलाक यादव परिवार की एक और कड़ी टूटने का संकेत देता है।
कानूनी प्रक्रिया: तलाक कैसे होगा?
भारतीय कानून में हिंदू मैरिज एक्ट के तहत तलाक के लिए अदालत जाना पड़ेगा। प्रतीक क्रूरता (मेन्टल क्रुएल्टी) का आधार ले सकते हैं। प्रक्रिया 6 महीने से 2 साल ले सकती है, खासकर हाई प्रोफाइल केस में। बच्चे की कस्टडी और गुजारा भत्ता प्रमुख मुद्दे होंगे ।
वकीलों का मानना है कि यह कोर्ट के बाहर सुलझ सकता है, लेकिन राजनीतिक दबाव से मुश्किल। अपर्णा कानूनी सलाह ले रही हैं, खबरें हैं।
अपर्णा यादव का राजनीतिक सफर
अपर्णा 2017 में सपा से विधायक बनीं, लेकिन 2019 में भाजपा जॉइन की। योगी सरकार में महिला मोर्चा की भूमिका निभाई। ब्राह्मण-यादव समीकरण जोड़ने वाली मानी जाती हैं। तलाक से उनकी इमेज प्रभावित हो सकती है ।
- चुनावी रिकॉर्ड: 2022 में हारीं, लेकिन मजबूत लड़ाई लड़ीं।
- वर्तमान पद: भाजपा UP कार्यकारिणी सदस्य।
प्रतीक यादव कौन हैं?
अखिलेश के सौतेला भाई प्रतीक सपा के युवा चेहरे हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय, लेकिन चुनाव नहीं लड़े। परिवारिक बिजनेस संभालते हैं। यह पहला बड़ा विवाद है ।
संभावित परिणाम और भविष्य
यह विवाद 2027 UP चुनावों से पहले सपा को कमजोर कर सकता है। अपर्णा मजबूत लौटेंगी या प्रतीक सपा में ऊपर आएंगे? अपडेट्स बने रहें। परिवारिक सुलह की कोई गुंजाइश कम लग रही ।
यह भी पढ़ें:https://thedbnews.in/sports-ministry-internship-2026-applications-for-20-posts-last-date-is-january-31/

