भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर इज़रायल पहुंचे हैं। यह दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत–इज़रायल संबंधों को और अधिक गहराई और मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की, राष्ट्रपति Isaac Herzog से मुलाकात की और इज़रायली संसद Knesset को संबोधित किया।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और रक्षा, सुरक्षा, तकनीक तथा कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

भारत–इज़रायल संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और इज़रायल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध वर्ष 1992 में स्थापित हुए थे। तब से दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत होते गए हैं। हालांकि लंबे समय तक भारत ने पश्चिम एशिया नीति में संतुलन बनाए रखा, लेकिन पिछले एक दशक में भारत–इज़रायल संबंधों में उल्लेखनीय तेजी आई है।रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, नवाचार और स्टार्टअप सहयोग ऐसे क्षेत्र हैं, जहां दोनों देशों ने आपसी विश्वास और साझा हितों के आधार पर मजबूत साझेदारी विकसित की है। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा इसी रणनीतिक साझेदारी को और आगे ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता: प्रमुख मुद्दे

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई वार्ता में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  1. रक्षा और सुरक्षा सहयोग
  2. आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति
  3. प्रौद्योगिकी और नवाचार
  4. कृषि और जल प्रबंधन
  5. व्यापार और निवेश विस्तार

विशेष रूप से रक्षा सहयोग इस यात्रा का केंद्र बिंदु रहा। भारत अपने स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है, वहीं इज़रायल रक्षा तकनीक के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में से एक है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को नई दिशा दे सकती है।

“सुदर्शन चक्र” और आयरन डोम पर संभावित सहयोग

वार्ता के दौरान भारत की स्वदेशी एयर डिफेंस प्रणाली “सुदर्शन चक्र” और इज़रायल की प्रसिद्ध मिसाइल रक्षा प्रणाली Iron Dome पर संभावित सहयोग की चर्चा प्रमुख रही।

आयरन डोम प्रणाली ने इज़रायल को रॉकेट हमलों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसकी सटीकता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता विश्वभर में सराही गई है। यदि भारत इस तकनीक से जुड़ता है या इससे प्रेरित होकर अपनी प्रणाली को और उन्नत करता है, तो यह देश की वायु सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम होगा।

भारत पहले से ही बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली विकसित कर रहा है, और इज़रायल के साथ तकनीकी सहयोग इस दिशा में सामरिक बढ़त प्रदान कर सकता है।

आतंकवाद के खिलाफ साझा दृष्टिकोण

भारत और इज़रायल दोनों देश आतंकवाद से प्रभावित रहे हैं। इसीलिए आतंकवाद के विरुद्ध साझा रणनीति और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान पर विशेष जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और इसे जड़ से समाप्त करने के लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है। इज़रायल ने भी भारत के इस दृष्टिकोण का समर्थन किया।

दोनों देशों के बीच पहले से ही खुफिया सहयोग मौजूद है, जिसे और मजबूत करने पर सहमति बनी।

राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग से मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी ने इज़रायल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग से भी मुलाकात की। इस मुलाकात में द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक आयामों पर चर्चा हुई।

राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार की भावना और शांति की प्रतिबद्धता के कारण संबंध और गहरे हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी भारत–इज़रायल मित्रता को “विश्वास, नवाचार और रणनीतिक सहयोग” पर आधारित बताया।

केनेस्सेट को ऐतिहासिक संबोधन

प्रधानमंत्री मोदी ने इज़रायल की संसद केनेस्सेट को संबोधित करते हुए भारत और इज़रायल के साझा इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि दोनों देश लोकतंत्र, स्वतंत्रता और नवाचार में विश्वास रखते हैं। भारत और इज़रायल की मित्रता केवल सरकारों के बीच नहीं, बल्कि जनता के बीच भी गहरी है।

अपने संबोधन में उन्होंने प्राचीन सभ्यताओं के सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के आधुनिक युग में तकनीक और नवाचार के माध्यम से यह संबंध और मजबूत हो सकते हैं।

कृषि और जल प्रबंधन में सहयोग

इज़रायल जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीक में अग्रणी माना जाता है। भारत के कई राज्यों में इज़रायली तकनीक के सहयोग से कृषि उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं।

ड्रिप इरिगेशन, जल पुनर्चक्रण और सूखा-प्रतिरोधी खेती के क्षेत्रों में इज़रायल का अनुभव भारत के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ है।

इस यात्रा में कृषि अनुसंधान, स्टार्टअप सहयोग और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में नए समझौतों की संभावना जताई गई है।

व्यापार और निवेश के नए अवसर

भारत और इज़रायल के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि हो रही है। रक्षा और हीरा व्यापार के अलावा अब दोनों देश साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय उद्योगपतियों को इज़रायल के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ने का आह्वान किया। वहीं इज़रायल ने भी भारत के विशाल बाजार और प्रतिभा को निवेश के लिए आकर्षक बताया।

यदि मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में प्रगति होती है, तो व्यापारिक संबंधों को और गति मिल सकती है।

रणनीतिक महत्व

पश्चिम एशिया में बदलते हालात और वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इज़रायल के साथ मजबूत संबंध भारत को रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में बढ़त प्रदान करते हैं।साथ ही, भारत ने हमेशा संतुलित विदेश नीति अपनाई है और पश्चिम एशिया के अन्य देशों के साथ भी मजबूत संबंध बनाए रखे हैं। इस संदर्भ में यह दौरा भारत की बहुपक्षीय कूटनीति का उदाहरण है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति का एक प्रमुख उद्देश्य भारत को रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इज़रायल के साथ संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी हस्तांतरण और उत्पादन साझेदारी भारत की घरेलू रक्षा उद्योग को सशक्त बना सकती है।

सुदर्शन चक्र जैसी स्वदेशी परियोजनाओं को अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग से मजबूती मिल सकती है। इससे भारत की सुरक्षा क्षमता और निर्यात संभावनाएं दोनों बढ़ेंगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह इज़रायल दौरा भारत–इज़रायल रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। रक्षा, सुरक्षा, तकनीक, कृषि और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर दोनों देशों की सहमति भविष्य के संबंधों को मजबूत आधार प्रदान करेगी।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा स्पष्ट करता है कि भारत अपनी विदेश नीति में सक्रिय, संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाते हुए वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को लगातार सशक्त कर रहा है।
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