Gold-Silver Prices Crash: चांदी 5000 रुपये सस्ती, सोने के दाम भी गिरे | Today Gold Silver Rate

नई दिल्ली, 13 अप्रैल 2026:सोने और चांदी की कीमतों में आज जोरदार गिरावट देखने को मिली है। घरेलू सर्राफा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट तक कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। ताजा रुझानों के मुताबिक चांदी के दामों में करीब 5,000 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सोने की कीमतों में भी नरमी आई है। निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों के लिए यह गिरावट एक तरफ राहत लेकर आई है, तो दूसरी तरफ बाजार में अस्थिरता को भी दिखा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट सिर्फ एक दिन की हलचल नहीं है, बल्कि वैश्विक बाजार की कई परिस्थितियों का नतीजा है। डॉलर की मजबूती, अंतरराष्ट्रीय मांग में कमी, मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक संकेतों में बदलाव ने गोल्ड और सिल्वर दोनों पर असर डाला है। ऐसे में जो लोग सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए मौजूदा समय अहम माना जा रहा है।
चांदी के दामों में बड़ी गिरावट
आज सबसे ज्यादा झटका चांदी के बाजार में देखा गया। सिल्वर प्राइस में करीब 5,000 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट आई है, जिससे रिटेल खरीदारों और निवेशकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। चांदी, जो हाल के दिनों में लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई थी, अब नीचे फिसल गई है।
ताजा रुझानों के अनुसार, चांदी की कीमतों में यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कमजोरी के कारण आई है। औद्योगिक मांग में थोड़ी नरमी, कमोडिटी बाजार में बिकवाली और ट्रेंड-आधारित ट्रेडिंग ने भी इसमें भूमिका निभाई है। जिन लोगों ने हाल ही में ऊंचे दाम पर चांदी खरीदी थी, वे अब कीमतों में इस सुधार को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
चांदी सिर्फ निवेश का साधन नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और औद्योगिक उत्पादन में भी बड़ी भूमिका निभाती है। ऐसे में इसकी कीमतों में गिरावट का असर केवल सर्राफा बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अन्य सेक्टरों पर भी पड़ता है।
गोल्ड प्राइस में भी नरमी
चांदी के साथ-साथ सोने के दामों में भी गिरावट आई है। गोल्ड प्राइस में आई यह नरमी उन ग्राहकों के लिए राहत की खबर हो सकती है जो शादी-ब्याह या निवेश के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, सोने के दाम अभी भी ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तरों के आसपास बने हुए हैं।
सोने की कीमतों में यह फिसलन वैश्विक बाजार में बने दबाव की वजह से है। अमेरिका और यूरोप के आर्थिक संकेत, डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने गोल्ड मार्केट को प्रभावित किया है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो आमतौर पर सोने पर दबाव बढ़ता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत डॉलर में तय होती है।
भारत में सोने की मांग शादी और त्योहारों के सीजन में आमतौर पर बढ़ती है, लेकिन इस समय कीमतों में नरमी आने से बाजार में खरीदारी का माहौल बन सकता है। कई ज्वेलर्स का मानना है कि अगर यह ट्रेंड कुछ और दिनों तक बना रहा, तो रिटेल डिमांड में सुधार देखा जा सकता है।
ताजा गोल्ड और सिल्वर रेट
बाजार से मिल रही जानकारी के अनुसार, आज भारत में चांदी का भाव करीब ₹2,43,303 प्रति किलो के आसपास दर्ज किया गया है। वहीं सोने का रेट करीब ₹1,52,690 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बना हुआ है। हालांकि, शहर और बाजार के हिसाब से इसमें थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है।
दिल्ली, मुंबई, जयपुर, लखनऊ, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े बाजारों में हॉलमार्क गोल्ड और फाइन सिल्वर के दाम अलग-अलग हो सकते हैं। स्थानीय टैक्स, मेकिंग चार्ज और ज्वेलरी शॉप की प्राइसिंग नीति भी अंतिम खरीद कीमत को प्रभावित करती है।
खरीदारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि सर्राफा बाजार में दिनभर भाव बदल सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ताजा रेट चेक करना जरूरी है। खासकर उन लोगों के लिए जो बड़े बजट की ज्वेलरी या निवेश के लिए बुलियन खरीदना चाहते हैं।
क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम
गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं। सबसे पहले, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है। जब बाजार में अनिश्चितता कम होती है या ट्रेडर्स मुनाफा निकालते हैं, तो सोने-चांदी पर दबाव बनता है।
दूसरा कारण डॉलर की मजबूती है। अमेरिकी मुद्रा मजबूत होने पर कीमती धातुएं आमतौर पर कमजोर पड़ती हैं। भारत जैसे देशों में, जहां आयातित सोना और चांदी डॉलर आधारित कीमतों पर निर्भर करते हैं, वहां इसका सीधा असर दिखाई देता है।
तीसरा कारण ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें हैं। जब बाजार को लगता है कि केंद्रीय बैंक लंबे समय तक ऊंची दरें बनाए रख सकते हैं, तो निवेशक गैर-ब्याज वाली परिसंपत्तियों जैसे गोल्ड से दूरी बना लेते हैं। इससे सोने की मांग पर असर पड़ता है।
चांदी के मामले में औद्योगिक उपयोग भी एक बड़ा फैक्टर है। अगर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स या सोलर सेक्टर में मांग कमजोर पड़ती है, तो सिल्वर प्राइस जल्दी नीचे आ सकता है। यही वजह है कि चांदी में अक्सर सोने से ज्यादा तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
भारतीय बाजार पर असर
भारत में सोना और चांदी केवल निवेश नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व भी रखते हैं। शादी, त्योहार और शुभ अवसरों पर इनकी खरीदारी आम बात है। ऐसे में कीमतों में गिरावट का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
ज्वेलरी व्यापारियों के मुताबिक, रेट गिरने पर ग्राहक थोड़े सक्रिय हो जाते हैं। लोग यह सोचकर खरीदारी करते हैं कि शायद यह सही समय है। हालांकि, अस्थिरता ज्यादा हो तो कई खरीदार इंतजार भी करते हैं। यही वजह है कि सर्राफा कारोबार में हर छोटी-मोटी हलचल भी बिक्री और खरीद पर असर डालती है।
निवेशकों के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण माना जाता है। जो लोग लंबे समय के लिए सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं, वे गिरावट के दौरान खरीदारी को बेहतर अवसर मानते हैं। वहीं, शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स मौजूदा वोलैटिलिटी से फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
निवेशक क्या करें
अगर आप गोल्ड या सिल्वर में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो जल्दबाजी में फैसला लेने की जरूरत नहीं है। बाजार के विशेषज्ञ मानते हैं कि कीमतों की यह गिरावट अवसर भी हो सकती है, लेकिन साथ ही जोखिम भी बना हुआ है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने निवेश लक्ष्य को समझना जरूरी है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना अभी भी एक मजबूत एसेट माना जाता है। आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और मुद्रा में उतार-चढ़ाव के समय सोना अक्सर सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। दूसरी ओर, चांदी में ज्यादा वोलैटिलिटी होती है, लेकिन औद्योगिक मांग बढ़ने पर इसमें तेज रिकवरी भी देखने को मिल सकती है।
यदि आप ज्वेलरी खरीद रहे हैं, तो केवल ग्रेट मार्केट रेट ही नहीं, बल्कि मेकिंग चार्ज, जीएसटी और शुद्धता की जांच भी करें। 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने में अंतर समझना भी जरूरी है। इसी तरह, चांदी खरीदते समय फाइननेस और बिलिंग डिटेल्स पर ध्यान देना चाहिए।
आगे क्या हो सकता है
मौजूदा गिरावट के बाद बाजार की नजर अब अगले कुछ कारोबारी सत्रों पर है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी जारी रही, तो गोल्ड और सिल्वर दोनों में और नरमी देखी जा सकती है। लेकिन अगर डॉलर कमजोर पड़ता है या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो कीमतें फिर से ऊपर जा सकती हैं।
कमोडिटी विश्लेषकों का कहना है कि सोने-चांदी के बाजार में इस समय दिशा साफ नहीं है। ऐसे में छोटी अवधि में तेज उतार-चढ़ाव संभव है। निवेशकों को एक्सपर्ट सलाह, बाजार ट्रेंड और ताजा डेटा पर नजर रखनी चाहिए।
त्योहारी और वेडिंग सीजन से पहले कीमतों में गिरावट आमतौर पर रिटेल खरीदारी बढ़ाती है। इसलिए आने वाले दिनों में ज्वेलरी मार्केट में हलचल देखने को मिल सकती है। यदि रेट और नीचे आते हैं, तो कई खरीदारों के लिए यह आकर्षक स्तर साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, आज का दिन गोल्ड और सिल्वर बाजार के लिए कमजोर साबित हुआ है। चांदी में करीब 5,000 रुपये प्रति किलो की गिरावट और सोने में आई नरमी ने निवेशकों और खरीदारों दोनों का ध्यान खींचा है। हालांकि यह गिरावट राहत देने वाली है, लेकिन बाजार अभी भी अस्थिर बना हुआ है। ऐसे में समझदारी यही होगी कि खरीदारी से पहले ताजा रेट, शुद्धता और बाजार ट्रेंड की पूरी जांच की जाए।
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