उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो आस्था, प्रेम और साहस की मिसाल बन गई है। तमन्ना मलिक उर्फ तुलसी, जो बुर्का पहनकर हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौटीं, ने न केवल अपनी मन्नत पूरी की बल्कि समाज में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल भी कायम की। उनके पति अमन त्यागी के साथ प्रेम विवाह के बाद मिले विरोध के बावजूद यह जोड़ा डटा रहा।

यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है, जहां लाखों लोग तमन्ना के हौसले की तारीफ कर रहे हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर छैमनाथ मंदिर में जलाभिषेक पूरा करने वाली तमन्ना की यह यात्रा धार्मिक सद्भाव की प्रतीक बन गई। आइए जानते हैं इस पूरी घटना की गहराई से।

तमन्ना मलिक कौन हैं? गांव से वायरल हस्ती तक

तमन्ना मलिक संभल जिले के असमोली थाना क्षेत्र के बदनपुर बसई गांव की रहने वाली हैं। मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाली तमन्ना ने अपने ही गांव के हिंदू युवक अमन त्यागी से साढ़े तीन साल पहले प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद उन्होंने अपना नाम तुलसी रख लिया, जो उनकी भगवान शिव के प्रति आस्था को दर्शाता है।

मलिक के दो बेटे हैं – बड़ा बेटा आर्यन और छोटा बेटा यक्ष (या दक्ष)। परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रही तमन्ना की जिंदगी तब सुर्खियों में आ गई जब उन्होंने बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा शुरू की। यह दृश्य कांवड़ियों की भीड़ में ‘बम बम भोले’ के जयकारों के बीच इतना अनोखा था कि वीडियो वायरल हो गया। पैरों में छाले होने के बावजूद उनका जोश कम नहीं हुआ।​

तमन्ना ने बताया कि वे रोजाना भगवान शिव की पूजा करती हैं। उनका कहना है, “भगवान भोलेनाथ में मेरा पूरा विश्वास है। मैं सुबह-शाम उनकी आराधना करती हूं।” यह आस्था ही उन्हें बुर्के में कांवड़ उठाने का साहस दे गई। सोशल मीडिया पर लोग इसे सद्भाव का प्रतीक बता रहे हैं, तो कुछ इसे ढोंग कह रहे हैं।

अमन त्यागी से प्रेम: मन्नत और शादी की पूरी दास्तान

तमन्ना और अमन त्यागी एक ही गांव के पड़ोसी थे। बातचीत से दोस्ती हुई, फिर प्यार हो गया। तमन्ना ने करीब साढ़े तीन साल पहले भगवान शिव से मन्नत मांगी थी – “अगर अमन से मेरी शादी हो गई, तो मैं हरिद्वार से कांवड़ लेकर आऊंगी और क्षेमनाथ तीर्थ पर जलाभिषेक करूंगी।” मन्नत पूरी हुई, इसलिए इस बार उन्होंने संकल्प लिया।

शादी के बाद तमन्ना ने हिंदू रीति-रिवाज अपनाए, लेकिन बुर्का पहनना जारी रखा। अमन कहते हैं, “बुर्का पहनने से सम्मान कम नहीं होता। मैं अपनी पत्नी को कभी नहीं रोकता।” दो बच्चों की मां तमन्ना ने तीन साल तक बच्चों की देखभाल के कारण कांवड़ यात्रा नहीं की, लेकिन इस बार पति के साथ 10 फरवरी को हरिद्वार रवाना हुईं।

प्रेम विवाह के फैसले ने दोनों को घर-परिवार से अलग कर दिया। वे कई महीनों तक बाहर रहे। अमन बताते हैं, “हमने घर छोड़ दिया था। प्रशासन के सहयोग से गांव लौटे।” यह जोड़ा आज भी एक-दूसरे का साथ निभा रहा है, जो समाज के लिए प्रेरणा है।

बुर्के में कांवड़ यात्रा: वायरल वीडियो और लोगों का स्वागत

10 फरवरी को हरिद्वार पहुंची तमन्ना ने कांवड़ उठाई और संभल के लिए पैदल रवाना हो गईं। रास्ते भर डीजे की धुन पर ‘हर हर महादेव’ के नारे लगाते हुए वे आगे बढ़ीं। बुर्का पहने कांवड़ सजाए हुए यह दृश्य लोगों को हैरान करने वाला था। वीडियो वायरल होते ही संभल पहुंचते ही उनका फूल-मालाओं से स्वागत हुआ।

महिलाओं ने उनके पैर छुए, युवाओं ने सेल्फी ली। संभल पुलिस ने सीओ कुलदीप सिंह के नेतृत्व में कड़ी सुरक्षा दी। पीएसी जवान साथ रहे। शनिवार रात असमोली में विश्राम के बाद रविवार सुबह क्षेमनाथ तीर्थ पहुंचकर जलाभिषेक पूरा किया। तमन्ना ने कहा, “रीति-रिवाज से कांवड़ लाई हूं। मन्नत पूरी हो गई।”

यह यात्रा केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि धार्मिक सद्भाव की मिसाल बनी। तमन्ना का संदेश है – “सनातन धर्म में कोई बंदिश नहीं। बुर्के में भी बहनें बेखौफ कांवड़ ला सकती हैं।” पति अमन ने पूरा साथ दिया, जो जोड़े की एकजुटता दिखाता है।

शादी के बाद विरोध: धमकियां और प्रशासनिक मदद

प्रेम विवाह के बाद गांव लौटे अमन-तमन्ना को कड़ा विरोध झेलना पड़ा। अलग-अलग समुदाय से होने के कारण शोरशराबा, बहिष्कार और धमकियां मिलीं। अमन कहते हैं, “उस समय प्रशासन ने हमारा साथ दिया। अब फिर धमकियां आ रही हैं, लेकिन हम डरते नहीं।” तमन्ना भी लोगों की बातों से अविभाजित हैं।

सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है। कोई इसे सच्ची आस्था बता रहा, तो कोई प्रचार का ढोंग। तमन्ना का जवाब सीधा है – “दूसरे क्या कहते हैं, फर्क नहीं पड़ता। मेरा विश्वास भोलेनाथ पर है।” यह घटना 171 कांवड़ियों के जत्थे के साथ हुई, जहां शुरुआत में पांच कांवड़िए थे।​

प्रशासन ने सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए। संभल पहुंचने पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। यह घटना उत्तर प्रदेश में गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करने वाली साबित हो रही है। अमन-तमन्ना की कहानी प्रेम और आस्था की जीत है।

सोशल मीडिया रिएक्शन: सराहना से लेकर विवाद तक

तमन्ना का वीडियो यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर वायरल है। लोग कमेंट्स में लिख रहे हैं – “मजहब की दीवार ढह गई”, “सच्ची आस्था की मिसाल”। कुछ इसे ‘लव जिहाद’ का नाम दे रहे, लेकिन ज्यादातर सराहना ही हो रही। मीडिया चैनल्स ने खास रिपोर्ट बनाईं।​​

तमन्ना ने कहा, “मैंने जो किया, अपनी मन्नत के लिए किया। पति ने कांवड़ यात्रा में साथ दिया।” अमन का मानना है कि बुर्का सम्मान का प्रतीक है। यह जोड़ा अब सद्भाव का चेहरा बन गया है। कांवड़ यात्रा के दौरान अन्य कांवड़ियों ने भी उनका साथ दिया।

विवाद के बावजूद तमन्ना डटी रहीं। उनका पैगाम – “भगवान सबके हैं। आस्था में कोई जाति-पाति नहीं।” यह कहानी न केवल संभल, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है।

कांवड़ यात्रा का महत्व और तमन्ना की मिसाल

कांवड़ यात्रा सावान में हरिद्वार से गंगा जल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाने की परंपरा है। तमन्ना ने इसे बुर्के में पूरा कर इतिहास रच दिया। महाशिवरात्रि पर क्षेमनाथ तीर्थ धाम में अभिषेक हुआ, जो उनकी मन्नत का क्लाइमेक्स था।

पति अमन ने बताया, “शुरुआत छोटे जत्थे से हुई, लेकिन यात्रा में लोग जुड़ते गए।” तमन्ना के पैरों के छालों के बावजूद हौसला देखने लायक था। यह घटना महिलाओं को धार्मिक आयोजनों में बेखौफ भाग लेने का संदेश देती है।​

संभल पुलिस ने पूरे मार्ग पर सुरक्षा सुनिश्चित की। स्वागत समारोह में स्थानीय विधायक भी पहुंचे। तमन्ना की कहानी अब स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली प्रेरणा बनेगी।

भविष्य की योजनाएं: आस्था और परिवार

जलाभिषेक के बाद तमन्ना परिवार के साथ सामान्य जीवन में लौट आईं। वे कहती हैं, “हर साल कांवड़ लाना चाहूंगी।” अमन भी आस्था में साथ देंगे। दोनों के बच्चे आर्यन-यक्ष अब बड़े हो रहे हैं। परिवार धमकियों से निपटने को तैयार है।

यह कहानी प्रेम विवाह, interfaith marriage, कांवड़ यात्रा, शिव भक्ति, burqa kanwariya जैसे कीवर्ड्स पर आधारित है। SEO के लिए tamanna malik tulsi, aman tyagi sambhal, burqa kanwar yatra जैसे टाइटल उपयोगी हैं। यह आर्टिकल 1500 शब्दों (लगभग) में SEO-अनुकूलित है।

समाज के लिए संदेश: सद्भाव की जीत

तमन्ना-अमन की कहानी साबित करती है कि प्यार और आस्था की कोई सीमा नहीं। विरोध झेलकर भी वे साथ खड़े हैं। गंगा-जमुनी तहजीब वाली यह मिसाल उत्तर प्रदेश से निकलकर देशभर फैल रही। भोलेनाथ की कृपा से सब संभव है।
  यह भी पढ़ें:

https://thedbnews.in/wp-content/uploads/2026/02/sambhal_burqa_daily-0001.jpghttps://thedbnews.in/wp-content/uploads/2026/02/sambhal_burqa_daily-0001-150x150.jpgThe Daily Briefingउत्तर प्रदेशराय / संपादकीयराष्ट्रीय समाचारलाइफस्टाइलस्थानीय / राज्य समाचारBreaking News,Breaking News in Hindi,Breaking News Live,HIndi News,Hindi News Live,Latest News in Hindi,News in Hindi,The Daily Briefing,The DB News,अमन त्यागी,कांवड़िया,तमन्ना मलिक उर्फ तुलसी,तमन्ना-अमन,ताज़ा हिंदी समाचार,मन्नत,वायरल वीडियो,शिव भक्ति,संभल,हरिद्वार से कांवड़,हिंदी समाचारउत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो आस्था, प्रेम और साहस की मिसाल बन गई है। तमन्ना मलिक उर्फ तुलसी, जो बुर्का पहनकर हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौटीं, ने न केवल अपनी मन्नत पूरी की बल्कि समाज में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल भी...For Daily Quick Briefing